भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /बिहार
  • /विक्रमशिला सेतु पर बड़ा सवाल: 10 से ज्यादा चेतावनियों के बावजूद क्यों ध्वस्त हुआ स्लैब? 28 करोड़ की अस्थायी व्यवस्था फिर भी लाखों लोग परेशान

विक्रमशिला सेतु पर बड़ा सवाल: 10 से ज्यादा चेतावनियों के बावजूद क्यों ध्वस्त हुआ स्लैब? 28 करोड़ की अस्थायी व्यवस्था फिर भी लाखों लोग परेशान

Bhagalpur News: विक्रमशिला सेतु का स्लैब ध्वस्त होने के बाद लोगों की आवाजाही के लिए 28 करोड़ रुपये की लागत से बेली ब्रिज बनाया गया, जिस पर महज 115 दिनों तक आवागमन हुआ. 2024 से मार्च 2026 तक एक्सपेंशन जॉइंट में बढ़ते गैप को लेकर लगातार चेतावनी दिए जाने के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई, अब इस पर सवाल उठ रहे हैं.

Edited ByRupak Kumar
Published: Oct 05, 2026, 10:42 AM IST|Updated: Oct 05, 2026, 10:51 AM IST
joinshare
विक्रमशिला सेतु पर बड़ा सवाल: 10 से ज्यादा चेतावनियों के बावजूद क्यों ध्वस्त हुआ स्लैब? 28 करोड़ की अस्थायी व्यवस्था फिर भी लाखों लोग परेशान
Image Credit: विक्रमशिला सेतु पर बड़ा सवाल (zee media)

About the Author

Rupak Kumar

Rupak Kumar

रुपक कुमार मिश्रा zee bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-editor के तौर पर कार्यरत है. वे राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और रुटीन खबरों पर काम करते हैं. इसके अलावा, टेक्नोसिस मीडिया में इन्हें एक साल काम करने का अनुभव है. शिक्षा की बात करें तो राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से इन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.
Read More

ट्रेंडिंग

  • न्यूज़
  • फोटो
  • वीडियो
हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

2

अतीक अहमद के अवैध साम्राज्य पर फिर चला पुलिस का डंडा; मदनलाल के नाम दर्ज 30 करोड़ की 14 बेनामी संपत्तियां कुर्क

3

जान से खिलवाड़? घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली 108 एंबुलेंस, मालवाहक में ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर मरीज पहुंचे अस्पताल

4

'गुस्सा और बेबसी महसूस हुई', शिल्पा राव का शो बीच में रोके जाने पर भड़के पति; बोले-हम नहीं भूलेंगे

5

'मौत को छूकर टक से वापस आ गया': UK में तूफान बोएलो का खौफनाक मंजर; प्लेन की ऐसी लैंडिंग देख कांप उठी रूह

logo
  • contact us
  • privacy policy
  • legal
  • investor info
  • advertise with us
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

Bhagalpur News: पूर्वी बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाली विक्रमशिला सेतु का एक स्लैब बीते कुछ दिन पहले ध्वस्त हो गया था. इसके बाद आनन-फानन में लोगों के अवाजाही के लिए बेली ब्रिज का बनाया गया. सरकार ने इस काम के लिए कूल 28 करोड़ रुपये आवंटित किए गए और महज 115 दिनों तक इस ब्रिज से लोगों ने सफर किया. इससे देखा जाए तो अवाजाही के लिए 24 लाख रुपये रोजाना का खर्च इस अस्थायी व्यवस्था पर बैठा. लेकिन सवाल यह है कि क्या इतना पैसा खर्च करने के बाद भी पुल की सुरक्षा को लेकर समय रहते उठाई गई चेतावनियों पर ध्यान दिया गया?

10 से ज्यादा चेतावनियों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
2024 से मार्च 2026 तक जी मीडिया के जरिए एक नहीं, बल्कि 10 से ज्यादा बार शासन-प्रशासन को आगाह किया गया कि विक्रमशिला सेतु के एक्सपेंशन जॉइंट में लगातार गैप बढ़ रहा है और यह कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकता है. लेकिन इन चेतावनियों पर कार्रवाई कब हुई? तब, जब नवगछिया की तरफ ब्रिज के दूसरे छोर पर पिलर की प्रोटेक्शन वॉल टूट गई. इसके बाद करीब 5 करोड़ रुपये से मरम्मत की बात सामने आई और फिर आया 3 मई की रात का वह वक्त, जब विक्रमशिला सेतु के 134 नंबर खंभे के पास स्लैब ध्वस्त हो गया. वही हिस्सा, जिसके एक्सपेंशन जॉइंट में बढ़ते गैप को लेकर लगातार हमने सवाल उठाए थे. पुल का एक हिस्सा ध्वस्त हुआ और उसके साथ ही भागलपुर से लेकर पूरे पूर्वांचल और सीमांचल की कनेक्टिविटी और व्यापार पर संकट खड़ा हो गया.

पुल बंद, जहाज से सफर करने में परेशानी
आज हालात यह हैं कि पुल बंद है. लोगों को चिलचिलाती धूप और बढ़े हुए गंगा के जलस्तर के बीच जहाजों से सफर करना पड़ रहा है. दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार सामने हैं. ऐसे में सवाल है कि अगले तीन से चार महीने तक लाखों लोग किस तरह इस परेशानी से गुजरेंगे? क्या जहाजों की यह व्यवस्था त्योहारों की भीड़ और बढ़ते जलस्तर का दबाव झेल पाएगी? और क्या इस बार पुल की मरम्मत समय पर पूरी हो पाएगी?

समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं
दूसरी तरफ, विक्रमशिला सेतु को मजबूत करने के लिए रेट्रोफिटिंग, कार्बन फाइबर और कार्बन प्लेट बदलने जैसे काम किए जा रहे हैं. काम पूरा होने के बाद पुल की 180 टन क्षमता के हिसाब से लोड टेस्टिंग की जाएगी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पुल के एक्सपेंशन जॉइंट में बढ़ते गैप को लेकर पहले से चेतावनी दी जा रही थी, तो उस चेतावनी पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? समय पर कदम उठाए जाते तो 3 मई की रात विक्रमशिला सेतु का स्लैब ध्वस्त होने से रोका जा सकता था. अब जब करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लोगों की परेशानी जारी है, तो क्या मरम्मत के बाद विक्रमशिला सेतु पहले से ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद होकर सामने आएगा?

रिपोर्ट: अश्वनी कुमार

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:
Bhagalpur News