पटना में NEET छात्रा की मौत का दोषी कौन? CBI ने भी बिना रिजल्ट लगा दी क्लोजर रिपोर्ट, देखें इस केस की अहम बातें?
8 महीने की छानबीन के बाद सीबीआई ने कोर्ट में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है. सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि उसे किसी के खिलाफ ऐसा साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके.
बिहार की राजधानी पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत का दोषी कौन है? इस सवाल का जवाब अब शायद ही कभी मिल पाएगा. 8 महीने की छानबीन के बाद भी CBI के हाथी खाली रहे और अब केंद्रीय जांच एजेंसी ने पटना की विशेष POCSO अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ घटना से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही है. मतलब अपनी पूरी मशीनरी का इस्तेमाल करने के बाद भी सीबीआई, छात्रा की मौत की वजह नहीं खोज पाई और न ही किसी दोषी की पहचान कर सकी है. सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट में 13 अक्टूबर को सुनवाई होनी है. अब कोर्ट ही तय करेगा कि इस केस को बंद किया जाए या जांच जारी रखी जाए.
अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद ने सीबीआई की ओर से क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि सीबीआइ ने क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि किसी के खिलाफ ऐसा साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके. इसके बाद अदालत ने मृतका के पिता को इसकी जानकारी के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. अब आगामी 13 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई होनी है. इस दौरान पीड़ित परिवार भी अदालत में मौजूद रह सकता है.
कब और कैसे हुई थी छात्रा की मौत?
दरअसल, 6 जनवरी 2026 को पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा बेहोश हालत में पाई गई. हॉस्टल प्रशासन उसे पहले नजदीकी सहजानंद क्लिनिक लेकर गए, फिर प्रभात अस्पताल में भर्ती कराया. यहां 11 जनवरी को लड़की की मौत हो गई. लड़की के परिजनों ने रेप के बाद हत्या की आशंका जताई, लेकिन पटना पुलिस ने तुरंत इससे इनकार करते हुए आत्महत्या घोषित कर दिया. पटना के एसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा था कि लड़की ने नींद की गोलियां खाई थीं, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई है. उन्होंने रेप की संभावनाओं से साफ इनकार कर दिया था.
इस केस ने नया मोड उस वक्त लिया, जब लड़की की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लड़की की बॉडी पर चोट के निशान मिले और रेप की पुष्टि की गई. इतना ही नहीं फॉरेंसिक जांच में लड़की के कपड़ों में ह्यूमन स्पर्म मिलने की बात सामने आई. पटना पुलिस की नाकामी के बाद सरकार ने केस को CBI को सौंप दिया था. 8 महीने की जांच के बाद भी सीबीआई के हाथ खाली रहे. सीबीआई की नाकामी में पटना पुलिस की लापरवाही सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है. पुलिस की लापरवाही से पहले ही सारे सबूत नष्ट हो चुके थे.
इस केस में कब-क्या हुआ?
6 जनवरी 2026 को पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल के एक बंद कमरे में नीट की तैयारी कर रही छात्रा बेहोश हालत में मिली. हॉस्टल प्रशासन उसे पहले नजदीकी सहजानंद क्लिनिक लेकर गए, फिर प्रभात अस्पताल में भर्ती कराया. 9 जनवरी को छात्रा के पिता ने रेप की आशंका जताई. पीड़ित पिता के बयान पर चित्रगुप्त नगर थाने में मूल प्राथमिकी दर्ज हुई. FIR होते ही प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की मालकिन नीलम अग्रवाल ने अस्पताल जाकर परिजनों से मुलाकात की. आरोप है कि उन्होंने परिजनों पर मामले को दबाने का दबाव डाला. 11 जनवरी को इलाज के दौरान अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई. पटना के एसएसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रेप की आशंका से इनकार करते हुए इसे आत्महत्या घोषित कर दिया.
13 जनवरी को छात्रा का पोस्टमार्टम कराया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ फिजिकल असॉल्ट का जिक्र किया गया. रही सही कसर फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पूरी कर दी. इसमें नीट छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म के सबूत मिलने की बात सामने आई. इससे पटना पुलिस की लापरवाही उजागर हो गई और सरकार को भी काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा. इसके बाद चित्रगुप्त नगर थाने की SI रोशनी कुमारी को सस्पेंड कर दिया गया. मामला तूल पकड़ने पर हॉस्टल संचालक मनीष कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसे बाद में कोर्ट से जमानत मिल गई. इसके साथ ही शंभू हॉस्टल को सील कर दिया गया.
पुलिस की लापरवाही से मिटे सबूत
पुलिस ने इस केस में एक नहीं बल्कि कई गलतियां कीं. छात्रा 6 जनवरी को हास्टल के कमरे में बेहोश में मिली थी. हॉस्टल प्रबंधन ने पुलिस को सूचित किए बिना ही उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया. अगर मान लें कि अस्पताल की ओर भी पुलिस को सूचना नहीं दी गई तो भी 9 जनवरी को लड़की के पिता ने शिकायत दर्ज करा दी थी. इसके बाद भी पुलिस ने हॉस्टल में छानबीन नहीं की. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल में लड़की को कुछ समय के लिए होश आया था, लेकिन उसका बयान नहीं दर्ज किया गया. वहीं, हॉस्टल में लड़की के कमरे की सफाई करा दी गई और बेडशीट भी धुल दी गई. पुलिस ने घटनास्थल (लड़की के कमरे) को सील करना भी जरूरी नहीं समझा था.