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बिहार में किसानों तक खाद को पहुंचाने के लिए सम्राट सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है. प्रदेश में आज (मंगलवार 1 सितंबर) से फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम (FSAS) लागू हो रहा है. इससे उर्वरक बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी, सुव्यवस्थित, जवाबदेह और किसान-केंद्रित होगा. इस प्रक्रिया के तहत अब खाद के लिए किसानों को उर्वरक दुकानों के चक्कर नहीं लगाने होंगे, बल्कि उन्हें घर बैठे मोबाइल के जरिए खाद मिला करेगी. शुरुआती दौर में FSAS को राजधानी पटना समेत 19 जिलों में लागू किया जा रहा है. इस एप की मदद से किसान अपने मोबाइल से घर बैठे ही खाद की ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं.
जानकारी के मुताबिक, इस एप में किसान की फसल और जमीन के हिसाब से खाद की मात्रा तय होगी. कहा जा रहा है कि नई व्यवस्था से खाद की ब्लैकमार्केटिंग बंद हो जाएगी. इस एप पर बुकिंग के बाद किसान खुदरा उर्वरक विक्रेता के POS मशीन के माध्यम से QR कोड स्कैन कर उतनी ही मात्रा में उर्वरक उठाव कर सकते हैं. इस नई व्यवस्था से किसानों को समय पर पूरी खाद उपलब्ध होगी. इस व्यवस्था में किसानों को खाद की दुकानों पर घंटों लाइन में लगने से मुक्ति मिलेगी.
कृषि निदेशालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार FSAS को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. इसका पायलट प्रोजेक्ट सबसे पहले वैशाली और शेखपुरा में चलाया गया था. इसके बाद प्रथम चरण में पांच जिलों में इसका सफल प्रयोग किया गया. अब राजधानी पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सारण, सिवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और भागलपुर में इसे लागू किया जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक, यह प्रणाली IFMS और AgriStack के एकीकरण के माध्यम से किसानों द्वारा उर्वरकों की खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगी. नई व्यवस्था को सिर्फ सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं रखा गया है. उर्वरक के खुदरा विक्रेताओं को भी FSAS से संबंधित प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया है. किसानों को खाद खरीदने के दौरान तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए उन्हें भी इस एप की ट्रेनिंग दी जा रही है.