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'माता-पिता की सैलरी और किसानी से आय को न जोड़ें', आरक्षण विवाद के बीच क्रीमी लेयर पर सम्राट सरकार के सख्त निर्देश

बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने क्रीमी लेयर पर नियमों को सख्त कर दिया है. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर साफ कहा कि बिहार के अधिकारी यह तय करते समय कि आवेदक के माता-पिता क्रीमी लेयर में आते हैं या नहीं, उनकी सैलरी या खेती से होने वाली इनकम को नहीं गिन सकते.

Written By K. Raj Mishra
Published: Sep 05, 2026, 12:30 PM IST | Updated: Sep 05, 2026, 01:39 PM IST
Image Credit: आरक्षण विवाद के बीच क्रीमीलेयर पर सम्राट सरकार के सख्त निर्देश (File Photo- Zee Media)
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देश में आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी में क्रीमी लेयर पर अपने पिछले आदेश के अमल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि ओबीसी क्रीमी लेयर का निर्धारण सिर्फ माता-पिता की आय या मासिक वेतन के आधार पर नहीं किया जा सकता. इसके बाद बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने क्रीमी लेयर पर नियमों को सख्त कर दिया है. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर साफ कहा कि बिहार के अधिकारी यह तय करते समय कि आवेदक के माता-पिता क्रीमी लेयर में आते हैं या नहीं, उनकी सैलरी या खेती से होने वाली इनकम को नहीं गिन सकते. 

दूसरे सोर्स की इनकम पर लागू होगी लिमिट

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अंडर सेक्रेटरी दिवाकर मणि ने कहा कि अधिकारियों को क्रीमी लेयर के लिए 8 लाख रुपये की सालाना इनकम की लिमिट तय करते समय माता-पिता की सैलरी और खेती से होने वाली इनकम को नहीं गिनना चाहिए. यह लिमिट सिर्फ दूसरे सोर्स से होने वाली इनकम पर लागू होती है. दिवाकर मणि ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में केंद्र सरकार के नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है.

गाइडलाइंस का पालन सख्ती से करने के निर्देश

क्रीमी लेयर गाइडलाइंस का पालन नहीं करने पर अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है. अंडर सेक्रेटरी ने कहा कि नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट जारी करने के लिए जाति, निवास और इनकम की जानकारी जरूरी है, लेकिन आवेदक को पहले हर एक के लिए अलग-अलग सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है.

'क्रीमी लेयर' क्या है?

'क्रीमी लेयर' शब्द 1971 में स्वामीनाथन आयोग की ओर से पेश किया गया था. आयोग ने सुझाव दिया था कि क्रीमी लेयर के तहत आने वाले लोगों को सिविल सेवा के पदों में आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए. फिलहाल, आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर शब्द का इस्तेमाल फिलहाल अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) कैटगरी के लिए इस्तेमाल होता है. क्रीमी लेयर के तहत आने वाले वाले लोग सरकार की शैक्षिक, रोजगार और अन्य व्यावसायिक लाभ योजनाओं के लिए पात्र नहीं माने जाते हैं. किसी परिवार की सालाना आय 8 लाख रूपये से कम है तो उस परिवार को नॉन क्रीमी लेयर की श्रेणी में रखा जायेगा और उसके बच्चों को OBC वाले 27% आरक्षण का लाभ मिलेगा. एससी-एसटी आरक्षण में इसे लागू नहीं किया गया है. इसकी मांग कुछ लोग बहुत पहले से कर रहे हैं.

क्रीमी लेयर के दायरे में कौन आएगा?

1. जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, लेकिन उनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये हो.
2. जिन बच्चों के माता-पिता सरकारी नौकरी में हों और उनका पद व रैंक प्रथम श्रेणी के अधिकारी का हो.
3. 14 अक्टूबर 2004 को जारी डीओपीटी स्पष्टीकरण के अनुसार, क्रीमी लेयर का निर्धारण करते समय वेतन या कृषि भूमि से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाता है.

क्रीमी लेयर के लिए संवैधानिक प्रावधान

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 (4), 16 (4) और 340 (1) में 'पिछड़े वर्ग' शब्द का उल्लेख मिलता है. अनुच्छेद 15(4) एवं 16(4) में प्रावधान किया गया है कि राज्य द्वारा सामाजिक और शैक्षिक रूप से 'पिछड़े वर्गों' के कल्याण के लिये विशेष प्रावधान किया जा सकता है या विशेष सुविधाएं दी जा सकती हैं.

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About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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