विक्रमशिला सेतु पर 3 महीने के लिए थमेगा पहिया: जलमार्ग से मिलेगी राहत, बियाडा घाट से फ्री जहाज सेवा शुरू
विक्रमशिला सेतु पर बुधवार की रात से नो एंट्री का बोर्ड लग जाएगा. तीन महीने तक इस पुल से पर गाड़ियों का पहिया थम जाएगा. हालांकि, प्रशासन ने वैकल्पिक रास्ते का इंतजाम किया है. यात्रियों के लिए जलमार्ग से राहत मिलेगी, जिसके लिए बियाडा घाट से मुफ्त जहाज सेवा शुरू की गई है.
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर 30 सितंबर, 2026 (बुधवार) की रात से वाहनों के पहिए पूरी तरह थम जाएंगे. सेतु पर परिचालन बंद कर दिया जाएगा. इसके बाद करीब तीन महीने तक विक्रमशिला सेतु पर आवाजाही बंद रहेगी और लोगों को वैकल्पिक रास्तों के साथ जलमार्ग का सहारा लेना होगा. दरअसल, 3 मई की रात सेतु का एक स्लैब क्षतिग्रस्त होकर गंगा में समा गया था. इसके बाद छोटे वाहनों के आवागमन के लिए बेली ब्रिज तैयार किया गया था. अब बेली ब्रिज को हटाकर सेतु के चार क्षतिग्रस्त स्पैन पर ट्रस ब्रिज लगाया जाएगा.
एस.पी. सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी की साइट पर ट्रस ब्रिज के गार्डर तैयार किए जा रहे हैं. करीब 98 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले इस काम को करीब तीन महीने में पूरा करने का दावा किया गया है. सेतु बंद होने के बाद की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी अलंकृता पांडे और एसएसपी प्रमोद यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी तस्वीर साफ की है. ट्रस ब्रिज के निर्माण के साथ सेतु के अन्य एक्सपेंशन जॉइंट्स की भी जांच की जाएगी.
वहीं, सड़क मार्ग के विकल्प के तौर पर जलमार्ग को भी तैयार किया जा रहा है. बियाडा घाट से यात्रियों के लिए जहाज चलेंगे, जबकि बाबूपुर घाट से कार्गो जहाज की सुविधा होगी. यात्री जहाजों पर सफर निःशुल्क रहेगा, जबकि दोपहिया वाहनों के परिवहन के लिए शुल्क लिया जाएगा. जहाजों पर मजिस्ट्रेट की तैनाती होगी और गंगा में 24 घंटे पेट्रोलिंग की व्यवस्था रहेगी.
घाटों के दोनों तरफ सहायक थाने बनाए जाएंगे और यात्रियों के लिए जीविका दीदी की रसोई भी संचालित की जाएगी, लेकिन चुनौती सिर्फ सेतु बंद होने की नहीं है. गंगा अभी भी उफान पर है और बारिश के बाद जलस्तर बढ़ने की संभावना बनी हुई है. ऐसे में सड़क के साथ जलमार्ग से आवागमन भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहेगा. विक्रमशिला सेतु बंद होने का असर भागलपुर से नवगछिया, कटिहार और पूर्णिया की ओर आने-जाने वाले लोगों के साथ कारोबार और खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है. पर्व-त्योहारों के इस दौर में माल ढुलाई और किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन सकता है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब तीन महीने तक चलने वाले इस काम के दौरान लोगों की मुश्किलें कितनी बढ़ेंगी और 98 करोड़ की लागत से तैयार होने वाला ट्रस ब्रिज तय समय पर बनकर तैयार हो पाएगा या नहीं. निगाहें इस बात पर भी हैं कि विक्रमशिला सेतु पर सामान्य परिचालन आखिर कब तक बहाल हो सकेगा.
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार