बिहार के मोतिहारी में बड़े पैमाने पर मिलावटी पेट्रोल बेचे जाने का मामला सामने आया है. मिलावटी पेट्रोल के कारण गाड़ियों के इंजन खराब होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. हालांकि, कई लोग इसे इथेनॉल वाले पेट्रोल की समस्या समझकर चुप रह जाते हैं, जबकि उनकी गाड़ियों को नकली पेट्रोल से नुकसान पहुंच रहा है. सूत्रों की मानें तो नकली पेट्रोल बनाने का खेल चकिया से लेकर छपवा चौक तक चल रहा है. नकली पेट्रोल रक्सौल से लेकर मोतिहारी शहर के एक पेट्रोल पंप तक बेचे जाने की बात कही जा रही है.
नकली पेट्रोल बनाने के लिए साल्वेंट या थिनर को फर्जी जीएसटी बिल के जरिए मोतिहारी के चकिया और छपवा चौक तक मंगवाया जाता है. इसके बाद इसमें पाउडर वाले केमिकल या किसी लिक्विड की एक चुटकी मिलाई जाती है, जिससे साल्वेंट या थिनर का रंग बिल्कुल पेट्रोल जैसा हो जाता है. नकली पेट्रोल तैयार होने के बाद पेट्रोल माफिया इसे चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर सस्ती कीमत पर पहुंचाते हैं. नकली पेट्रोल के मामले में पेट्रोल पंपों की ठोस निगरानी नहीं होने और नकली पेट्रोल बनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण मोतिहारी में यह धंधा दिन-दूनी, रात-चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है.
सूत्रों की मानें तो सदर अनुमंडल, चकिया और रक्सौल अनुमंडल में नकली पेट्रोल बनाने का काम होता है. बताया जा रहा है कि सदर अनुमंडल में NH के किनारे नकली पेट्रोल बनाने के लिए एक बड़ा प्लांट लगाने की तैयारी भी चल रही है. इसके पीछे साह नाम के एक व्यक्ति का हाथ होने की बात कही जा रही है.
मोतिहारी के रक्सौल, सदर और चकिया अनुमंडल में पुलिस ने नकली पेट्रोल के मामले में कार्रवाई की है, लेकिन तेल के इस धंधे से जुड़े बड़े नामों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है. साह नाम के एक बड़े तेल माफिया के बारे में बताया जाता है कि पेट्रोल के धंधे से वह करोड़पति नहीं, बल्कि अरबपति बन चुका है. मोतिहारी में कई जगहों पर उसके नाम पर या बेनामी तरीके से बेशकीमती जमीन होने की बात कही जा रही है, जो कई एकड़ में फैली हुई बताई जाती है. सूत्रों की मानें तो साह की योजना अब मोतिहारी से आसपास के जिलों में नकली पेट्रोल भेजने की है. साह के अलावा कई अन्य छोटे-बड़े लोग भी नकली पेट्रोल बनाने के धंधे में शामिल बताए जा रहे हैं.
रिपोर्ट: पंकज कुमार