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बिहार में 1799 पदों वाली दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द किए जाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने आज (सोमवार, 5 अक्टूबर) राजधानी पटना में जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शन को देखते हुए पटना पुलिस ने जेपी गोलंबर से डाकबंगला चौराहे तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. जेपी गोलंबर पर बांस-बल्ली से बैरिकेडिंग की गई है. इसके अलावा भी जगह-जगह बड़े बैरिकेड लगाए गए हैं. हालांकि, इसके बावजूद अभ्यर्थियों को रोकना मुश्किल हो रहा है. जानकारी के मुताबिक, छात्र जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग को तोड़कर आगे बढ़ गए हैं और अब डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ रहे हैं.
कई जगहों पर पुलिस से हुई धक्का-मुक्की
इस दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई. पुलिस ने अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया. प्रदर्शन के कारण आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बना रहा. प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों के हाथों में अलग-अलग पोस्टर नजर आए.
हाथों में पोस्टर लेकर सड़क पर उतरे छात्र
अभ्यर्थियों ने हाथों में पोस्टर लेकर आयोग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. एक पोस्टर पर लिखा था- दो कचौड़ी, एक समोसा, बीपीएसएससी का क्या भरोसा. इसके जरिए अभ्यर्थियों ने आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया.
पिछले 7 दिनों से चल रहा था धरना
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि वे पिछले सात दिनों से गर्दनीबाग में अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है. इसके बाद सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सड़क पर उतरकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने का प्रयास करने लगे. अभ्यर्थी मौर्य लोक की ओर से आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया.
परीक्षा रद्द करने से नाराज हैं कैंडिडेट
बता दें कि बिहार में दारोगा के 1,799 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी. मुख्य परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जा चुका था. बाद में परीक्षा में अनियमितता के आरोप सामने आने के बाद बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने मुख्य परीक्षा को रद्द कर दिया. आयोग के इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी है और वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं.
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा रद्द करने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए. उनका दावा है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पूरी प्रक्रिया में मेहनत की है और परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की है.