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Motihari News: सरकार चाहे आरजेडी की रही हो या फिर एनडीए की सरकार हो, हर सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने का दावा जरूर किया जाता है. लेकिन क्या वास्तव में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था सुधर पाई है. यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि मोतिहारी से सामने आई एक तस्वीर ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. तस्वीर देखने के बाद ऐसा लगता है कि शायद गरीब लोगों की जान की कोई कीमत ही नहीं है. दरअसल, पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फोर्थ ग्रेड का एक कर्मी लोगों का इलाज करता नजर आ रहा है. फोर्थ ग्रेड कर्मी कृष्णा कुमार स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे जख्मी लोगों को बाकायदा टांका लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसका वीडियो भी सामने आया है.
फोर्थ ग्रेड कर्मी को बना दिया पैरामेडिकल स्टाफ
हद तो यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने पैरामेडिकल टीम की ड्यूटी वाले रोस्टर में अनट्रेंड फोर्थ ग्रेड कर्मी कृष्णा कुमार की बाकायदा ड्यूटी भी लगा दी. रोस्टर के मुताबिक बुधवार और गुरुवार को सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक कृष्णा कुमार की ड्यूटी पैरामेडिकल कर्मी के रूप में लगाई गई है. यानी चिकित्सा प्रभारी ने ही एक फोर्थ ग्रेड के अनट्रेंड कर्मी को पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी सौंप दी. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर स्वास्थ्य केंद्र में प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की जगह अनट्रेंड कर्मी से मरीजों का इलाज क्यों कराया जा रहा है?
रोस्टर में नाम से मुकर गए प्रभारी
जब हमने पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजहरुद्दीन से इस मामले को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने पैरामेडिकल वाले रोस्टर में कृष्णा कुमार का नाम होने से पहले इनकार कर दिया. लेकिन जब उनसे तारीख के साथ उनके ही द्वारा जारी किए गए रोस्टर का जिक्र किया गया तो उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली. ऐसे में अब सवाल सिर्फ फोर्थ ग्रेड कर्मी कृष्णा कुमार के द्वारा इलाज किए जाने का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें पैरामेडिकल ड्यूटी में लगाया.
सवाल सिर्फ कृष्णा कुमार पर नहीं
जाहिर तौर पर पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फोर्थ ग्रेड कर्मी द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने के मामले में सिर्फ कृष्णा कुमार ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि उससे बड़ा सवाल सिस्टम में बैठे अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर है. चाहे वह पहाड़पुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजहरुद्दीन हों या इस व्यवस्था से जुड़े कोई अन्य अधिकारी, उन्हें समझना होगा कि हर मरीज की जिंदगी उसके परिवार के लिए अनमोल है. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या अनट्रेंड फोर्थ ग्रेड कर्मी को पैरामेडिकल ड्यूटी में लगाने वाले अधिकारी पर भी कार्रवाई होती है या फिर सिर्फ कृष्णा कुमार पर कार्रवाई कर पूरे मामले को खत्म कर दिया जाता है.
रिपोर्ट: पंकज कुमार