गोपालगंज में बाहुबल और वर्चस्व की पुरानी कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है. वजह है चर्चित बाहुबली विशाल सिंह की करीब सात साल बाद भागलपुर जेल से रिहाई. विशाल सिंह के जेल से बाहर आते ही सतीश पांडे और उनके बीच पुरानी अदावत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. कभी गोपालगंज में वर्चस्व की लड़ाई और गैंगवार की घटनाओं ने पूरे बिहार का ध्यान खींचा था. अब सवाल उठ रहा है कि क्या पुराने विवाद एक बार फिर कोई नया मोड़ लेंगे?
गोपालगंज में जेडीयू के बाहुबली विधायक आमरेंद्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडे का भाई सतीश पांडेय पिछले दो दशक से अपराध की दुनिया में सक्रिय है. सतीश पांडे पर लगभग 90 से 100 हत्या, रंगदारी, लुट जैसे गंभीर मुकदमे दर्ज है. वही, विशाल सिंह पर 40 से 50 गंभीर मुकदमे दर्ज है. गोपालगंज जिले में विधायक आमरेंद्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडे का भाई सतीश पांडेय और विशाल सिंह की वर्चस्व की लड़ाई है. मीरगंज थाना क्षेत्र के मटिहानी गांव के रहने वाले विशाल सिंह पर भी हत्या, रंगदारी समेत कई आपराधिक मामलों में संलिप्तता के आरोप लगते रहे हैं.
साल 2019, गोपालगंज में वर्चस्व की लड़ाई ने उस वक्त गंभीर रूप ले लिया, जब जेपी यादव समेत परिवार के तीन लोगों की हत्या का मामला सामने आया. इस मामले में सतीश पांडे और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के नाम भी सामने आए थे. कभी सतीश पांडे के करीबी रहे जेपी यादव से बाद में उनके संबंध बिगड़ गए और वह विशाल सिंह के गुट से जुड़ गए थे. वहीं, विशाल सिंह ने जी न्यूज से बात करते हुए कहा कि बाहुबली सतीश पांडे और उनके विधायक भाई पप्पू पांडे के वजह से हम अपराध की दुनिया में आए. मैं जब नाबालिग था, तो गलत मुकदमा में हमें फंसा कर जेल भेज दिया गया. हमारे घर परिवार के लोगों का शोषण किया मारा गया. इस वजह से हम इस अपराध की दुनिया में आए.
विशाल सिंह ने आगे कहा कि आम बच्चों की तरह मैं भी पढ़-लिखकर पुलिस अधिकारी बनना चाहता था. लेकिन मेरे दुश्मन पप्पू पांडे और अमरेंद्र पांडे ने मुझे फंसा कर जेल भेज दिया और मुझे अपराध की दुनिया में आने पर मजबूर किया. अमरेंद्र पांडे और पप्पू पांडे ने जेपी यादव और उनके परिवार की हत्या कराई है.
साल 2019 में बिहार और उत्तर प्रदेश की एसटीएफ ने विशाल सिंह समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था. उस वक्त पुलिस ने उसके गिरोह के कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क और हथुआ अनुमंडल में दर्ज कई आपराधिक मामलों का जिक्र किया था. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पुरानी अदावत और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर चर्चाएं होती रहीं. हालांकि, अलग-अलग घटनाओं में किसकी क्या भूमिका रही, यह संबंधित मामलों के रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा.
फिलहाल, विशाल सिंह की रिहाई के बाद गोपालगंज में बाहुबल और पुरानी अदावत की कहानी फिर सुर्खियों में है. अतीत में वर्चस्व की लड़ाई से दहशत का दौर देख चुके इस जिले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या पुरानी अदावत सिर्फ चर्चा तक सीमित रहेगी, या आने वाले दिनों में घटनाक्रम कोई नया मोड़ लेगा?
रिपोर्ट: प्रिंस कुमार कुशवाहा