जरा सोचिए... जिस घर में किसी अपने की मौत के बाद मातम पसरा हो, वहां अगर चूल्हा जलाने से लेकर बच्चों का पेट भरने तक की चिंता सामने खड़ी हो, तो उस परिवार पर क्या गुजरती होगी. भागलपुर के घोघा के पन्नुचक से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है. यहां एक गरीब परिवार की बेबसी और लाचारी इस कदर सामने आई कि अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त लकड़ियों का इंतजाम तक नहीं हो सका. दाह-संस्कार अधूरा रह गया और आखिरकार परिजनों को अधजले शरीर को गड्ढा खोदकर दफनाना पड़ा. पन्नुचक के रहने वाले मंगल ऋषि ईंट भट्ठा पर मजदूरी करते थे. 18 अक्टूबर को उनका निधन हो गया था. अंतिम संस्कार के लिए चंदा इकट्ठा करना पड़ा, फिर भी शव अधजला रह गया.
इस दर्दनाक घटना के बाद Zee Media की टीम मृतक मंगल ऋषि के घर पहुंची, जहां परिवार की बदहाली, बेबसी और लाचारी देखकर कई सवाल खड़े होते हैं. पत्नी सोनी देवी और मृतक की मां की आंखों में आंसू भरे हुए थे. सामने तीन बेटियों समेत पांच बच्चों के पालन-पोषण की बड़ी चुनौती खड़ी है. न रहने के लिए अपनी जमीन है, न अपना मकान और न ही परिवार के पास आय का कोई मजबूत सहारा. परिवार की मदद के लिए गरीब पड़ोसियों को छोड़कर अब तक कोई आगे नहीं आया.
मुखिया की ओर से घटना के 6 दिन बाद कुछ राशन सामग्री जरूर पहुंचाई गई है, लेकिन परिवार की जरूरतों के सामने यह मदद नाकाफी है. अब बेसहारा परिवार बिहार सरकार और पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव से मदद की आस लगाए बैठा है. यह कहानी उस परिवार की है, जिसके सामने अपनों को खोने के गम के साथ अब भूख, बेघर होने और पांच बच्चों का भविष्य संवारने की चुनौती भी खड़ी है.
पत्नी सोनी देवी अपने पति को खो चुकी हैं. मृतक की मां ने अपना बेटा खो दिया है और पांच बच्चे उस पिता को खो चुके हैं, जो उनके जीवन का सहारा था. एक परिवार के लिए इससे बड़ा दुख क्या होगा कि घर का सदस्य दुनिया से चला जाए और पीछे छूट जाएं ऐसी जिम्मेदारियां, जिन्हें निभाने के लिए न पर्याप्त पैसे हों, न पक्का आशियाना और न ही कोई मजबूत सहारा. जिस घर में आज दुख की घड़ी में लोगों का साथ होना चाहिए था, वहां परिवार खुद को बेहद अकेला महसूस कर रहा है.
परिवार की जानकारी के मुताबिक, गरीब पड़ोसियों को छोड़कर कोई खास मदद के लिए आगे नहीं आया. यहां सवाल सिर्फ संवेदना जताने का नहीं है. सवाल यह है कि जब कोई परिवार ऐसी विपत्ति में फंस जाए, तो उसके आंसू पोंछने और उसकी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए कौन आगे आएगा? इस परिवार की मुश्किलें आज से शुरू नहीं हुई हैं.
परिवार के मुताबिक, वर्षों पहले गंगा की कटान में उनकी जमीन प्रभावित हुई थी. इसके बाद परिवार को अपना पुराना ठिकाना छोड़ना पड़ा और अब यह परिवार किसी दूसरे की जमीन पर रह रहा है. सोचिए, जिस परिवार के पास अपनी जमीन तक नहीं है, जिसके पास अपना मकान नहीं है, वह पहले से ही कितनी मुश्किलों के बीच जिंदगी गुजार रहा होगा. अब इस परिवार के सामने एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है. परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत के बाद पत्नी सोनी देवी के सामने पांच बच्चों की जिम्मेदारी है. इनमें तीन बेटियां भी शामिल हैं. इस परिवार की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतिम संस्कार के दौरान भी संसाधनों की कमी सामने आ गई.
बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और बेहतर भविष्य देने के लिए लगातार सहायता की जरूरत होगी. ऐसे में संबंधित प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से उम्मीद की जा रही है कि वे परिवार की वास्तविक स्थिति का संज्ञान लें और पात्रता के अनुसार जरूरी मदद उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करें. क्या इस परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचेगा? क्या सोनी देवी को अपने बच्चों के भविष्य के लिए कोई स्थायी सहारा मिल पाएगा? क्या वर्षों से अपनी जमीन और मकान से वंचित इस परिवार को सुरक्षित आशियाना मिल सकेगा?
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार, भागलपुर