बाढ़ का सितम: कोसी और सोन नदी का कोप थोड़ा कम हुआ पर गंगा और गंडक अब भी तबाही के मूड में
कोसी और सोन नदियों का पानी कम होना निश्चित रूप से बिहार के लोगों और सरकार के लिए राहत की खबर है, लेकिन गंगा और गंडक के अलावा पुनपुन नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.
बिहार में अधिकारियों की मानें तो प्रमुख नदियों जैसे कोसी और सोन में जलस्तर कम होने की खबर है, जबकि गंडक नदी का जलस्तर यथावत बना हुआ है. विभाग लगातार निगरानी कर रहा है. प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं. वीरपुर बराज पर मंगलवार को सुबह 10 बजे कोसी से 1 लाख 69 हजार 985 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी से 1 लाख 4 हजार 758 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. दोनों जगह पानी छोड़े जाने की मात्रा में गिरावट दर्ज की गई है. वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी से 1 लाख 4 हजार 400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया, जो इसके पिछले उच्चतम बाढ़ का जलस्तर (36.75 मीटर, 17.08.2021) से 0.05 मीटर ऊपर है. हालांकि गंडक, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां अन्य कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.
भागलपुर में 2 लाख से ज्यादा आबादी बाढ़ की चपेट में
भागलपुर में गंगा और कोसी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भागलपुर में गंगा नदी खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जबकि सुल्तानगंज में गंगा खतरे के निशान से ढाई मीटर से अधिक ऊपर पहुंचते हुए हाईएस्ट फ्लड लेवल को भी पार कर गई है. हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के 56 पंचायतों के 178 गांव और 347 वार्ड बाढ़ की चपेट में हैं. करीब 2 लाख 17 हजार 811 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और जिला प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है. जिला प्रशासन के मुताबिक, अब तक 22,035 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.
बाढ़ पीड़ितों के बीच करीब 4 हजार पॉलीथिन शीट और तिरपाल बांटे जा चुके हैं. वहीं, भोजन की व्यवस्था के लिए जिले में 15 सामुदायिक रसोइयां संचालित की जा रही हैं, जहां 24 तारीख से अब तक एक लाख से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है. इसके अलावा टीएनबी कॉलेजिएट समेत सात प्रमुख स्थानों पर राहत शिविर चलाए जा रहे हैं.
पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी विशेष तैयारी की गई है और अब तक 9,343 पशुओं का पंजीकरण किया गया है. राहत और बचाव अभियान के लिए एसडीआरएफ की 5 टीमें, 17 मोटरबोट और 501 आपदा मित्रों को तैनात किया गया है.
खगड़िया में गंगा और गंडक खतरे के निशान से ऊपर
खगड़िया में गंगा और गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके कारण जिले के चार प्रखंड के 1 लाख 60 हजार से ज्यादा की आबादी बाद प्रभावित है. वहीं, खगड़िया के नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 30 में बूढी गंडक नदी से पानी आने के कारण एक सौ से अधिक घरो में पानी प्रवेश कर गया है, जिसके बाद बाढ़ पीड़ितों को काफी परेशानी हो रही है. सभी बाढ़ पीड़ितों के घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. जिला प्रशासन की ओर से बापू मध्य विधालय में राहत शिविर खोला गया है, जिसमें बाढ़ पीड़ितों के रहने और खाने की व्यवस्था की गई है. स्थानीय वार्ड पार्षद रणवीर कुमार ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राहत शिविरों में छोटे बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की जाए.
मुंगेर के सामुदायिक किचन में खाना नहीं मिलने का आरोप
असरगंज प्रखंड के आमैया पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय, जवाहरपुर में बाढ़ पीड़ितों के लिए संचालित सामुदायिक किचन में भोजन नहीं मिलने का आरोप लगा है. पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ का पानी घरों में घुसने से उनके सामने रहने और भोजन की समस्या पैदा हो गई है. फिर भी उन्हें राहत के तौर पर मिलने वाला भोजन नहीं दिया जा रहा है. अमैया की गुंजन देवी, रविता देवी और अकालु देवी ने बताया कि बाढ़ का पानी घरों में भर गया है. उनके पास रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं बची है. परिवार में चार से पांच सदस्य हैं. घर में खाना पकाने के लिए न तो राशन है और न ही चूल्हा या गैस की व्यवस्था है. पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि जब वे या उनके बच्चे विद्यालय में मिलने वाले भोजन के लिए गए, तो उन्हें मना कर लौटा दिया गया.
