पति शहर के मानिंद व्यक्ति, खुद रहीं पूर्व प्राचार्य: 50 हजार रुपये पेंशन मिलने पर भी आभा देवी की ऐसी दुर्गति, छोटी बेटी पर गंभीर आरोप
पिता ओमप्रकाश पांडेय के निधन के साथ ही दोनों छोटी बेटियां और उनके पतियों की गिद्धदृष्टि रक्सौल शहर में स्थित उनके मकान पर टिक गई थीं. शायद वे ओमप्रकाश पांडेय के मरने के इंतजार में ही थे. उनके निधन के साथ दोनों छोटे दामादों का मकसद खुलकर सामने आ गया था.
मां-बाप की दौलत में हिस्सा मांगने से पहले, कभी उनके आंसुओं का हिसाब भी मांग लेना. जिन्होंने पूरी जिंदगी तुम्हारे नाम कर दी, उनके बुढ़ापे में थोड़ा-सा वक्त भी दे देना. रक्सौल शहर के वार्ड-21 स्थित सब्जी बाजार में रहने वालीं पूर्व प्राचार्य आभा देवी के उनकी अपनी छोटी बेटी ने जो किया, वो किसी के साथ दुश्मन भी नहीं करता. आभा देवी के साथ छोटी बेटी की क्रूरता भरे व्यवहार ने मानवता को झकझोर दिया है. दिवंगत पूर्व वार्ड पार्षद ओम प्रकाश पांडे की पत्नी और सेवानिवृत्त शिक्षिका आभा देवी (66) अपने ही घर के एक कमरे में बेहद बदहाल हालत में मिलीं. गंदगी और दुर्गंध से भरे कमरे में वह निढाल अवस्था में पड़ी थीं. उनकी स्थिति ऐसी थी कि वह अपने पैरों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं. स्थानीय लोगो की सूचना पर पहुंची डायल-112 पुलिस और स्वच्छ रक्सौल की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया. फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस मामले में अभी आभा देवी की छोटी बेटी का पक्ष सामने नहीं आया है.
जानकारी के अनुसार, महिला की दयनीय स्थिति की सूचना मिलने पर डायल-112 के प्रभारी रामानंद सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. स्वच्छ रक्सौल के अध्यक्ष रंजीत सिंह और महिला प्रभारी शबरा खातून भी टीम के साथ थीं. घर का मुख्य दरवाजा बंद था. स्थानीय सब्जी विक्रेता के पास मौजूद चाबी से दरवाजा खुलवाया गया. अंदर आभा देवी कुर्सी पर निढाल मिलीं. कमरे में गंदगी, तेज दुर्गंध और कई दिनों से रखा सूखा भोजन पड़ा था. उनकी हालत देखकर टीम के सदस्य भी भावुक हो गए और तत्काल उन्हें व्हीलचेयर की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया.
दायां हिस्सा लकवाग्रस्त, अस्पताल में चल रहा इलाज
अनुमंडल अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. शशि रंजन कुमार ने उनका इलाज शुरू किया. डॉ. शशि रंजन कुमार ने बताया कि महिला शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो चुकी हैं. उनके शरीर का दायां हिस्सा लकवाग्रस्त है. वह मानसिक तनाव में भी दिखीं. उपचार के बाद उनकी हालत स्थित बताई जा रही है. उन्हें अभी डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है.
छोटी बेटी पर लगाया कमरे में बंद रखने का आरोप
अस्पताल में होश में आने के बाद आभा देवी ने संपत्ति विवाद को लेकर अपनी छोटी बेटी पर कमरे में बंद रखने का आरोप लगाया. उन्होंने भावुक होकर कहा, 'सबको संपत्ति से मतलब है.' खबर है कि छोटी बेटी शुक्रवार शाम को थाने पहुंची थी और अपनी मां को साथ ले जाने की बात कह रही थी, लेकिन आभा देवी ने उसके साथ जाने से इनकार कर दिया. पुलिसवालों ने जब आभा देवी से पूछा कि क्या आप अपनी छोटी बेटी के साथ जाना चाहती हैं तो उन्होंने कहा कि मैं कहीं भी रह लूंगी पर छोटी बेटी के साथ नहीं जाउंगी. छोटी बेटी का पक्ष खबर लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं हो सका था. स्वच्छ रक्सौल के अध्यक्ष रंजीत सिंह के अनुसार, फोन पर बातचीत में बेटी ने शुक्रवार को आकर अपनी मां की कथित गलतियों के बारे में बताने की बात कही थी. इसलिए मामले में दोनों पक्षों को सुनना जरूरी है.
पूर्व प्राचार्य और पूर्व पार्षद की पत्नी हैं आभा देवी
आभा देवी फुलचंद्र साह मध्य विद्यालय की पूर्व प्राचार्य रह चुकी हैं. उनके पति ओम प्रकाश पांडे वार्ड-21 के पूर्व पार्षद और नगर परिषद की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य थे. कुछ वर्ष पहले हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया था. उनकी तीन बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है. पति के निधन के बाद आभा देवी अपने आवास पर अकेली रह रही थीं. स्वच्छ रक्सौल के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि महिला को 50 हजार रुपये से अधिक पेंशन मिलने की बात सामने आई है.
वहीं, डायल-112 प्रभारी रामानंद सिंह ने बताया कि मामले की रिपोर्ट संबंधित थाने को दे दी गई है. रक्सौल थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो के अनुसार, सूचना मिलते ही पुलिस टीम भेजी गई थी. आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है. एक सेवानिवृत्त शिक्षिका की ऐसी हालत में मिलने की घटना ने बुजुर्गों की देखभाल, पारिवारिक जिम्मेदारी और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सास आभा देवी को साथ रखना चाहते थे बड़ी बेटी और दामाद
इस बारे में आभा देवी की बड़ी बेटी और दामाद ने बताया कि ससुर ओमप्रकाश पाण्डेय जी के मरणोपरांत दो दामादों ने रक्सौल की संपत्ति बेचकर हमेशा के लिए यहां से चले जाने की बात कही थी, जिसका उन्होंने विरोध किया था. इस पर दोनों साढ़ुओं ने जबर्दस्त प्रतिवाद किया था. उन्होंने बताया कि एक पंचायती के दौरान आभा देवी ने जेठ और जेठानी के साथ रहने या बड़ी बेटी के साथ जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन दोनों दामादों ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया था.
दोनों बेटियों की ओर से कहा गया कि पिता ओमप्रकाश पांडे की सेवा वो नहीं कर पाई थीं, इस लिहाज से मां आभा देवी की सेवा की जिम्मेदारी उन्हें दी जाए. इस दौरान दोनों बेटियों ने बड़ी बेटी से बेहतर सेवा करने का दावा किया था. पंचों ने भी कहा कि चूंकि आपने अपने ससुर की सेवा की है, तो सास की सेवा की जिम्मेदारी बाकी दोनों बेटी दामाद को दिया जाना चाहिए. इसके बाद दोनों बेटी दामादों को आभा देवी का एटीएम कार्ड, मकान का रेंट और पेंशन के साथ सौंप दिया गया.