बिहार में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, नौकरी के नाम पर ठगी के आरोप में AIMIM के पूर्व नेता समेत दो गिरफ्तार
बिहार के सीमांचल में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को मानव तस्करी के जाल में फंसाने वाले गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है. किशनगंज पुलिस और एसटीएफ ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार होने वाले आरोपी में एक AIMIM के पूर्व नेता भी है.
Kishanganj News: बिहार के सीमांचल में बेरोजगार युवाओं को दुबई और सऊदी अरब जैसे देशों में मोटी कमाई का सपना दिखाकर अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के जाल में फंसाने वाले एक बड़े गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. किशनगंज पुलिस और STF की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के कथित सरगना समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह रोजगार दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये वसूलता था और उन्हें विदेश में बंधुआ मजदूरी करने के लिए मजबूर किया जाता था.
नौकरी के नाम पर वसूले जाते थे 1.80 लाख रुपये
किशनगंज SP संतोष कुमार के निर्देश पर गठित विशेष टीम और एसटीएफ ने पटना में छापेमारी कर पूर्णिया जिले के रौटा निवासी हाजी नाहिद गनी और अनगढ़ निवासी मो. तबरेज को गिरफ्तार किया. हाजी नाहिद गनी को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का पूर्व युवा प्रदेश महासचिव बताया जा रहा है. पुलिस के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर हाजी नाहिद गनी प्राइवेट लिमिटेड और ताइबा इंटरनेशनल टूर एंड ट्रैवल्स जैसी एजेंसियों के जरिए सीमांचल के युवाओं को अपने जाल में फंसाता था. रोजगार दिलाने के नाम पर प्रत्येक युवक से करीब 1.80 लाख रुपये तक वसूले जाते थे.
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एक युवक लापता
यह मामला किशनगंज के बिशनपुर थाने में पीड़ित नूरजफर के पिता मोहम्मद सुलेमान की शिकायत के बाद सामने आया. पूर्व विधायक मुजाहिद आलम ने बताया कि मलेशिया पहुंचते ही युवाओं के वीजा पाकिस्तानी एजेंट अफजल द्वारा छीन लिए जाते थे और उन्हें बंधुआ मजदूरी करने के लिए मजबूर किया जाता था. उन्होंने बताया कि पूर्णिया जिले के अमौर निवासी कमरुल हक 2 फरवरी 2026 से मलेशिया में लापता हैं और उनका परिवार को अब तक उनकी कोई जानकारी नहीं मिला है. किशनगंज SDPO-1 खुसरू सिराज के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार मलेशिया में सक्रिय एक पाकिस्तानी एजेंट से जुड़े हैं. युवाओं को वैध वर्क वीजा के बजाय टूरिस्ट वीजा देकर पहले पटना से दिल्ली और फिर थाईलैंड के क्राबी भेजा जाता था. इसके बाद कथित तौर पर अवैध डंकी रूट के जरिए उन्हें मलेशिया भेजा जाता था, जहां जोहोर में सक्रिय एजेंट उन्हें कमरों में बंद रखकर अमानवीय परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर करता था.
सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज
इस मामले में किशनगंज, बहादुरगंज और पूर्णिया के रौटा समेत विभिन्न थानों में धोखाधड़ी और उत्प्रवास अधिनियम के तहत अब तक सात प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं. पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और कथित अपराध से अर्जित अवैध संपत्ति की जांच कर रही है. साथ ही, अवैध कमाई से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है. पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और विदेश में फंसे युवाओं के संबंध में जानकारी जुटाने में लगी है.
रिपोर्ट: अमित कुमार सिंह