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बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा-2023 के पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. मनी लॉन्ड्रिंग के तहत चल रही जांच के दौरान ED के पटना जोनल कार्यालय ने करीब 2 करोड़ 1 लाख रुपये मूल्य की पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है. ये सभी संपत्तियां NC प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज थीं. ED की जांच में सामने आया है कि जब्त की गई संपत्तियों का संबंध पेपर छपाई के ठेके से जुड़े कौशिक कुमार कर से है. एजेंसी इस मामले में पेपर लीक के जरिए कथित तौर पर अर्जित की गई अवैध कमाई और उससे बनाई गई संपत्तियों की पड़ताल कर रही है.
ED की जांच आर्थिक अपराध इकाई(EOU), पटना में दर्ज FIR के अधार पर शुरू हुई थी. जांच में खुलासा हुआ कि प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल करने के लिए ब्लैकलिस्टेड कंपनी से जुड़ी पाबंदियों से बचने की कोशिश की गई. इसके लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से नई कंपनी बनाई गई और सहयोगियों को उसका निदेशक बनाया गया.
जांच करने के बाद यह पता चला कि कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स के पास न तो प्रिंटिंग का अनुभव था और न ही कोई प्रिंटिंग प्रेस. इसके बावजूद कंपनी ने परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल कर लिया. बाद में इन नियमों और ठेके की शर्तों का उल्लंघन करते हुए छपाई का काम ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया गया.ED के मुताबिक, प्रश्नपत्र कोलकाता से पटना लाने के दौरान ही लीक हो गया था, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी.
ED की जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र छपाई के लिए कैल्टेक्स कंपनी को 5.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. इसमें से 2.01 करोड़ रुपये अलग-अलग फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में भेजे गए और कई स्तरों पर लेन-देन के बाद नकदी में बदल दिए गए. इसी रकम के बराबर पांच अचल संपत्तियों को ED ने अस्थायी रूप से जब्त किया है. फिलहाल मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है.
रिपोर्ट: प्रकाश कुमार सिन्हा