भागलपुर जिले के राघोपुर में एक बार फिर गंगा का भीषण कटाव शुरू हुआ है. कल रात 125 मीटर से ज्यादा तटबंध का हिस्सा गंगा में समाया, कई पक्के मकान और झोपड़ीनुमा घर भी कटाव की भेंट चढ़ गए. इलाके में अफरातफरी मची है, लोगों में दहशत है और एक बार फिर अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर जाने की मजबूरी सामने आ गई है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इसी तटबंध को बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जब मुख्यमंत्री तक मौके का निरीक्षण कर चुके हैं, जब जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की ओर से लगातार निगरानी की बात कही जा रही थी, तो फिर इतनी बड़ी तबाही कैसे हो गई?
कटाव की तस्वीरें खड़े कर रही सवाल
भागलपुर के राघोपुर से सामने आई कटाव की यह तस्वीरें कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं. जिस इलाके में लोग अपने परिवार और सामान के साथ रहते थे, वहां अब कटाव का खतरा मंडरा रहा है. हालात ऐसे बन गए कि लोगों को एक बार फिर अपने घर खाली करने पड़े. पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और लोग किसी अनहोनी की आशंका से डरे हुए हैं.
कटाव की गंभीरता को देखते हुए नवगछिया के एसडीओ के. परीक्षित और नवगछिया एसपी वैभव शर्मा रात में ही मौके पर पहुंचे. प्रशासन की ओर से प्रभावित घरों को खाली कराया गया, ताकि लोगों की जान को खतरे में पड़ने से बचाया जा सके. लेकिन सवाल यह है कि आखिर लोगों को बार-बार अपना घर क्यों छोड़ना पड़ रहा है? क्या हर बार प्रशासन की कार्रवाई कटाव शुरू होने के बाद ही होगी, या फिर समय रहते ऐसी व्यवस्था भी की जाएगी जिससे लोगों के घर और उनकी जिंदगी सुरक्षित रह सकें?
अगर खतरे की आशंका थी, तो...
सबसे अहम बात यह है कि गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद इस इलाके में कटाव की रफ्तार तेज हो गई. आम तौर पर बाढ़ के दौरान बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता की जाती है, लेकिन गंगा का पानी उतरने के समय भी कई संवेदनशील इलाकों में तेज कटाव का खतरा बना रहता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस इलाके की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर पर्याप्त तैयारी की गई थी? क्या जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कटाव की आशंका का आकलन किया गया था? और अगर खतरे की आशंका थी, तो उसे रोकने के लिए पहले से प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?
दिए गए निर्देशों का कितना असर हुआ?
पिछले महीने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी यहां पहुंचकर निरीक्षण किया था. उन्होंने दो बार एरियल सर्वे के जरिए स्थिति का जायजा लिया था. इसके बाद भी अगर उसी इलाके में एक बार फिर 125 मीटर से अधिक तटबंध कट जाता है और कई मकान गंगा में समा जाते हैं, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि पहले किए गए निरीक्षण और दिए गए निर्देशों का जमीन पर कितना असर हुआ? इस इलाके से पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र का विधानसभा क्षेत्र जुड़ा है. ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल भी इसी क्षेत्र से आते हैं. इसके बावजूद स्थानीय लोगों के सामने अपने घर और जमीन को बचाने का संकट खड़ा है.
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार