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जरा सोचिए... किसी गरीब के घर में मातम छाया हो, अंतिम संस्कार के लिए कफन तक के पैसे न हों, और सरकार द्वारा दी जाने वाली कबीर अंत्येष्टि अनुदान राशि पर भ्रष्टाचारियों के पंजे पड़ जाएं. बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत दरमहां पंचायत से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला महाघोटाला सामने आया है, जिसने इंसानियत को तार-तार कर दिया है. जांच रिपोर्टों की परतें जैसे-जैसे खुली हैं, कागजों से भ्रष्टाचार की ऐसी बू आ रही है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है. चलिए जानते हैं कि घोटाले की 5 सबसे बड़ी 'सर्जिकल स्ट्राइक' रिपोर्ट के बारे में.
1. बिना अर्जी के ही बांट दिए चेक/रुपये
विजय कुमार सिंह, सविता देवी, रीना देवी, रामअनुप सिंह और रेणु देवी जैसे दर्जनों लोगों के नाम सरकारी पोर्टल पर लाभार्थी के रूप में दर्ज कर दिए गए। जब जांच अधिकारी पहुंचे तो पता चला कि इन लोगों ने कभी कोई आवेदन दिया ही नहीं था यानी कागजों में अपने मन से नाम गढ़े गए और सरकारी खजाने से रकम साफ कर दी गई.
2. अंगूठा किसी का, दस्तखत किसी और के
पीड़ित सुखारी राय के नाम पर 30,000 रुपए की निकासी दिखाई गई, लेकिन जब सरकारी रजिस्टर पर लगे अंगूठे का मिलान कराया गया, तो अंगूठा सुखारी राय का निकला ही नहीं यानी किसी और का अंगूठा लगवाकर 30 हजार रुपये डकार लिए गए.
3. दस्तखत में हेराफेरी और तारीखें गायब
नागेन्द्र राउत के मामले में मस्टर रोल/पंजी पर किए गए दस्तख़त पूरी तरह फर्जी और अलग पाए गए। यही नहीं, दर्जनों केस में यह तक गायब कर दिया गया कि पैसे किस दिन दिए गए, ताकि कोई हिसाब ही न मांग सके.
4. चोरी पकड़ी गई तो 'शरीफ' बनने का नाटक
जांच में खुलासा हुआ कि कुल 139 गरीबों के लिए पैसे निकाले गए थे। मुखिया और सचिव ने 98 लोगों में बांटने का दावा किया और 41 गरीबों का पैसा अपनी जेब में दबाकर बैठ गए, लेकिन जैसे ही जांच की आँच अधिकारियों तक पहुंची और पोल खुलने लगी, डर के मारे 41 लाभुकों का पैसा रातों-रात वापस बैंक खाते में जमा कराया गया.
5. मुखिया की कुर्सी छिनेगी, जेल जाने की तैयारी
इस शर्मनाक कफन-घोटाले का खुलासा होते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। उप विकास आयुक्त (DDC) और जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने रिपोर्ट के आधार पर कड़ा एक्शन लिया है. ग्राम पंचायत राज दरमहां की मुखिया रागनी देवी को पद से तुरंत बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
FIR के आदेश
मुखिया रागनी देवी और तत्कालीन पंचायत सचिव हुकुमदेव यादव के खिलाफ वित्तीय गबन और जालसाजी की जरूरी धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है.
रिपोर्ट : पंकज कुमार