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जमुई के जालसाज शिक्षक का पर्दाफाश: फर्जी डिग्री के सहारे बना टीचर और 11 साल की नौकरी, गिरफ्तार

Jamui News: जमुई के खैरा प्रखंड में फर्जी B.Ed. प्रमाणपत्र के सहारे करीब 11 साल तक सरकारी शिक्षक की नौकरी करने वाले हरेराम कुमार को निगरानी विभाग ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. विश्वविद्यालय सत्यापन में प्रमाणपत्र फर्जी मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है.

Reported By Zee Bihar Network Edited By Rupak Kumar
Published: Oct 06, 2026, 07:47 AM IST | Updated: Oct 06, 2026, 07:53 AM IST
Image Credit: जमुई के जालसाज शिक्षक का पर्दाफाश (zee media)
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Jamui News: बिहार के जमुई जिले के खैरा प्रखंड के बाघाखांड विद्यालय में करीब 11 साल से गणित शिक्षक के रूप में कार्यरत हरेराम कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में उसके B.Ed. प्रमाणपत्र के फर्जी होने का खुलासा हुआ है. आरोप है कि फर्जी दस्तावेज को असली बताकर उसने सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल की और वर्षों तक उसका लाभ उठाता रहा. निगरानी विभाग के अनुसार, शेखपुरा जिले के भदोईस गांव निवासी हरेराम कुमार ने वर्ष 2015 में बिहार राज्य जिला परिषद माध्यमिक शिक्षक नियोजन के लिए जमुई में आवेदन किया था. उसका नियोजन श्रवण विकलांग कोटे में हुआ था. इसके बाद बाघाखांड विद्यालय में गणित विषय के प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में उसकी नियुक्ति कर दी गई.

फर्जी B.Ed. प्रमाणपत्र की जांच में खुला राज
नियोजन के दौरान हरेराम कुमार ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी से जारी B.Ed. प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था. प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान निगरानी विभाग ने इसे सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय भेजा. विश्वविद्यालय से सत्यापन के बाद प्रमाणपत्र के फर्जी होने की जानकारी सामने आई. निगरानी विभाग का आरोप है कि हरेराम कुमार ने फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्र तैयार कर उन्हें वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने शिक्षक पद पर नियुक्ति हासिल की और वर्षों तक सरकारी सेवा का लाभ उठाया.

एमनेस्टी पीरियड में भी नहीं दिया इस्तीफा
मामले में निगरानी विभाग के मुताबिक, फर्जी प्रमाणपत्र वाले शिक्षकों को हाईकोर्ट के निर्देश के तहत एमनेस्टी पीरियड में त्यागपत्र देने का अवसर दिया गया था. हरेराम कुमार ने इस अवधि में भी इस्तीफा नहीं दिया. इसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना की ओर से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई. मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस उपाधीक्षक सह सहायक जांचकर्ता विकास कुमार श्रीवास्तव ने प्राथमिकी दर्ज कराई.

धोखाधड़ी का आरोप
प्राथमिकी में हरेराम कुमार समेत अन्य अज्ञात लोगों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उसे असली के रूप में इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं. करीब 11 साल तक सरकारी शिक्षक के पद पर काम करने वाले हरेराम कुमार की गिरफ्तारी के बाद फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी हासिल करने वाले लोगों पर निगरानी विभाग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल तेज हो गए हैं.

रिपोर्ट: अभिषेक निरला

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