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जेडीयू के साथ तो गेम हो गया: सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक सीट पर उम्मीदवार न उतारकर भी जीत गई बीजेपी

बीजेपी का सही है. शायद उसका सोचना है कि गठबंधन चुनाव के लिए होता है. चुनाव बाद सरकार बनाने के लिए गठबंधन होता है, लेकिन अगर कोई निर्दलीय आपके प्रत्याशी को हरा रहा है, तो उसे अपनी टीम में शामिल करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

Written By Sunil Mishra
Published: Oct 31, 2026, 08:35 PM IST | Updated: Oct 31, 2026, 08:52 PM IST
Image Credit: एमएलसी चुनाव में निर्दलीय जीते राहुल राज और वंशीधर बृजवासी शनिवार को भाजपाई हो गए. (Video Grab)
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अभी तक विरोधी दल यह आरोप लगाते थे बीजेपी जहां चुनाव जीतती है, वहां तो सरकार बनाती ही है, लेकिन जहां हार जाती है, वहां भी बना लेती है. अब एक नया शुरू हुआ है- बीजेपी उम्मीदवार खड़ा करे या न करे, जीतने के ​बाद जनप्रतिनिधि उसी के हो जाते हैं. अब देखिए न, बिहार विधान परिषद चुनाव में तिरहुत स्नातक सीट से जीते निर्दलीय वंशीधर बृजवासी और सारण शिक्षक सीट से जीते निर्दलीय राहुल राज शनिवार को भाजपा में शामिल हो गए. इस तरह विधान परिषद की हालिया 8 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी के पास अब 4 पार्षद हो गए हैं. चुनाव में बीजेपी ने कोसी स्नातक सीट और तिरहुत शिक्षक सीट से जीत हासिल की थी, लेकिन अब उसके पास कुल 4 विजेता प्रत्याशी हैं. है न कमाल की बात.

एक और खास बात जान लीजिए. इन दोनों नेताओं ने दोनों सीटों से जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशियों को हराया है. सारण ​शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय राहुल राज ने जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी आनंद पुष्कर को हराया था और तिरहुत स्नातक सीट से वंशीधर बृजवासी ने जनता दल यूनाइटेड के ही अभिषेक झा को मात दी थी.

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अगर दोनों सीटों पर जीत हासिल होती तो जेडीयू के दो सदस्य बढ़ जाते, लेकिन निर्दलीय की जीत होने के बाद बीजेपी की 2 सीटें बढ़ गई हैं. अब विधान परिषद में उसके 27 सदस्य हो गए हैं. विधान परिषद चुनाव से पहले बीजेपी के पास 26 पार्षद थे. चुनाव में उसके 2 प्रत्याशी जीते तो सीटों की कुल संख्या 25 पर सिमट गई थी. अब दो निर्दलीय पार्षदों के बीजेपी में आ जाने से उसकी संख्या सबसे अधिक 27 हो गई है.

जनता दल यूनाइटेड के पास विधान परिषद में 20 सदस्य हैं. राष्ट्रीय जनता दल को इस चुनाव में ऐतिहासिक सफलता मिली है, जिससे उसके सदस्यों की संख्या 15 से बढ़कर 17 पर जा पहुंची है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अब विधान परिषद में शून्य पर सिमट गई है. पहले उसे तिरहुत शिक्षक सीट से जीत हासिल हुई थी, लेकिन इस बार वह हार चुकी है.

लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास एक-एक सीट है. पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी और सीपीआई एमएल के पास भी एक-एक सीट है. कांग्रेस के पास भी बेगूसराय स्थानीय प्राधिकार के रूप में एक सीट बची रह गई है.

हालांकि, सारण से जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर ने इस पर कोई बयान नहीं है, लेकिन तिरहुत से जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा ने एनडीए के सहयोगी दलों पर खुलकर आरोप लगाया है. अभिषेक झा ने गठबंधन में भीतरघात का आरोप लगाया, तो बीजेपी विधायक सुनील कुमार पिंटू ने इसका जवाब दिया. उन्होंने कहा कि यह उनकी सोच है, पूरा आरोप निराधार है. पूरी एनडीए लगी हुई थी. पिछले चुनाव में जो दो साल पहले हुआ था, आप चौथे स्थान पर थे, इस बार सेकंड आए हैं. 
 

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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