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बिहार में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं. राज्य के विभिन्न जिलों में स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखते हुए घाटों की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है. घाटों की सफाई के साथ-साथ नगर निगम क्षेत्र की सड़कों, गलियों एवं आसपास के इलाकों में भी स्वच्छता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, घाटों, तालाबों और पोखरों की साफ-सफाई तीन चरणों में कराई जाएगी, ताकि महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें. इसके लिए बिहार सरकार लगातार प्रयास कर रही है. आइए, जानते हैं मधुबनी के मुकेश झा से कि उन्होंने घाटों की साफ-सफाई को लेकर क्या कुछ कहा.
मधुबनी के मुकेश झा बताते हैं कि छठ महापर्व को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से जिले के विभिन्न छठ घाटों और वहां तक पहुंचने वाले रास्तों पर विशेष साफ-सफाई कराई जा रही है. सभी घाटों के अलावा श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों को भी स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जा रहा है. घाटों पर साफ-सफाई, कचरा हटाने और आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.
मुकेश की तरह मृत्युंजय कुमार बताते हैं कि इस बार जिला प्रशासन की तत्परता से छठ घाटों की साफ-सफाई और व्यवस्था बेहद सुंदर नजर आ रही है. घाटों की स्वच्छता और सुंदरता देखकर मन काफी प्रसन्न है. ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि जिला प्रशासन ने छठ महापर्व को लेकर इतनी तत्परता से घाटों की सफाई और व्यवस्था सुनिश्चित की है. इससे छठ व्रतियों को भगवान सूर्य को अर्घ्य देने में काफी सहूलियत होगी.
घाटों पर मधुबनी पेंटिंग बनाई जा रही है. पारंपरिक लोककला से सजे घाटों की खूबसूरती देखते ही बन रही है. मधुबनी चित्रकला के माध्यम से छठ की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक महत्ता को भी दर्शाया जा रहा है. बांस के सूप, कोनिया, दौरा और मिट्टी के दीयों पर पारंपरिक मधुबनी चित्रकला बनाई जा रही है.
बिहार सरकार की इस पहल से मिथिला पेंटिंग को व्यापक पहचान मिल रही है. इसके अलावा, छठ पूजा के पारंपरिक माहौल में एक नया आकर्षण भी जुड़ रहा है. वहीं, इस पहल से स्थानीय कलाओं का विस्तार और प्रचार हो रहा है. कोई भी कला तभी समृद्ध होगी, जब वह लोगों तक पहुंचेगी. यह प्रयास न केवल बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि कलाकारों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो रहा है.
रिपोर्ट: बिंदु भूषण ठाकुर