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'ड्राय स्टेट' बिहार में सूखे नशे का फैलता जाल, म्यांमार से आ रहे ड्रग की चपेट में फंस रहे किशोर

इसमें कोई दोराय नहीं कि शराबबंदी के बाद भी बिहार में नशे के सेवन पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकी है. लोग शराब पी रहे हैं, लेकिन उसके लिए ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं. जो लोग शराब नहीं पी रहे हैं और नशा करना चाहते हैं, वे सूखे नशे की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. यह बिहार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है.

Written By Sunil Mishra
Published: Oct 22, 2026, 02:09 PM IST | Updated: Oct 22, 2026, 02:20 PM IST
Image Credit: बिहार में शराबबंदी है, लेकिन नशे में कमी नहीं हो पा रही है. (AI Image)
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बिहार में शराबबंदी के 10 साल हो चुके हैं और इन 10 सालों में बिहार पुलिस और मद्य निषेध विभाग ने 3.16 करोड़ लीटर शराब जब्त की और 7.15 लाख लोगों को धर दबोचा. मतलब रोजाना 8650 लीटर शराब की धरपकड़ और 196 गिरफ्तारियां हो रही हैं. फिर भी इस पर पूरी तरह लगाम नहीं लगाया जा सका है. राज्य में शराब पर कड़े प्रतिबंध के चलते एक समानांतर बाजार खड़ा हो गया है. शराब के आ​दी लोग अब ड्रग्स की ओर शिफ्ट होने लगे हैं. शराब की बोतलें छिपाना मुश्किल होना है. मुंह से शराब की महक के चलते भी पुलिस कई बार पकड़ लेती है. दूसरी ओर, ड्रग्स में यह झंझट नहीं है. उसकी पुड़िया आती है या छोटी शीशी या फिर गोलियां, जिसे कहीं भी छिपाया जा सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में भले ही शराबबंदी है, लेकिन एनडीपीएस एक्ट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. 2019 में नारकोटिक्स के केवल 697 मामले दर्ज हुए थे, जो 2026 के शुरुआती 5 महीनों में 1905 हो गए हैं. यह आंकड़ा 2022 के पूरे साल के मामलों से भी 83 अधिक है. 2022 में 29,762 गोलियां जब्त हुई थीं, वहीं 2026 के पहले 5 महीनों में यह संख्या 9.29 लाख गोलियों तक पहुंच गईं. इस तरह इसमें 30 गुने से भी अधिक उछाल दर्ज किया गया.

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2022 में 16,691 किलो गांजा जब्त किया गया था, जो 2025 में बढ़कर 31,915 किलोग्राम हो गया. इसी तरह 2025 में 65.08 किलो हेरोइन जब्त की गई थी, जो 2026 के शुरुआती 5 महीनों में 51.92 किलो दर्ज की गई है. बिहार पुलिस की एसटीएफ नारकोटिक्स सेल ने अक्टूबर 2026 तक 52.32 करोड़ रुपये नशीले पदार्थ जब्त किए गए और 315 तस्करों को दबोचा गया.

कोटा ड्रग क्या है?

पुलिस की मानें तो कोटा ड्रग असल में रॉ हेरोइन को कहा जाता है, जिसे आमतौर पर सिगरेट में भरकर सेवन किया जाता है. यह भुरभुरे, हल्के या केसरिया सफेद रंग के सरसों के दानों जैसा दिखता है. इसे छोटी शीशियों में बेचा जाता है. पहले इसकी एक शीशी 100 से डेढ़ सौ रुपये में मिलती थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 300 से 400 रुपये तक हो गई है. इसकी तस्करी के रूट की बात करें तो यह म्यांमार से पूर्वोत्तर होते हुए बिहार तक पहुंचता है. यह खेप मिजोरम और मणिपुर की सीमा को पार कर चंफाई आइजोल सिलचर से होते हुए ट्रेनों के जरिए बिहार के विभिन्न जिलों तक पहुंचता है. गांजे की खेप की बात करें तो यह नेपाल, त्रिपुरा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से तो डोडा और पोस्त छिलका नेपाल और झारखंड के रास्ते बिहार लाया जाता है.

राजधानी पटना के किशोर ज्यादा कर रहे सेवन

राजधानी पटना के किशोरों में इस तरह के नशे की लत सबसे अधिक लग रही है. राज्य में दर्ज कुल एनडीपीएस मामलों में पटना शीर्ष पर है. अकेले पटना में 2026 के पहले 5 महीनों में 389 मामले दर्ज किए गए हैं, जो 2025 के पूरे साल 372 केस से भी अधिक है. पुलिस का कहना है कि नाबालिग किशोरों में नशे के सेवन के चलते अपराध की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है. 2016 से 2023 तक के 7 साल में जहां एनडीपीएस एक्ट में केवल 11 नाबालिग पकड़े गए थे, 2024 में 50 नाबालिग पकड़े गए थे.

राजधानी के अलावा नशे का यह जाल धीरे धीरे बाकी जिलों से लेकर कस्बों तक फैलता जा रहा है, लेकिन इसके उलट पुनर्वास के लिए सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं. बिहार के एक तिहाई जिलों में केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही नशा मुक्ति केंद्र सक्रिय नहीं हैं. इस कारण राज्य में सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों बातों को लेकर गंभीर संकट खड़ा होता दिख रहा है.

गृह मंत्री अमित शाह बिहार पर विशेष ध्यान दें: मनोज झा

राजद सांसद मनोज झा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बिहार पर विशेष ध्यान देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ऐसे ही चलता रहा तो आने वाली पीढ़ियों को काफी नुकसान होगा. उन्होंने कहा कि जब सरकार का कोई नियंत्रण न हो, तो ऐसा ही होता है. राज्य में हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं. इसके चलते हत्या और बलात्कार की घटनाओं में बढ़ोतरी हो सकती है. इस सूखे नशे का असर बहुत बड़ा होने वाला है. मैं समझता हूं कि लोगों को एक बार विचार करना चाहिए कि अगली पीढ़ी तक इसे पहुंचने से कैसे रोकना है. अगर इस पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में ये लोग पीढ़ियां बर्बाद करके रख देंगे.
मैंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सोशल मीडिया पर टैग करके लिखा है कि पंजाब सही है लेकिन मेरे बिहार पर भी नजर डालिए.

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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