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वैशाली के महनार में गंगा का कटाव अब तबाही का रूप ले चुका है. खड़गपुर बिल्ट चौक से महनार घाट तक गंगा की तेज धारा लगातार जमीन को निगल रही है. हालात ऐसे हैं कि नदी किनारे बसे परिवारों के घर, डेरे और मवेशियों के आशियाने तक गंगा में समा चुके हैं. लेकिन इस तबाही के बीच अब कटावरोधी कार्यों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्रामीणों ने ठेकेदार पर कटाव रोकने के लिए लगाए गए पिलर, बांस और अन्य सामान को रात के अंधेरे में काटकर बेचने का आरोप लगाया है.

गंगा की विनाशकारी धारा का मंजर
देखते ही देखते उपजाऊ जमीन नदी में समाती जा रही है. कटाव की वजह से कई परिवारों का सबकुछ उजड़ चुका है. कैमरे पर अपना दर्द बयां कर रहे इस ग्रामीण के मुताबिक, पिछले साल से ही कटाव जारी है. नदी के दूसरी तरफ कटाव पर नियंत्रण हुआ, लेकिन उनके इलाके में तबाही नहीं रुकी. देखते ही देखते उनका घर और डेरा गंगा में समा गया. अब उनके सामने परिवार और मवेशियों को रखने तक का संकट खड़ा हो गया है. कटाव की तबाही के बीच ग्रामीणों ने ठेकेदार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं.

आरोप है कि कटाव रोकने के लिए लगाए गए पिलर, भूसा, बांस के खंभे और प्लांटिंग में इस्तेमाल होने वाले सामान को रात के अंधेरे में काटकर हटाया जा रहा है. ग्रामीणों का दावा है कि जो पेड़-पौधे कटाव रोकने के लिए लगाए गए थे, उन्हें भी क्रेन से उखाड़कर बेच दिया गया. इतना ही नहीं, ग्रामीणों के मुताबिक, उनकी बची हुई टाटी-पलानी तक उजाड़ दी गई. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और ठेकेदार का पक्ष सामने आना अभी बाकी है.

गंगा का कटाव लगातार बढ़ रहा है और नदी किनारे बसे सैकड़ों परिवारों की जिंदगी दांव पर है. ग्रामीणों की मांग है कि कटावरोधी कार्यों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए. रात में कथित तौर पर हो रहे सामान के हटाने पर रोक लगे और गंगा कटाव से बचाव के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए.
रिपोर्ट: राजकुमार सिंह