विश्व प्रसिद्ध गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेले में इन दिनों भक्ति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर न केवल देश के कोने-कोने से, बल्कि सात समंदर पार विदेशों से भी श्रद्धालु गया धाम पहुंच रहे हैं. इसी कड़ी में दक्षिण अफ्रीका से आए एक विदेशी श्रद्धालु ने गयाजी में पूरे विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया. पिंडदान के बाद श्रद्धालु ने भारत की समृद्ध परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति महान है.
श्रद्धालु ने तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में संपन्न कराया अनुष्ठान
मोक्षदायिनी फल्गु नदी के तट और पवित्र गयाजी की पावन भूमि पर इन दिनों हर तरफ मंत्रोच्चार और भक्ति का माहौल है. देश-विदेश से आ रहे श्रद्धालु अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट कर रहे हैं. इसी कड़ी में दक्षिण अफ्रीका से गयाजी पहुंचे श्रद्धालु आकर्षण का केंद्र बने रहे. उन्होंने स्थानीय तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया पूरी की.

गया जी में अफ्रीकी श्रद्धालु ने निभाई पूर्वजों के मोक्ष की परंपरा
अनुष्ठान संपन्न होने के बाद दक्षिण अफ्रीका से आए इस श्रद्धालु ने गयाजी के आध्यात्मिक वातावरण और यहां की सदियों पुरानी परंपराओं से प्रभावित होकर अपने अनुभव शेयर किए.

उन्होंने कहा कि गयाजी आकर उन्हें एक अद्भुत मानसिक शांति और ऊर्जा का अहसास हुआ है. सनातन धर्म की गहराई और पूर्वजों के प्रति सम्मान जताने की इस परंपरा ने उनके दिल को छू लिया. उनका यह बयान और वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हो रहा है.

सात समंदर पार तक सनातन की गूंज
गयाजी में पिंडदान की परंपरा का महत्व सीमाओं से परे है. दक्षिण अफ्रीका से आए श्रद्धालु का यहां पहुंचकर अनुष्ठान करना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि सनातन संस्कृति और गयाजी का धार्मिक महत्व आज पूरे विश्व को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.
रिपोर्ट: जय प्रकाश कुमार