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Bihar Flood: बाढ़ के बीच लोगों के गुस्से का शिकार हो रहे BJP सांसद-विधायक! अब सिग्रीवाल और मंटू सिंह का विरोध

बाढ़ के आक्रोश का शिकार हो रहे जनप्रतिनिधि, वीडियो वायरल दो तस्वीरें कई सवाल छोड़ गईं, बाढ़ की त्रासदी के बीच लोगों का गुस्सा अब जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंच रहा है. सामने आईं दो तस्वीरें सारण की मौजूदा स्थिति और बाढ़ पीड़ितों के आक्रोश की कहानी बयां करती हैं.

Bihar Flood: बाढ़ के बीच लोगों के गुस्से का शिकार हो रहे BJP सांसद-विधायक! अब सिग्रीवाल और मंटू सिंह का विरोध
Image Credit: बीजेपी सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल का विरोध (Zee Media)

बिहार में बाढ़ का दंश झेल रहे लोग अब अपना गुस्सा जन-प्रतिनिधियों पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं. हाल ही में पश्चिम चंपारण से बीजेपी सांसद डॉ. संजय जायसवाल को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा था. अब महाराजगंज से बीजेपी सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और अमनौर से बीजेपी विधायक कृष्ण कुमार सिंह उर्फ मंटू सिंह को भारी विरोध-प्रदर्शन का सामना करना पड़ा. दोनों तस्वीरों में अलग-अलग जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों के बीच उनका दर्द जानने और मदद पहुंचाने पहुंचे, लेकिन उन्हें भी लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा.

जनार्दन सिंह सिग्रीवाल का भारी विरोध

पहली तस्वीर महाराजगंज के बीजेपी सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल की है. तरैया विधानसभा के पानापुर इलाके में तटबंध टूटने के बाद सांसद बाढ़ प्रभावित लोगों का हाल जानने पहुंचे थे. इसी दौरान कुछ लोगों ने उनका विरोध किया और उनके साथ गाली-गलौज भी की. हालांकि, सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में सांसद ने संयम बनाए रखा. उन्होंने अधिकारियों से बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं और उनके दर्द को साझा करते हुए जल्द से जल्द राहत और समाधान की दिशा में काम करने का आग्रह किया.

अमनौर विधायक का भी विरोध

दूसरी तस्वीर अमनौर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक कृष्ण कुमार सिंह उर्फ मंटू सिंह की है. मंटू सिंह दूसरी बार अमनौर के विधायक हैं. वे भी बाढ़ प्रभावित इलाके में लोगों का हाल जानने पहुंचे थे. वहां कुछ युवकों के साथ उनकी नोकझोंक और गाली-गलौज की स्थिति बन गई. विधायक ने भी संयम का परिचय दिया और किसी तरह के विवाद में पड़ने के बजाय वहां से निकल जाना ही बेहतर समझा. इन दोनों घटनाओं को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा होता है- प्राकृतिक आपदा के समय जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता के बीच उनका दर्द समझने और मदद पहुंचाने पहुंचेंगे, अगर उनका सामना इसी तरह के आक्रोश और दुर्व्यवहार से होगा, तो आखिर वे काम कैसे करेंगे?

जन-प्रतिनिधियों के सामने बड़ी चुनौती

यह भी सच है कि बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा यूं ही नहीं है. कई दिनों से लोग पानी, भोजन, आवागमन, राहत सामग्री और सुरक्षित स्थान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे हालात में उनका आक्रोश समझ में आता है. लेकिन गुस्सा अपनी जगह है और जनप्रतिनिधियों के साथ गाली-गलौज या दुर्व्यवहार अपनी जगह. बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है और इससे निपटने के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधि और जनता- तीनों के बीच संयम, संवाद और सहयोग जरूरी है. सामने आईं ये दोनों तस्वीरें न केवल जन-प्रतिनिधियों के सामने खड़ी चुनौती दिखाती हैं, बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर करती हैं कि आक्रोश की अभिव्यक्ति आखिर कितनी दूर तक उचित है?

रिपोर्ट- राकेश सिंह

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About the Author

K. Raj Mishra

K. Raj Mishra

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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