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दुर्गा पूजा के पंडालों में कहीं आस्था की भव्यता दिख रही है, तो कहीं आधुनिकता और रचनात्मकता का अनूठा संगम. इसी कड़ी में कटिहार के विनोदपुर में तैयार किया गया कॉकरोच और स्पाइडर थीम पर आधारित पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है . 91 वर्षों से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही विनोदपुर पूजा समिति ने इस बार अपने पंडाल को ऐसा अनोखा रूप दिया है, जिसे देखकर लोग ठहरने, कलाकारी निहारने और यादगार तस्वीरें लेने के लिए आकर्षित हो रहे हैं.

पंडाल की खासियत केवल इसकी थीम ही नहीं, बल्कि सीमित जगह में इसे तैयार करने की चुनौती भी है. आयोजकों के मुताबिक, पंडाल निर्माण के लिए लगभग 14 फीट चौड़ी और 50 फीट लंबी जगह उपलब्ध थी. ऊपर बिजली के लटकते तार और सामने खंभे होने के कारण कारीगरों के सामने कई मुश्किलें थीं. इसके बावजूद समिति के सदस्यों और कारीगरों ने अपनी मेहनत और हुनर से इस छोटी-सी जगह को आकर्षक पूजा स्थल में बदल दिया.

विनोदपुर पूजा समिति के अध्यक्ष नवीन मेघानी ने बताया कि इस बार कुछ नया और अलग करने का विचार दो से तीन महीने पहले आया था. समिति चाहती थी कि पंडाल की बनावट ऐसी हो, जो बच्चों, युवाओं और महिलाओं को खास तौर पर आकर्षित करे. आज के दौर में लोग अनोखी कलाकृतियों के साथ सेल्फी और तस्वीरें लेना पसंद करते हैं. इसी सोच के साथ कॉकरोच और स्पाइडर थीम का चयन किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को पूजा के साथ मनोरंजन और यादगार अनुभव भी मिल सके.

इस अनोखे पंडाल को आकार देने के लिए पश्चिम बंगाल के नवद्वीप धाम से मुख्य कारीगर अनिल दा और उनकी टीम को बुलाया गया था. कारीगरों ने करीब डेढ़ महीने तक मेहनत कर समिति की कल्पना को जमीन पर उतारा. पंडाल की सजावट में हीटलोन के साथ पत्तियों और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है. आयोजकों के अनुसार, ऐसी सामग्रियों को प्राथमिकता देने का उद्देश्य सजावट को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है.

कॉकरोच थीम को लेकर अध्यक्ष ने कहा कि क्या इसका संबंध वर्तमान में चर्चा में चल रहे, किसी राजनीतिक विषय से है, तो उन्होंने इससे इनकार किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि पंडाल का उद्देश्य किसी राजनीतिक संदेश को प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के सामने एक अनोखी कलाकृति रखना है. समिति चाहती है कि लोग पंडाल देखने आएं, इसकी बनावट का आनंद लें और अपने परिवार के साथ तस्वीरें खिंचवाकर यादें संजोएं.

इस बार नए प्रयोग के साथ सामने आई है. यहां परंपरागत धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक सोच और कारीगरों की कल्पनाशीलता भी देखने को मिल रही है. संकरी जगह, सीमित संसाधनों और तकनीकी चुनौतियों के बीच तैयार यह पंडाल बताता है कि आकर्षण पैदा करने के लिए हमेशा विशाल जगह या भारी-भरकम बजट ही जरूरी नहीं होता, कभी-कभी एक अलग सोच और हुनर ही लोगों को अपनी ओर खींचने के लिए काफी होते हैं.

विनोदपुर का यह अनोखा पंडाल इस दुर्गा पूजा में श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि कला, कल्पना और परंपरा के मेल का एक दिलचस्प अनुभव बनकर उभरा है.
रिपोर्ट: रंजन कुमार