क्या होता है ऑनलाइन पिंडदान और कैसे होती है यह पूरी प्रक्रिया?
Pitru Paksha 2026: गयाजी में 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक पितृपक्ष मेला चलेगा. जो श्रद्धालु गयाजी पहुंचकर पिंडदान नहीं कर सकते, उनके लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) ने ऑनलाइन पिंडदान की सुविधा शुरू की है.
Pitru Paksha 2026: बिहार के गयाजी में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला आगामी 25 सितंबर से शुरू होना वाला है, जोकि 10 अक्टूबर तक चलेगा. सनातन धर्म में गयाजी का बड़ा ही महत्व है. मान्यता है कि गयाजी में फल्गू नदी के किनारे पूर्वजों का पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि भागवान राम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ इसी नदी के किनारे अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था. हर साल गयाजी में पितृपक्ष के समय देश और विदेश से लाखों लोग यहां आते है और फल्गू नदी के तट पर अपने पूर्वजों का पिंडदान करते है. जो लोग गयाजी आकर अपने पितरों का तर्पण नहीं कर पा रहे हैं, उनके लिए अब बिहार सरकार ने बड़ा इंतजाम किया है. ये लोग अब ऑनलाइन पिंडदान कर सकते हैं. जो गयाजी नहीं आ सकते हैं, ऐसे श्रद्धालुओं के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) ने ऑनलाइन पिंडदान उपलब्ध कराई है.
ऑनलाइन पिंडदान के लिए कैसे अप्लाई करें?
जो लोग गयाजी में अपने पुर्वजों का पिंडदान करना चाहते हैं, लेकिन किसी कारणवश जा नहीं पाते उनके लिए ऑनलाइन पिंडदान बड़ी सुविधा प्रदान करता है. 'ऑनलाइन पिंडदान' के लिए सबसे पहले बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर बुकिंग करना पड़ेगा. इस वेबसाइट पर जाने के लिए आपकों bookingtourism.bihar.gov.in पर जाना होगा. इस वेबसाइट के खुलने के बाद BOOK SERVICE का एक मेनू दिखाई देगा. इस पर जब किल्क करेंगे तब जाके आपको 'पिंडदान सेवा' पर क्लिक करें. इसके बाद 'ऑनलाइन पिंडदान' का पेज खुल जाएगा. इस पेज के सबसे आखिरी में आपको Online E-Pind Daan का ऑप्शन देखने को मिलेगा. यहां View Package पर क्लिक करते ही सारे पैकेज खुल जाएंगे. यहां आपको अपनी सारी जानकारी भरनी होगी. फिर पेमेंट का ऑप्शन आएगा, जिसके बाद आप ऑनलाइन माध्यम से पेमेंट करके बुकिंग कर सकते हैं.
कैसे होता है ऑनलाइन पिंडदान?
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम ने ऑनलाइन पिडंदान के लिए 23 हजार रुपये का पैकेज निर्धारित किया है. बुकिंग करने के बाद आप घर बैठे भी ऑनलाइन माध्यम से पिंडदान कर सकते है. सबसे पहले पिडंदान से जुड़े सारा कर्मकांड आपके नाम से गयाजी में बैठे पंडा कराएंगे. इस अनुष्ठान की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी. फिर इस वीडियो के पेन ड्राइव में डाल कर पिंडदानी को भेजा जाएगा. आपको बता दे कि ऑनलाइन पिंडदान की प्रक्रिया गयाजी की तीन प्रमुख वेदियों विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी पर पूरी की जाती है. बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की इस पहल ने वैश्विक स्तर पर गयाजी की धार्मिक महत्ता को बढ़ाया है.
गयाजी के पंडा क्यों कर रहे इसका विरोध?
लोगों की सुविधा के लिए प्रशासन ने ऑनलाइन पिंडदान की व्यस्था की है. अब जो लोग गयाजी नहीं पहुंच पाएंगे, वे ऑनलाइन पिंडदान के जरिए अपने पुर्वजों का पिंडदान कर सकते हैं. लेकिन गयाजी का पंडा समाज इसका विरोध कर रहा है. उनका कहना है कि सनानतन परंपरा और शास्त्रों में पिंडदान का धार्मिक विधान है, जिसे ऑनलाइन माध्यम से कराना उचित नहीं है. उन्होंने सरकार पर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने और ऑनलाइन पिंडदान के माध्यम से लोगों को ठगने का आरोप लगाया है. गयाजी के पंडितों का कहना है कि धार्मिक ग्रंथों, वेदों और शास्त्रों में ऑनलाइन पिंडदान की व्यवस्था का कोई प्रमाण नहीं है. यहां के पंडितों का यह भी कहना है कि पिंडदान पूरी तरह वैदिक परंपरा से जुड़ा धार्मिक विधान है और इसे ऑनलाइन माध्यम से पूरा नहीं किया जा सकता.