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दशहरा आते ही देश के कोने-कोने में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले फुंके जाने लगते हैं. बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है. हर साल की तरह इस वर्ष भी रावण का दहन दशहरा पर होगा. 20 अक्टूबर, 2026 दिन मंगलवार को पूरे देश में विजयदशमी मनाई जाएगी. रावण के पुतले दहन किया जाएगा, लेकिन यहां रुकिए जरा! और सोचिए कि अगर दशहरा पर रावण के पुतले के दहन की जगह उनकी पूजा की जाए, तो फिर...! हां, भाई ये एकदम सच बात है. पूरे सोलह आना सच है. नहीं भरोसा हो रहा, तो फिर चलिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए और आप खुद ही जान लीजिए.
दरअसल, दशहरा के मौके पर बिहार के किशनगंज जिले से एक ऐसी खबर आती है, जो बिल्कुल अलग और हैरान कर देने वाली है. यहां लोग विजयादशमी के दिन रावण को जलाते नहीं, बल्कि श्रद्धा से उसकी पूजा करते हैं. राक्षस राज की आरती करते हैं. यह गांव किशनगंज के कोचाधामन प्रखंड में काशी बाड़ी है. इस गांव के लोगों ने रावण का बाकायदा एक मंदिर बना रखा है. मंदिर के अंदर 10 सिरों वाले लंकापति रावण की काले पत्थर की एक भव्य मूर्ति स्थापित है, जिसके हाथ में शिवलिंग नजर आता है, जिस तरह हम आम दिनों में देवी-देवताओं की धूप-दीप, आरती और पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं, ठीक वैसे ही काशी बाड़ी गांव में दशहरे के दिन लंकापति रावण की आरती उतारी जाती है.
काशी बाड़ी गांव के लोगों की मान्यता है कि इस मंदिर का अपना एक अलग ही चमत्कार है. कोई भी व्यक्ति अगर यहां सच्चे दिल से आकर माथा टेकता है और अपनी मनोकामना मांगता है, तो रावण बाबा उसकी मुराद जरूर पूरी करते हैं. यही वजह है कि सिर्फ गांव ही नहीं, बल्कि आसपास और दूर-दराज के इलाकों से भी लोग मन्नत मांगने यहां खिंचे चले आते हैं.
ध्यान दीजिएगा कि कोचाधामन प्रखंड में काशी बाड़ी गांव आता है. जो रहमत पाड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इस गांव में लंकापति की भव्य मूर्ति स्थापित है. स्थानीय लोगों का कहना है कि रावण प्रकांड विद्वान और शिव के सबसे महान भक्तों में से एक थे. इसलिए वे उनके इसी ज्ञानी और भक्त रूप को पूजते हैं. हर इस गांव के लोग लंकेश्वर के आगे अपना शीश झुकाते हैं और भजन करते हैं.