मानसून सत्र के कारण साढ़े तीन महीने तक बंद रहने के बाद बिहार का इकलौता वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) एक बार फिर पर्यटकों के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया है. पर्यटन नगरी वाल्मीकिनगर में मुख्य प्रवेश द्वार से सैलानियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर जंगल सफारी के लिए PCCF अरबिंदर सिंह ने रवाना किया. इस मौके पर वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने वीटीआर प्रशासन की तैयारियों और बिहार सरकार की ईको-टूरिज्म प्राथमिकताओं की पूरी जानकारी दी.
दरअसल, बिहार के कश्मीर में ईको-टूरिज्म और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए PCCF ने बताया कि बिहार सरकार राज्य में ईको-टूरिज्म को बड़े पैमाने पर प्रमोट करने के लिए दृढ़ संकल्पित है. राज्य में फिलहाल दो प्रमुख टूरिस्ट केंद्र- राजगीर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अपनी पूर्ण क्षमता के साथ काम कर रहे हैं.
बताया जा रहा है कि VTR में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. तीन-चार साल पहले यहां सालाना 2.5 से 3 लाख पर्यटक आते थे. वहीं, अब यह संख्या बढ़कर लगभग 6 लाख तक पहुंच चुकी है. सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और अधिक बढ़ाना है, ताकि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकें.
खास बात यह है कि सैलानियों के लिए नए आकर्षण और आधुनिक सुविधाएं उनके अनुभव को यादगार और आरामदायक बनाने के लिए वीटीआर प्रशासन ने कई नई व्यवस्थाएं की हैं. लिहाजा, जंगल सफारी के लिए नए रूट्स आइडेंटिफाई किए गए हैं, जिसके लिए नए पैकेजेस तैयार किए गए हैं.
पर्यटकों को जंगल भ्रमण के लिए नई और बेहतर गाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिसमें सरकार का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि कम खर्च में अधिक से अधिक लोगों को प्रकृति से जोड़ना है.
सफारी और पैकेज के रेट्स केवल रख-रखाव के खर्च के आधार पर निर्धारित किए गए हैं, जो आम पर्यटकों की जेब पर भारी नहीं पड़ेंगे. यही वजह है कि केवल जंगल घूमने के बजाय सैलानी वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र को गहराई से समझ सकें, इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित गाइड्स नियुक्त किए गए हैं. वाल्मीकिनगर, गोबर्धना समेत मंगूरहा में पर्यटकों के ठहरने के लिए ईको-कॉटेज, ईको-रिसॉर्ट्स और मौर्या होटल के स्तर का कन्वेंशन सेंटर और अकोमोडेशन तैयार किया गया है.
सबसे बड़ी बात यह है कि नेपाल और उत्तर प्रदेश की सीमा पर वाल्मीकिनगर से बेतिया तक करीब 980 वर्ग किलोमीटर में फैले VTR में कनेक्टिविटी सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री हेली सेवा शुरू की जा रही है. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से हाथी लाने के प्रयास अंतिम चरण में हैं, जिसके बाद जल्द ही हाथी सफारी भी शुरू की जाएगी.
बता दें कि वीटीआर प्रशासन ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि जंगल सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि जीवन और पर्यावरण के संतुलन को समझने का माध्यम है.
अधिकारियों ने कहा कि अक्सर सैलानियों के मन में यह डर रहता है कि जंगल जाने पर जानवर हमला न कर दें. इस तरह की भ्रांतियों को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है कि लोग यहां आएं, प्रकृति को करीब से देखें और समझें कि नदियां, पहाड़ और हवा जैसे जीवन के मूल स्रोत यहीं से निकलते हैं. जब लोग इसके महत्व को समझेंगे, तो हमें इस पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने में आम जनता का पूरा सहयोग मिलेगा.
इसके साथ ही स्थानीय कला, संस्कृति और धरोहर को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो सकें. वीटीआर प्रशासन ने मीडिया से भी इस पहल के व्यापक प्रचार-प्रसार की अपील की है, ताकि अधिक से अधिक लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकें, तो वहीं मुख्यमंत्री हेली सेवा की शुरुआत से पर्यटन को पंख लगने की नई उम्मीद जगी है.
रिपोर्ट: इमरान अजीज