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गंडक नदी का तटबंध टूटा, डूबे गांव: सारण और मुजफ्फरपुर में बाढ़ से तबाही के बाद 7 इंजीनियर सस्पेंड

गंडक नदी का तटबंध टूटा से सारण और मुजफ्फरपुर में भारी तबाही देखने को मिल रही है. कई गांव डूब गए हैं, लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. वहीं, लापरवाही को लेकर 7 इंजीनियर सस्पेंड किए गए हैं.

Edited By Ranjana Kumari
Published: Oct 05, 2026, 11:06 AM IST | Updated: Oct 05, 2026, 11:29 AM IST
Image Credit: सारण और मुजफ्फरपुर में बाढ़ से तबाही, 7 इंजीनियर सस्पेंड (AI Generated Image)
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बिहार में गंडक नदी में आई बाढ़ के बाद सरकार ने तटबंधों की सुरक्षा और क्षति के मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है. जल संसाधन विभाग ने गोपालगंज और छपरा में तटबंध क्षतिग्रस्त होने और उसके बाद अपेक्षित कार्रवाई में लापरवाही और शिथिलता बरतने के आरोप में सात इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

गोपालगंज में तीन अधिकारियों पर कार्रवाई
विभाग की ओर से जारी अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार, गोपालगंज बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल से जुड़े तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है. इनमें तत्कालीन कार्यपालक अभियंता मो. साजिद इकबाल, तत्कालीन अवर प्रमंडल पदाधिकारी मो. जावेद अंसारी और तत्कालीन कनीय अभियंता विकास कुमार शामिल हैं. तीनों पर तटबंध क्षतिग्रस्त होने के बाद अपेक्षित कार्रवाई में लापरवाही और शिथिलता बरतने का आरोप है.  

इन अधिकारियों को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 (1) (क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, गया का कार्यालय निर्धारित किया गया है. इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा.

छपरा में चार इंजीनियरों पर कार्रवाई
इसी तरह रविवार देर रात जारी अधिसूचना के मुताबिक, छपरा बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण प्रमंडल में तटबंध क्षतिग्रस्त होने के मामले में चार इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई है. इनमें कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार प्रभाकर, अवर प्रमंडल पदाधिकारी सुनील कुमार, अवर प्रमंडल पदाधिकारी बिनोद कुमार और कनीय अभियंता चंद्रशेखर कुमार शामिल हैं.

छपरा से जुड़े इन चारों अधिकारियों को भी बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 (1) (क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, जल संसाधन विभाग, डिहरी का कार्यालय निर्धारित किया गया है. इन्हें भी नियमों के तहत जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा.

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जानें क्या है पूरा मामला-
दरअसल, सितंबर के अंतिम सप्ताह में नेपाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई थी. इससे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण समेत कई जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई. नदी के बढ़े जलस्तर के कारण कई स्थानों पर तटबंधों पर दबाव बढ़ा और क्षति की स्थिति सामने आई. बाढ़ की स्थिति के बीच सरकार और जल संसाधन विभाग की ओर से तटबंधों की लगातार निगरानी, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे.

अब विभाग ने लापरवाही के आरोप में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि तटबंधों की सुरक्षा और बाढ़ के दौरान आपदा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर शिथिलता को गंभीरता से लिया जाएगा. सात इंजीनियरों के निलंबन की यह कार्रवाई गंडक बाढ़ के बाद सरकार की ओर से जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

-आईएएनएस

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रंजना कुमारी Zee Bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-Editor अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं. बिहार के सिवान जिले के जीरादेई से ताल्लुक रखने वाली रंजना स्थानीय और जमीनी मुद्दों पर गहरी पकड़ रखती हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वे मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और देश-दुनिया की अहम रूटीन खबरों को प्रमुखता से कवर करती हैं. Zee Media का हिस्सा बनने से पहले रंजना ने न्यूज इंडिया 24x7 में भी डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं दी थीं. एकेडमिक की बात करें तो रंजना GJU से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं.
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