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मां मंगलागौरी करती हैं भक्तों की हर मनोकामना पूरी, पालनपीठ के रूप में प्रसिद्ध है गया का ये मंदिर

पावन नगरी गया की मान्यता हिन्दू धर्मलबियों के एक अलग ही पहचान और इतिहास के रूप में देखा जाता है. यहां भस्मकूट पर्वत पर शक्तिपीठ मां मंगलागौरी मंदिर स्थित है. मान्यता है कि मां के दरबार में आकर जो भी सच्चे मन से पूजा करते हैं, मां उस भक्त पर खुश होकर उसकी हर मनोकामना को पूरी करती है.

Edited By Shailendra
Published: Oct 19, 2026, 05:21 PM IST | Updated: Oct 19, 2026, 05:30 PM IST
Image Credit: पालनपीठ के रूप में प्रसिद्ध है मां मंगलागौरी मंदिर (Photo- वीडियो ग्रैब)
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नवरात्र के मौके पर प्रत्येक देवी स्थानों पर भक्तों की भारी भीड़ इकट्ठा हो रही है. ऐसे में बिहार के गया शहर से कुछ ही दूरी पर भस्मकूट पर्वत पर स्थित शक्तिपीठ मां मंगलागौरी मंदिर पर सुबह से ही भक्तों का तांता लग जाता है. मान्यता है कि यहां मां सती का वक्ष स्थल गिरा था, जिस कारण यह शक्तिपीठ पालनहार पीठ या पालनपीठ के रूप में प्रसिद्ध है. पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, भगवान भोले शंकर जब अपनी पत्नी सती का जला हुआ शरीर लेकर तीनों लोकों में उद्विग्न होकर घूम रहे थे, तो सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मां सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से काटा था. इसी क्रम में मां सती के शरीर के टुकड़े देश के विभिन्न स्थानों पर गिरे थे, जिसे बाद में शक्तिपीठ के रूप में जाना गया. इन्हीं स्थानों पर गिरे हुए टुकड़े में स्तन का एक टुकड़ा गया के भस्मकूट पर्वत पर गिरा था.

मंदिर के पुजारी अमरनाथ गिरी ने कहा कि इस शक्तिपीठ को असम के कामरूप स्थित मां कमाख्या देवी शक्तिपीठ के समान माना जाता है. कालिका पुराण के अनुसार, गया में सती का स्तन मंडल भस्मकूट पर्वत के ऊपर गिरकर दो पत्थर बन गए थे. इसी प्रस्तरमयी स्तन मंडल में मंगलागौरी मां नित्य निवास करती हैं जो मनुष्य शिला का स्पर्श करते हैं, वे अमरत्व को प्राप्त कर ब्रह्मलोक में निवास करते हैं. इस शक्तिपीठ की विशेषता यह है कि मनुष्य अपने जीवन काल में ही अपना श्राद्ध कर्म यहां संपादित कर सकता है और उसकी हर मनोकामना को मां पूर्ण करती हैं.

पुजारी अमरनाथ गिरी ने कहा कि मान्यता है कि इस मंदिर में आकर जो भी सच्चे मन से मां की पूजा और अर्चना करते हैं, मां उस भक्त पर खुश होकर उसकी मनोकामना को पूर्ण करती है. उन्होंने कहा कि यहां पूजा करने वाले किसी भी भक्त को मां मंगला खाली हाथ नहीं भेजतीं. इस मंदिर में साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. यहां गर्भगृह में ऐसे तो काफी अंधेरा रहता है, परंतु यहां वर्षो से एक दीप प्रज्वलित हो रहा है. कहा जाता है कि यह दीपक कभी बुझता नहीं है.

श्रद्धालु राज किशोर ने कहा कि यहां पर मां की पूजा करने हर किसी की मनोकामना पुरी होती है. नवमी पर इस मंदिर में भारी भीड़ रहती है. मां मंगला गौरी की पूजा करने आयी श्रद्धालु प्रिय कुमारी ने बताया कि भीड़ इतनी होती है कि दर्शन करना मुश्किल हो जाता है. हर साल माता के दर्शन के लिए भीड़ बढ़ती जाती है.

इस मंदिर में सिर्फ यहां के नहीं, बल्कि विदेशी भी आकर मां मंगला गौरी में पूजा अर्चना करते हैं. मां मंगला गौरी मंदिर में पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं को 100 से ज्यादा सीढ़ी चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है. पुराणों में भी है इस मंदिर का उल्लेख पद्म पुराण, वायु पुराण, अग्नि पुराण और अन्य लेखों में मिलता है. तांत्रिक कार्यो में भी इस मंदिर को प्रमुखता दी जाती है. हिंदू संप्रदाय में इस मंदिर में शक्ति का वास माना जाता है.

मंदिर में उपा शक्ति पीठ भी है, जिसे भगवान शिव के शरीर का हिस्सा माना जाता है. शक्ति पोषण के प्रतीक को एक स्तन के रूप में पूजा जाता है. कई और भी मंदिर हैं यहां मंदिर के गर्भगृह में देवी की प्रतिमा रखी है, यहां भव्य नक्काशी बनी हुई है. मंदिर के सामने वाले भाग में एक मंडप बना हुआ है. मंदिर परिसर में भगवान शिव और महिषासुर की प्रतिमा, मर्दिनी की मूर्ति, देवी दुर्गा की मूर्ति और दक्षिणा काली की मूर्ति भी विराजमान है. यहां कई और भी मंदिर है.

रिपोर्ट: जय प्रकाश कुमार

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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