)
Bagaha News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बीच बगहा के एक छोटे से गांव की महिलाओं ने अनोखा अभियान चलाया है. एकजुट होकरदर्जनों महिलाएं इन दिनों हाथों में झाड़ू और डंडा लेकर नशे के खिलाफ पहरेदारी कर रही हैं. पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़गो गांव में महिलाओं ने इस अभियान के तहत वह कर दिखाया है, जो अब तक पुलिस भी नहीं कर पाई. लिहाजा आधी आबादी की चर्चा जोरों पर है. खास बात यह है कि गांव की महिलाओं ने ठान लिया है कि अब न तो यहां कोई शराब बनाएगा और न ही कोई शराब का सेवन करेगा. इतना ही नहीं, गांव में प्रतिबंधित शराब की बिक्री पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ी नशे की गिरफ्त में न आ सके. बताया जा रहा है कि बिहार में करीब दस वर्षों से शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद गांव में अवैध शराब की चोरी-छिपे बिक्री और सेवन किया जा रहा था. इससे तंग आकर गांव की महिलाओं ने अब खुद ही मोर्चा संभाल लिया है.
शाम होते ही गश्त पर निकलती हैं महिलाएं
करीब एक सप्ताह से गांव की महिलाएं शाम होते ही हाथों में डंडा और झाड़ू लेकर गश्त पर निकल रही हैं. गांव में जहां भी शराब पीते या पिलाते लोग मिलते हैं, महिलाएं उन्हें रोकने के साथ विरोध कर रही हैं. विगत सप्ताह तक न सिर्फ चोरी-छिपे शराब की बिक्री होती थी, बल्कि गांव के कई लोग इसका सेवन भी कर रहे थे. युवा पीढ़ी भी इस बुरी लत की गिरफ्त में आ रही थी. हालांकि पुलिस ने कई बार कार्रवाई भी की, जिसमें आरोपी जेल जाते और जेल से छूटने के बाद फिर से इसी धंधे में लग जाते थे. इससे सबसे ज्यादा परेशानी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को होती थी. पति दिनभर मजदूरी करने के बाद शाम को पगार के पैसे मिलते ही शराब पीने चले जाते थे, जिससे घर में रोज लड़ाई-झगड़े और मारपीट जैसी छिटपुट घटनाएं होती थीं.
शराब से बिगड़ रहा था घर का माहौल
अनोखे अभियान में शामिल महिलाओं का कहना है कि शराब के कारण परिवार में विवाद और आर्थिक परेशानी बढ़ रही है. लिहाजा उन्होंने गांव को नशामुक्त बनाने का निर्णय लिया है. यही वजह है कि दिनभर घर-गृहस्थी का काम निपटाने के बाद शाम को महिलाएं एकजुट होकर शराब की निगरानी कर रही हैं. महिलाओं की इस मुहिम का असर अब गांव में दिखाई देने लगा है. जानकारी के मुताबिक, गांव में होने वाली अवैध शराब की बिक्री पर काफी हद तक रोक लगी है. विरोध के कारण शराब पीने वाले लोग अब घर से बाहर निकलकर शराब पीने से परहेज करने लगे हैं. कई शराबी पति भी अपनी पत्नियों के इस रुख से भयभीत हैं. इधर, नारी विकास शक्ति जीविका समूह की अध्यक्ष फूलकली देवी का कहना है कि गांव समेत घरों के बिगड़ते माहौल को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. पहले बाहरी लोगों को खदेड़ने का काम शुरू हुआ. अब बाहरी लोगों का आना-जाना बंद हो गया है, जिससे गांव में शराब की बिक्री भी बंद है. वहीं सोनखर पंचायत की मुखिया रमिता देवी ने कहा कि महिलाओं ने जो कदम उठाया है, वह काबिले तारीफ है.
मजदूरी की कमाई शराब में उड़ने से बढ़े विवाद
मुहिम में सहयोगी नगीना देवी की मानें तो पहले चंद महिलाएं ही इस अभियान से जुड़ी थीं, लेकिन आज करीब 50 महिलाएं इस अभियान में खुलकर सहयोग कर रही हैं. इनमें शांति देवी, इंदिरा देवी, द्रौपदी देवी, इंद्राणी देवी, सुनीता देवी, श्याम ज्योति देवी सहित कई महिलाएं शामिल हैं. कुछ पुरुषों का भी सहयोग मिल रहा है. बता दें कि जिले के जीतपुर बंजरिया, धंगड़हिया, धागड़ टोली समेत मुशहरी और कई आदिवासी बहुल गांवों में आज भी देसी चुलाई शराब का निर्माण जारी है, जिसकी खेप आसपास के गांवों में आसानी से पहुंचाई जाती है. लिहाजा एकजुट महिलाओं ने कहा है कि शराब के खिलाफ उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि युवाओं के साथ-साथ परिवारों को भी बर्बाद होने से बचाया जा सके.
रिपोर्ट: इमरान अजीज