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केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के सुप्रीमो और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के युवाओं को तिलचट्टा कहे जाने वाले बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने साफ तौर पर ये कहा कि राजनीति साधने के लिए किसी को भी इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और युवाओं के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना कतई जायज नहीं है.
छात्रों के आंदोलन और विपक्ष पर प्रहार
छात्रों के प्रदर्शन और आंदोलन के मुद्दे पर चिराग पासवान ने कहा कि छात्र आंदोलन हमेशा से भारत को नई दिशा दिखाते रहे हैं, लेकिन लोकतंत्र में आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्वक होने चाहिए. उन्होंने अराजकता के माहौल का विरोध किया और केंद्र सरकार द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयासों को सही ठहराया.
चिराग ने कहा- 'भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति हमेशा रही है. आंदोलन ने समय समय पर दिशा देने का काम किया है और नए युवा चेहरों को मौका देने का काम किया है. लेकिन अगर किसी प्रदर्शन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व अपनी राह तलाशने का काम करते हैं तो उन्हें चिन्हित करना जरूरी है. जो सिर्फ अराजकता का माहौल उत्पन्न करने की सोच के साथ आगे आते हैं. कल देश में अराजकता का माहौल उत्पन्न करने की सोच को बल देने का काम किया जा रहा था जिसे केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित किया गया.
चिराग ने विपक्ष पर साधा निशाना
साथ ही, उन्होंने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में गंभीर है, तो वह अपनी सरकारों से इस्तीफा देकर सामने आए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर हर समस्या का समाधान इस्तीफे से निकल सकता, तो चिराग पासवान बहुत पहले ही इस्तीफा दे चुके होते.
सरकार में अपनी भूमिका पर स्पष्टीकरण
खुद की स्थिति स्पष्ट करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि वह एनडीए सरकार में एक चौकीदार की भूमिका में रहते हैं. जनहित और युवाओं के मुद्दों पर उन्होंने हमेशा खुलकर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि युवाओं के वोट चोरी और राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए भ्रामक बयानबाजी करने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि यही युवा देश की दशा और दिशा दोनों बदलने की ताकत रखते हैं.
रिपोर्ट: प्रिंस कुमार कुशवाहा