'नटवरलाल, गुटखा और अहंकार': बिहार MLC चुनाव में नेताओं की जुबान हुई जहरीली! लांघ दी भाषा की सभी सीमाएं
बिहार एमएलसी चुनाव में प्रचार के दौरान 'नटवरलाल' और 'गालीबाज' वाले बयानों से सियासत गरमा गई है. डॉ. संजीव कुमार और नवल किशोर यादव, भीष्म सहनी के बीच भाषा की मर्यादा तार-तार हो गई.
बिहार में 8 सीटों पर हो रहे एमएलसी चुनाव को लेकर अब उम्मीदवारों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है. पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आरजेडी के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने जदयू-बीजेपी समर्थित उम्मीदवार पर तीखा हमला बोला है. डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि नवल किशोर जी कह रहे हैं कि वह पांच बार जीते हैं और छठी बार भी वही जीतेंगे. यह बिल्कुल बकवास है. इस बार रावण का भी अंत हुआ था, उनके अहंकार का भी अंत होगा.
उन्होंने कहा कि वह गालीबाज आदमी हैं, मुंह से गुटखा निकलता नहीं तो गाली देते हैं. शिक्षकों को गाली देते हैं, महिलाओं को गाली देते हैं. ऐसे बदतमीज इंसान को किसी भी एंगल से सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए. वह जमानत जब्त होने की बात कर रहे हैं? जमानत जब्त कराना नवल जी के औकात के बाहर की बात है. यहां शिक्षक वोटर हैं, शिक्षक समाज जिसकी जमानत जब्त कराना चाहेगा, उसी की होगी. मैं कभी किसी अहंकार में नहीं कहता कि मैं किसी की जमानत जब्त कराने वाला हूं. यह शिक्षक समाज के हाथ में है और यह जान लीजिए कि नवल किशोर यादव जी बुरी तरह हारने जा रहे हैं.
आगे डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि उनके बारे में कुछ बोलना ही अनुचित है. उम्र भी 75 साल हो गई है, तो दिमाग भी काम करना बंद कर दिया है उनका. नवल जी कह रहे हैं कि हम सरकार में हैं, हम ही वेतनमान दिलाएंगे. आज तक पूछिए, उन्होंने 30 साल में वेतनमान क्यों नहीं दिलवाया? वित्त रहित को क्यों ठग रहे हैं? चुनाव आता है तो उन्हें वेतनमान की याद आती है? यह सब नटवरलाल हैं, इंटरनेशनल ठग हैं. यह सोच रहे हैं कि बार-बार एक ही तरह से ठगते रहेंगे, लेकिन इस बार शिक्षक समाज एकजुट है.
नवल यादव का पलटवार
दूसरी ओर बीजेपी के एमएलसी उम्मीदवार नवल यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि जिसकी झोली में कुछ नहीं है, जो चीट करने के लिए आया है, जो शिक्षक नहीं है, जो बेसिकली बाप-दादा के नाम पर आया है, जो शिक्षकों के चरित्र को पैसे से खरीदना चाहता है, वह आदमी लड़खड़ा गया है. वैसे ही लोग कुछ बोलेंगे और वह कहते हैं ना- खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे. तो ऐसे लोगों की बात पर मैं कोई प्रतिक्रिया नहीं देता हूं. वह पूंछ पकड़कर लटक कर अपने आप को दूसरा उम्मीदवार बनाना चाहता है, जबकि यहां सबकी जमानत जब्त होनी तय है. कौन कहता है कि एक भी मतदाता को रोक देंगे? सात पुश्तें याद करा देंगे.
वहां तो हमेशा से अहंकार और घमंड रहा: जदयू
वहीं, जदयू के पूर्व एमएलसी भीष्म सहनी ने कहा कि आज मैंने डॉ. संजीव जी का बयान देखा. राजनीति में एक मर्यादा होनी चाहिए, लेकिन वे जिस पार्टी के उम्मीदवार हैं, वहां तो हमेशा से अहंकार और घमंड रहा है. उनके नेता तेजस्वी यादव जी का घमंड भी जगजाहिर है और इनका भी बयान घमंड से भरा हुआ है. राजनीति में मर्यादित भाषा का प्रयोग होना चाहिए. इस बार जनता संजीव जी को भी सबक सिखाएगी, जैसे तेजस्वी जी को विधानसभा चुनाव में सबक सिखा चुकी है और नवल यादव भारी मतों से चुनाव जीतेंगे.
रिपोर्ट: रुपेंद्र श्रीवास्तव