लोगों के जरूरत की सारी चीजें मुहैया कराई जाए: मंत्री
भोजपुर जिले के कई इलाके आजकल बाढ़ की चपेट में हैं और इस दौरान नेताओं और पदाधिकारियों के आने और जाने का सिलसिला भी जारी है. जिले के प्रभारी मंत्री सह श्रम संसाधन मंत्री बिहार सरकार अरुण शंकर प्रसाद, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर, शाहपुर विधायक राकेश ओझा और जिले के प्रभारी सचिव सहित जिला पदाधिकारी भोजपुर मनेश मीणा पुलिस अधीक्षक भोजपुर अवधेश दीक्षित सहित कई पदाधिकारी शाहपुर प्रखंड के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का जायजा लेने पहुंचे. प्रभारी मंत्री ने बताया कि जिले में बाढ़ को देखते हुए प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि इस विकट स्थिति में लोगों को जरूरत की सारी चीजें मुहैया करवाई जाए. एसडीआरएफ लोगों को मदद पहुंचाने में जुटी है. बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में जिला प्रशासन की ओर से कम्युनिटी किचन भी चलाए जा रहे हैं.
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी अपने दल और बल के साथ जिले के बड़हरा प्रखंड के कई इलाके में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे. पप्पू यादव खुद ट्रैक्टर चलाकर अपने समर्थकों के साथ बड़हरा बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का जायजा लेते नजर आए. पप्पू यादव ने बाढ़ के पानी में उतरकर लोगों से उनका हाल-चाल जाना और और सरकार की कार्यशैली पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने जिला प्रशासन से अनुरोध किया कि जो भी बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में बाढ़ पीड़ित है, उनको तत्काल राहत मुहैया कराई जाए.
बड़हरा विधानसभा के विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह भी अपने क्षेत्र में लगातार दौरा करते नजर आ रहे हैं, ताकि किसी को कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े. हालांकि, बड़हरा इलाका पूरी तरह से बाढ़ से प्रभावित है. हालांकि, जिलाधिकारी मनेश मीणा लगातार बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा करते नजर आ रहे हैं और खुद इस आपदा की मॉनिटरिंग कर रहे हैं.
बख्तियारपुर दियारा में बाढ़ पीड़ितों से मिले पप्पू यादव
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव मंगलवार को बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए बख्तियारपुर दियारा पहुंचे. वे अपनी टीम के साथ नाव पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में घूमे और उनकी मदद की. इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से स्थानीय प्रशासन से मिल रही सहायता के बारे में भी जानकारी ली. बाढ़ पीड़ितों का जवाब सुनकर वे काफी नाराज दिखे. उन्होंने बख्तियारपुर दियारा में रूपस महाजी, काला दियारा, चिरैया दियारा और हरदास बीघा सभी बाढ़ प्रभावित पंचायतों का दौरा किया. दियारा का संपर्क बाढ़ में कुछ महीनों तक शहर से कट जाता है. इस दौरान वे गंगा की तेज धारा में एकमात्र नाव से ही बख्तियारपुर आते और जाते हैं. पप्पू यादव कई जगह बाढ़ के पानी में उतरकर बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को सुनते दिखे. उन्होंने बाढ़ पीड़ित महिलाओं को पांच-पांच सौ रुपए की मदद भी की. बाढ़ पीड़ित अपने सांसद रविशंकर प्रसाद से काफी नाराज दिखे. ग्रामीणों ने कहा कि उनके कई बार आश्वासन देने के बाद भी आज तक बख्तियारपुर दियारा के लोगों को पक्का पुल नहीं मिला है. बारिश में पीपा पुल भी हटा देने से लोग अपने घरों की छत पर कैद होकर रह जाते हैं. सबसे ज्यादा परेशानी तो गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को होती है, जो उचित इलाज नहीं मिलने पर दम तोड़ देते हैं.
लखीसराय में 17 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित, 5 हजार राहत पैकेट भेजने का लक्ष्य
जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत सामग्री वितरण की तैयारियां तेज कर दी है. जिले के बड़हिया, लखीसराय, सूर्यगढ़ा और पिपरिया प्रखंड के करीब 17 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं. प्रभावित परिवारों तक आवश्यक खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए राहत पैकेज तैयार कर भेजा जा रहा है. शहर के सम्राट अशोक भवन में राहत सामग्री की पैकेजिंग का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. पैकेजिंग के काम में आंगनबाड़ीकर्मियों के साथ ही नगर परिषदकर्मियों को भी लगाया गया है. आपूर्ति पदाधिकारी ने बताया कि तैयार किए जा रहे प्रत्येक राहत पैकेट में पांच किलो चूड़ा, एक किलो गुड़, एक किलो नमक, चना और दो किलो सत्तू रखा जा रहा है. तैयार पैकेट को प्रभावित गांवों में भेजा जा रहा है.
पंकज वर्मा, हितेश कुमार आश्विनी कुमार, मनीष कुमार सिंह, प्रशांत कुमार की रिपोर्ट