उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अफसर दिव्या मित्तल अब राजनीति ज्वाइन करने वाली हैं. उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था, जो मंजूर भी कर लिया गया था. अब सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर उन्होंने राजनीति में आने की बात कही है. हालांकि उनका कहना है कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल से नहीं जुड़ेंगी, बल्कि अपनी नई राह बनाएंगी. दिव्या मित्तल अकेली अफसर नहीं हैं, जिन्होंने अफसरी छोड़कर राजनीति में आने का फैसला किया है. इस पर को छोड़ राजनीति में आने वालों में से कइयों ने बड़ा मुकाम हासिल किया है तो कुछ फिसड्डी भी साबित हुए. आईएएस अफसर की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए छत्तीसगढ़ के अजीत जोगी तो अपने राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए थे. दूसरी ओर, यशवंत सिन्हा देश के वित्त और विदेश मंत्री भी रहे थे. उन्होंने राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था.

24 साल की नौकरी छोड़ राजनीति में आए और छा गए
1960 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी यशवंत सिन्हा ने अपनी नौकरी के दौरान वाणिज्य और वित्त विभाग में सेवाएं दी थीं. 1984 में उन्होंने अचानक नौकरी छोड़ दी थी और राजनीति में आ गए थे. 1990 में प्रधानमंत्री बने चंद्रशेखर की सरकार में वे देश के वित्त मंत्री रहे थे. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री और विदेश मंत्री का पद संभाला था. 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में वे संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार भी बनाए गए थे.

अजीत जोगी ने प्रधानमंत्री के कहने पर छोड़ दी नौकरी
1968 में आईपीएस और 1070 में मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी बने अजीत जोगी इंदौर और रायपुर जैसे जिलों में रिकॉर्ड 14 साल तक जिलाधिकारी रहे थे. 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने पर उन्होंने नौकरी छोड़ दी और राज्यसभा पहुंच गए थे. नवंबर, 2000 में जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ बना था तो अजीत जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने थे. नौकरशाही से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने वाले अजीत जोगी पहले उदाहरण हैं.

कड़क आईपीएस अधिकारी से मंत्री पद तक
सुनील कुमार की बात करें तो 1987 बैच के बिहार कैडर के कड़क आईपीएस अफसर के रूप में जाने जाते थे. एडीजी मुख्यालय और डीजी पद तक पहुंचे लेकिन कार्यकाल बाकी रहते हुए अगस्त 2020 में वीआरएस ले लिया और राजनीति में आ गए थे. 2020 के विधानसभा चुनाव में भोरे सीट से मैदान में उतरे और जीत भी गए. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन मंत्री का दायित्व सौंपा. बाद में वे बिहार के शिक्षा मंत्री भी बनाए गए थे.

कमिश्नरी छोड़ समाज कल्याण मंत्री बने असीम अरुण
1994 बैच के आईपीएस अधिकारी असीम अरुण कानपुर के पहले पुलिस कमिश्नर बनाए गए थे. उन्होंने पहले यूपी एटीएस चीफ का पद भी संभाला था. नौकरी के कई साल बाकी रहते उन्होंने वीआरएस ले लिया और राजनीति के मैदान में आ गए. भारतीय जनता पार्टी ने 2022 के चुनाव में उन्हें कन्नौज सदर सीट से विधानसभा चुनाव में उतारा और वे जीत भी गए. अभी वे योगी सरकार में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं.

RCP सिंह अफसरी छोड़ राजनीति में आए, मंत्री बने और किनारे हो गए
अफसरी छोड़ राजनीति में आने वालों के लिए आरसीपी सिंह का उदाहरण एक बुरे सपने की तरह है. आरसीपी सिंह राजनीति में आए तो सुपर सीएम के खिताब से भी नवाजे जाते रहे. 1984 बैच के यूपी कैडर के प्रशासनिक अधिकारी आरसीपी सिंह, नीतीश कुमार के रेल मंत्री रहते विशेष सचिव बने थे.
2005 में नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने तो आरसीपी सिंह को उन्होंने अपना प्रधान सचिव बनाया था. इसके बाद 2010 में वीआरएस लेकर वे राजनीति में आ गए. दो बार जनता दल यूनाइटेड से राज्यसभा पहुंचे. 2020 में तो उन्हें जनता दल यूनाइटेड का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया गया था.
2021 में वे मोदी कैबिनेट में केंद्रीय इस्पात मंत्री बनाए गए थे. 2022 में उनका राज्यसभा टिकट काट दिया गया था तो मंत्री पद भी चला गया और बाद में उन्हें जेडीयू से निकाल दिया गया था. अब वे नीतीश कुमार से मिलने के लिए भी तरस जा रहे हैं.

असम-मेघालय कैडर के अफसर से बक्सर के विधायक तक
बात कर रहे हैं 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा की. असम में उन्हें सुपरकॉप कहा जाता था, लेकिन लोकसभा चुनाव, 2024 में उनकी जमानत तक जब्त हो गई थी. लोकसभा चुनाव, 2024 में ही वे राजनीति में आए थे. भाजपा से टिकट न मिलने की स्थिति में निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद गए थे. उसके बाद वे जन सुराज पार्टी में भी गए, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव से ऐन पहले वे भारतीय जनता पार्टी में लौट आए और बक्सर से विधायक चुने गए.

नौकरी में सुपरहिट और सियासत में सुपरफ्लॉप शिवदीप लांडे
2006 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रहे. सोशल मीडिया पर उनकी तगड़ी फैन फॉलोइंग रही, जिसको भुनाने के लिए उन्होंने सितंबर, 2024 में अचानक नौकरी छोड़ दी और राजनीति में आने का ऐलान कर दिया, लेकिन कैडर न होने के चलते वे आज भी अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए संघर्षरत हैं.

डीजीपी पद से लिया वीआरएस, टिकट नहीं मिला तो बन गए कथावाचक
1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडे ने सितंबर, 2020 में अचानक वीआरएस ले लिया था, जिसके बाद कयास लगने लगे थे कि जनता दल यूनाइटेड की ओर से उन्हें बक्सर से चुनाव लड़ाया जाएगा. राजनीति का दांव उल्टा पड़ा और एनडीए के सीट बंटवारे में उन्हें टिकट नहीं मिला. उसके बाद वे भगवा चोला पहनकर अध्यात्म की राह पर निकल गए.

शाह फैसल ने तो ले लिया डबल यू-टर्न
2010 बैच के सिविल सेवा टॉपर शाह फैसल ने 2019 में जम्मू कश्मीर में व्यवस्था के विरोध का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था. उसके बाद उन्होंने राजनीति ज्वाइन कर ली और जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम से अपनी पार्टी बनाई थी. अनुच्छेद 370 हटने और हिरासत में रहने के बाद उनका सियासत से मोहभंग हो गया और तकनीकी रूप से इस्तीफा स्वीकार न होने के चलते वापस सेवा में लौटने की अर्जी लगा दी. आज वे फिर से एक आईएएस अफसर के रूप में अपना काम कर रहे हैं.