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देश की राजधानी दिल्ली में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. बहुमंजिला इमारत के गिरते ही प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है. इस हादसे के बाद अब बिहार सरकार भी हरकत में आ गई है. दिल्ली हादसे से सबक लेते हुए बिहार में अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त बिल्डिंग बायलॉज की बात कही जा रही है.
दिल्ली की बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई
दरअसल, दिल्ली की बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई. इस भयानक हादसे में कई जिंदगियां धुएं और मलबे में दफन हो गईं, लेकिन सवाल यह है कि क्या हम सिर्फ हादसों का इंतजार करते हैं? दिल्ली की इस खौफनाक घटना के बाद अब बिहार सरकार यहां इस तरह की घटना न हो, इसके लिए सख्त नियम-कायदे की बात कह रही है.
सख्त बिल्डिंग बायलॉज लागू करने की तैयारी
बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार की राजधानी पटना में भी कुकुरमुत्ते की तरह पीजी चल रहे हैं. छात्रों के रहने के लिए पीजी वाले मकान भी कई इलाकों में जर्जर हालत में हैं. सरकार ऐसी इमारतों पर एक्शन लेगी. वहीं, मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने भी कार्रवाई करने की बात कही है. इस पर अब विपक्ष सवाल उठा रहा है. नियम बनाने की बात से लेकर उस पर सख्ती से लागू किए जाने पर भी सवाल खड़ा किया जा रहा है.
विपक्ष ने पूछे तीखे सवाल
आरजेडी मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने बिहार सरकार को घेरते हुए कहा कि पटना में ऐसी सैकड़ों इमारतें हैं, जो बिना किसी पुख्ता सुरक्षा मानक के खड़ी कर दी गई हैं. सरकार केवल नियम बनाने की बात करती है. कांग्रेस प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि जब कोई घटना घट जाती है, तो सोई हुई बिहार की सरकार जगती है. अब बिहार सरकार के मंत्री जाग गए हैं और कार्रवाई की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब एनओसी के नाम पर पुलिस बिल्डिंग मालिकों को परेशान करेगी.
नियम बना देने से जमीनी हकीकत बदलेगी?
दरअसल, पटना की तंग गलियां, तय सीमा से ज्यादा ऊंची मंजिलें और कमजोर नीवों पर बने मकान हर वक्त किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं. कुछ महीने पहले ही दलदली इलाके में एक घर के हिस्से गिरे थे. इमारतों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट और तय नक्शे से हटकर किए गए निर्माण पर सीधे सवाल खड़ा हो रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महज नियम बना देने से जमीनी हकीकत बदलेगी? या फिर हर बार की तरह यह घोषणा भी सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी?
रिपोर्ट: रजनीश