मधुबनी समाहरणालय की संपत्ति होगी नीलाम, सुप्रीम कोर्ट से बिहार सरकार को झटका, 26 नवंबर की तारीख तय
बिहार सरकार को मधुबनी समाहरणालय परिसर की संपत्ति की नीलामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने नीलामी पर रोक लगाने की राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है.
बिहार सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है. मधुबनी समाहरणालय परिसर की संपत्ति की नीलामी पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार की ओर से दाखिल याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है. इसके साथ ही समाहरणालय परिसर के एक हिस्से की नीलामी का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है. जिला न्यायालय ने नीलामी के लिए 26 नवंबर 2026 की नई तारीख निर्धारित की है. इस फैसले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है.
पुराने वित्तीय विवाद में बढ़कर 4.17 करोड़ रुपये हुआ बकाया
दरअसल, पूरा मामला पंडौल को-ऑपरेटिव सूता मिल से जुड़े पुराने वित्तीय विवाद का है. कोलकाता की निजी कंपनी मेसर्स राधा कृष्ण एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने सूता मिल में पूंजी निवेश किया था. भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने कानूनी लड़ाई शुरू की. मामले में मध्यस्थता के बाद कंपनी के पक्ष में भुगतान का आदेश दिया गया था. हालांकि, लंबे समय तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होने के कारण ब्याज समेत यह रकम बढ़कर करीब 4 करोड़ 17 लाख रुपये हो गई.
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समाहरणालय की जमीन और दो मंजिला भवन नीलामी के लिए चिह्नित
मधुबनी व्यवहार न्यायालय के आदेश के अनुसार, समाहरणालय परिसर के दक्षिणी हिस्से की जमीन और उस पर बने दो मंजिला भवन को नीलामी के लिए चिह्नित किया गया है. इसमें करीब 10 कट्ठा जमीन का उल्लेख है. हालांकि, नीलामी की संपत्ति के सटीक क्षेत्रफल को लेकर न्यायालय की बिक्री उद्घोषणा में अलग विवरण दिया गया है. नीलामी की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की थी. लेकिन 6 नवंबर को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी. पीठ ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है.
26 नवंबर को होगी नीलामी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 7 नवंबर को जिला न्यायालय ने नीलामी की अगली तारीख 26 नवंबर 2026 निर्धारित कर दी. मधुबनी समाहरणालय जिले का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है, जहां डीएम, एसपी समेत जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय स्थित हैं. ऐसे में समाहरणालय परिसर की संपत्ति की नीलामी की नौबत आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार सरकार 26 नवंबर से पहले बकाया राशि का भुगतान कर पाएगी या फिर समाहरणालय परिसर की संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. फिलहाल इस पूरे मामले पर जिले से लेकर राज्य स्तर तक सबकी नजरें टिकी हुई हैं.
रिपोर्ट: बिंदु भूषण