केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के UCC वाले बयान पर जेडीयू और बीजेपी में काफी मतभेद दिख रहे हैं. अमित शाह ने 2029 तक देश के सभी बीजेपी शासित राज्यों में UCC लागू करने का वादा किया है. उनके इस अभियान को जेडीयू ने झटका दे दिया है. जेडीयू ने साफ कहा है कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा. इस सियासी गहमा-गहमी के बीच गयाजी में जेडीयू विधायक मनोरमा देवी और कृषि मंत्री विजय सिन्हा में भिड़ंत देखने को मिली. दरअसल, गयाजी में आयोजित इन्फ्रा बिल्ट एक्सपो के कार्यक्रम में बेलागंज से जेडीयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि अगर मैं ठेकेदार नहीं होती तो आज यहां नहीं होती. मंच पर कृषि मंत्री विजय सिन्हा भी मौजूद थे और उन्होंने मनोरमा देवी के बयान पर काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी.
मनोरमा देवी के बयान पर विजय सिन्हा का पलटवार
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन 'ठेकेदारी' वाले बयान पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसके बाद माहौल गर्मा गया. कृषि मंत्री ने कहा कि विधायक या विधायिका बनने के लिए ठेकेदारी जरूरी नहीं. ईमानदारी, कर्मठता, जनता की सेवा और समर्पण ही किसी जनप्रतिनिधि की असली पहचान होती है. विजय सिन्हा की तीखी टिप्पणी के बाद मनोरमा देवी बैकफुट पर आईं और तुरंत माइक संभालते हुए सफाई दी. मनोरमा देवी ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके कहने का गलत अर्थ निकाला गया.
सियासी गलियारों में इस झड़प की चर्चा जोरों पर
जेडीयू विधायिका ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि ठेकेदारी ही जनप्रतिनिधि बनने की शर्त है. उनके कहने का आशय केवल यह था कि ठेकेदारी और व्यावसायिक पृष्ठभूमि से जुड़े होने के कारण ही उन्हें समाज में काम करने, संघर्ष करने और अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला, न कि वे जनप्रतिनिधि के रूप में ठेकेदारी को अनिवार्य मानती हैं. मंच पर दोनों नेताओं के बीच इस तरह की बयानबाजी अब चर्चा का विषय बन गई है. राजनीतिक गलियारों में इस वाकये की चर्चा जोरों पर है और इसे एनडीए के अंदरूनी तालमेल से जोड़कर देखा जा रहा है.
आरक्षण से लेकर UCC तक, NDA में मचा घमासान
इससे पहले आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी में तनातनी देखने को मिल चुकी है. एक ही गठबंधन में होने के बावजूद दोनों दलों में तल्खी इतनी बढ़ कि व्यक्तिगत हमले देखने को मिले. बीजेपी के हस्तक्षेप के बाद कहीं जाकर यह मामला शांत हुआ था. अब UCC पर भी घमासान देखने को मिल रहा है. फरक्का जल संधि पर भी जेडीयू की ओर से केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश लगातार जारी है.