बिहार में अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल और खींचतान की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. नौकरशाही हावी होने के मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को विपक्ष के साथ-साथ अपनों का भी सामना करना पड़ रहा है. इसी कड़ी में बीते दिनों जमुई सदर अस्पताल में चार-पांच घंटे के अंतराल पर दो प्रसूताओं की मौत के बाद मामला तूल पकड़ गया था. इसके बाद जमुई की विधायक सह मंत्री श्रेयसी सिंह भी सदर अस्पताल पहुंची थीं और अस्पताल की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी. उन्होंने पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, लापरवाह डॉक्टरों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई. अब सिकंदरा से HAM विधायक प्रफुल्ल कुमार मांझी ने ईंट निर्माता संघ के कार्यक्रम में खनन विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी के सामने ही अवैध और अत्यधिक बालू खनन का मुद्दा उठाया है.
मंत्री-विधायक ही उठा रहे अफसरशाही पर सवाल
विधायक ने सिर्फ खनन से नदी के स्तर में आ रहे बदलाव और किसानों की सिंचाई की समस्या की बात नहीं कही, बल्कि अवैध खनन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल खड़े किए. यानी, एक तरफ एनडीए की मंत्री श्रेयसी सिंह अपने ही सरकार के स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं, तो दूसरी तरफ एनडीए के ही विधायक प्रफुल्ल मांझी खनन विभाग के मंत्री के सामने अवैध खनन और कार्रवाई को लेकर सवाल खड़ा कर रहे हैं.
मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने जांच का दिया आश्वासन
खनन विभाग के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने मामले को ज्यादा तुल ना देते हुए हमने कहा कि अगर मुझे कोई लिखित आवेदन प्राप्त होगा, तो उसके अनुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि इसमें जो भी अफसर शामिल होंगे, उनके खिलाफ भी एक्शन लिया जाएगा. मंत्री चंद्रवंशी ने आगे कहा कि मेरे विभाग ने लगभग 36 फीसदी अधिक कमाई किया है. अगर विभाग ने लापरवाही की होती, तो इतने पर्सेंट की बढ़ोतरी नहीं होती. हालांकि, विधायक प्रफुल्ल मांझी की शिकायत पर मंत्री ने जांच कराने की बात कही है.
विपक्ष से ज्यादा अपनों के सवालों से घिरी सरकार!
इन दोनों घटनाओं को एक साथ देखें तो सवाल सिर्फ स्वास्थ्य या खनन विभाग का नहीं रह जाता. सवाल यह भी है कि अगर सरकार के अपने ही मंत्री और विधायक को विभागीय व्यवस्था और कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक मंच पर सवाल उठाना पड़ रहा है, तो फिर जिले में अफसरशाही और अधिकारियों की जवाबदेही किस स्तर पर है? एनडीए के ही जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक आपत्तियों ने सरकार के सामने अधिकारियों की कार्यशैली और विभागीय निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना यह होगा कि सरकार इन सवालों को सिर्फ मंच से उठी आवाज मानती है या संबंधित विभागों के अधिकारियों पर कार्रवाई भी करती है.
रिपोर्ट- अभिषेक