बोफोर्स से लेकर FCRA तक, पहली बार किसी JPC की कमान बिहारी सांसद को मिली
विदेशी अंशदान विनियमन (FCRA) संशोधन विधेयक 2026 के लिए बीजेपी सांसद डॉ. संजय जायसवाल के नेतृत्व में JPC का गठन हो गया है. इस कमेटी में बिहार से संजय झा और कौशलेंद्र कुमार को भी शामिल किया गया है. वहीं, झारखंड से निशिकांत दुबे और काली चरण मुंडा को जगह मिली है.
विदेशी अंशदान विनियमन (FCRA) बिल की समीक्षा के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन हो गया है. 31 सदस्यों वाली इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सांसद शामिल हैं. यह समिति FCRA बिल के अलग-अलग प्रावधानों का अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट व सुझाव सरकार को सौंपेगी. इस समिति का अध्यक्ष बिहार से बीजेपी सांसद संजय जायसवाल को बनाया गया है. भारत के इतिहास में पहली बार बिहार के किसी सांसद को किसी JPC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
FCRA बिल की JPC में कौन-कौन है?
- लोकसभा के 21 सदस्य- पश्चिम चंपारण लोकसभा सीट से बीजेपी डॉ. संजय जायसवाल को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावा लोकसभा के सांसद भर्तुहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, श्रीमती कमलेश जांगड़े, मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल, डॉ. निशिकांत दुबे, विष्णु दयाल राम,अनंता नायक, अरविंद धर्मपुरी, एंटो एंटनी, कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस, मोहम्मद हमदुल्लाह सईद, काली चरण मुंडा, ज़िया उर रहमान, कल्याण बनर्जी, ए. राजा, लावु श्री कृष्ण देवरायालु, नरेश गणपत म्हस्के, कौशलेन्द्र कुमार, श्रीमती सुप्रिया सुले और ई. टी मोहम्मद बशीर को शामिल किया गया है.
- राज्यसभा के 10 सदस्य- इस कमेटी में राज्यसभा के 10 सांसदों को जगह मिली है. इनमें सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देवराव निकम, डॉ. अलका गुर्जर, सतपाल शर्मा, प्रफुल्ल पटेल, संजय कुमार झा, रिस्टोफर मानिकम, डॉ. मेनका गुरुस्वामी और पी. विल्सन का नाम शामिल है.
इस कमेटी का क्या काम होगा?
FCRA संशोधन विधेयक 2026 के लिए बनी JPC का मुख्य काम इस कानून की हर धारा की गहन समीक्षा करना है. इसके अलावा कानून से प्रभावित होने वाले सभी हितधारकों के विचारों को सुनकर, उनकी आपत्तियों के आधार पर कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर संसद में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करना है. इसके अलावा अगर किसी धारा में अस्पष्टता या अत्यधिक कड़ाई पाई जाती है, तो यह कमेटी इसमें सुधार, बदलाव या नई धारा जोड़ने का सुझाव देगी. यह कमेटी विश्लेषणात्मक अध्ययनों के आधार पर अपनी सिफारिशों के साथ एक अंतिम रिपोर्ट सदन में पेश करेगी.
JPC रिपोर्ट के बाद प्रक्रिया क्या होगी?
JPC की रिपोर्ट के बाद संसद के दोनों सदनों में विधेयक पर फिर से चर्चा होती है. बता दें कि JPC की सिफारिशों को स्वीकार करने या न करने के लिए सरकार स्वतंत्र होती है. हालांकि, आमतौर पर इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया जाता है.
अब तक कितनी JPC का गठन हो चुका है?