मोदी सरकार के इन 9 प्रोजेक्ट से बदल जाएगी बिहार की सूरत
मोदी सरकार की ओर से बिहार में सड़क, रेल और हवाई सेवाओं से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर बड़ी तेजी से काम चल रहा है. जब ये सारी योजनाएं धरातल पर उतर जाएंगीं, तो बिहार राज्य की तस्वीर बदल जाएगी.
मोदी सरकार की ओर से बिहार में लगभग 12 से 15 बड़े एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा, जिनमें पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे, आमस-दरभंगा, वाराणसी-कोलकाता और मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनवर्षा मार्ग शामिल हैं. ये सड़कें बिहार के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों और बड़े आर्थिक केंद्रों तक पहुंच आसान बनाने वाली हैं. इसके अलावा लगभग 30 बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है, जिनमें 10 नई लाइनें और 20 दोहरीकरण/मल्टी-ट्रैकिंग कार्य शामिल हैं. इन सभी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए 10,379 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही मोदी सरकार की ओर से 2030 तक प्रदेश में 13 एयरपोर्ट कार्यशील करने का लक्ष्य रखा गया है. इन सारे प्रोजेक्ट्स से राज्य की तस्वीर बदल सकती है.
- आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे- यह बिहार का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे है. भारत माला परियोजना के तहत इसका निर्माण कराया जा रहा है. यह हाईवे राज्य के गया, औरंगाबाद, पटना और दरभंगा सहित सात जिलों और 19 शहरों को जोड़ेगा. इस सड़क के बन जाने से उत्तर और दक्षिण संपर्कता आसान हो जाएगी. 189 किमी लंबे और 6 लेन चौड़े इस राजमार्ग के निर्माण में लगभग 5000 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बड़ी तेजी से इसका निर्माण कार्य चल रहा है.
- गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे- उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाने वाला यह एक्सप्रे.सवे बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों से होकर गुजरेगा और करीब 400 किलोमीटर का दायरा तय करेगा. छह लेन का यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद उत्तर बिहार से पश्चिम बंगाल और आगे पूर्वोत्तर की तरफ सड़क संपर्क को नया रफ्तार मिलने की उम्मीद है. करीब 520 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 32 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस हाईस्पीड सड़क पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकेंगे, जिससे सफर का समय काफी कम हो जाएगा.
- पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे- 245 किलोमीटर लंबा और 6-लेन चौड़ी यह सड़क, बिहार का पहला एक्सेस-कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा. पटना और पूर्णिया को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे वैशाली, पाटलिपुत्र, समस्तीपुर, दरभंगा तथा सहरसा होकर गुजरेगा. इस एक्सप्रेस वे में 21 हाई लेबल तथा 140 छोटे पुल बनेंगे. 19,871.11 करोड़ की लागत से बन रहे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण का लक्ष्य साल 2028 के अंत तक रखा गया है. इसकी डिजाइन ऐसी तैयार की गई है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से 6-लेन का बनाया जा सकेगा.
- वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे- भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे का 170 किलोमीटर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा. बिहार में यह एक्सप्रेसवे कैमूर, सासाराम, औरंगाबाद और गया जिलों से गुजरेगा. वहीं, झारखंड में चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो जो रांची के पास से निकलेगा. सासाराम में एक सुरंग बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया है. इस सुरंग के बनने से 15 किलोमीटर की दूरी और कम हो जाएगी. इसके अलावा बिहार में सोन नदी पर एक 3.5 किलोमीटर लंबा पुल भी बन रहा है. इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद वाराणसी से कोलकाता का सफर मात्र 6 से 7 घंटे में पूरा हो सकेगा.
- मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा राजमार्ग- मोदी सरकार ने इस हाईवे के लिए 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट तय किया है. यह नेशनल हाइवे-22 का मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन होगा. इस हाइवे को 4-लेन का बनाया जाएगा. इस सड़क के निर्माण से बिहार के धार्मिक पर्यटन को भी फायदा होगा. हाइवे के जरिए बौद्ध सर्किट, सीतामढ़ी का जानकी पुनौरा धाम मंदिर और मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ तक का सफर आसान होगा.
- ₹1323 करोड़ से बिछेंगी रेल लाइनें- बिहार में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई प्रोजेक्ट्स पर काम किए जा रहे हैं. प्रदेश में लगभग 1323 करोड़ रुपये से तीन फेज में रेल लाइनें बिछाई जाएंगी. पहले फेज में बख्तियारपुर और फतुहा के बीच 24 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट पर लगभग 931 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. दूसरे फेज में करीब 392 करोड़ रुपये से बख्तियारपुर और पुनारख के बीच रेल लाइन बिछाई जाएगी. तीसरे फेज में दिल्ली से हावड़ा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी. इस रेल रूट पर बिहार में भी रेल लाइनें बिछाने का काम होगा. इससे ना सिर्फ रेल यात्रियों को सुविधा मिल सकेगी, बल्कि व्यापारियों को भी अपना माल पहुंचाने में आसानी होगी.
- हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर- मोदी सरकार की ओर से देश में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें से वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा. बिहार की यह पहली बुलेट ट्रेन होगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने से दिल्ली से पटना के बीच का सफर सिर्फ 4.5 घंटे में पूरा हो सकेगा, जो अभी करीब 12 से 14 घंटे लेता है. इस हाई-स्पीड नेटवर्क से न केवल लाखों आम यात्रियों को समय की बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे.
- 9 से अधिक एयरपोर्ट हो रहे विकसित- उड़ान योजना और अन्य विकास योजनाओं के तहत मोदी सरकार की ओर से बिहार में 9 से अधिक एयरपोर्ट को बनाने या उन्हें विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है. वर्तमान समय में पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट संचालित हो रहे हैं. केंद्र सरकार की ओर से इस वक्त मधुबनी, वीरपुर (सुपौल), मुंगेर, वाल्मीकिनगर (बेतिया), भागलपुर और सहरसा में नए एयरपोर्ट बनाने या उन्हें विकसित किए जाने का काम किया जा रहा है. मोदी सरकार की ओर से 2030 तक प्रदेश में 13 एयरपोर्ट कार्यशील करने का लक्ष्य रखा गया है.