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बगहा सदर अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल: गले में घुसा हंसिया, 1 घंटे की मशक्कत के बाद बची महिला की जान

Bagaha News: बिहार के बगहा में घास काटकर लौट रही महिला की गर्दन में हंसिया घुस गया. गंभीर हालत में परिजन उसे अनुमंडल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉ. रामप्रवेश भारती के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हंसिया निकालकर महिला की जान बचाई.

बगहा सदर अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल: गले में घुसा हंसिया, 1 घंटे की मशक्कत के बाद बची महिला की जान
Image Credit: बगहा सदर अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल (zee media)

Bagaha News: धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों ने आज एक बेमिसाल पहल की है. बगहा, सदर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने तत्परता दिखाते हुए एक महिला की जान बचाई है. दरअसल, बगहा के चखनी रजवटिया निवासी निर्मला देवी के गले में घास काटकर लौटने के दौरान हंसिया घुस गया. गर्दन में हंसिया घुसने के कारण वह जिंदगी और मौत से जूझने लगीं. इसके बाद परिजन आनन-फानन में उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महिला के गले से हंसिया निकाला और उनकी जान बचाई. यही वजह है कि चिकित्सकों की इस पहल की जमकर सराहना हो रही है.

गर्दन में घुस गया हंसिया
बताया जा रहा है कि बगहा के चखनी निवासी संजय कुमार यादव की पत्नी निर्मला देवी घास काटकर उसे बांधने के बाद अपने माथे पर रखकर लौट रही थीं. इसी दौरान अचानक हाथ फिसलने के कारण हंसिया उनकी गर्दन में करीब दो इंच गहराई तक घुस गया. इसके बाद महिला खून से लथपथ होकर बेसुध हो गईं. ग्रामीणों के सहयोग से परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया.

डॉक्टरों की टीम ने एक घंटे की मशक्कत के बाद निकाला हंसिया
इस संबंध में बगहा सदर हॉस्पिटल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुशीर आजम ने बताया कि डॉ. रामप्रवेश भारती के नेतृत्व में ओटी असिस्टेंट पंकज कुमार और अन्य चिकित्साकर्मियों ने तत्काल बिना देरी किए महिला निर्मला देवी के गले से हंसिया निकालने की प्रक्रिया शुरू की. करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हंसिया बाहर निकाला गया, जिसके बाद महिला की जान बचाई गई. अब महिला की हालत खतरे से पूरी तरह बाहर बताई जा रही है.

डॉक्टरों की तत्परता से महिला को मिली नई जिंदगी
बता दें कि बगहा जैसे छोटे शहर में सदर हॉस्पिटल के डॉक्टरों की साहसी पहल और तत्परता की वजह से आज एक महिला को नई जिंदगी मिली है. चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों की इस सराहनीय कोशिश की चारों ओर चर्चा हो रही है और उनकी जमकर प्रशंसा की जा रही है.

रिपोर्ट: इमरान अजीज

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About the Author

Rupak Kumar

Rupak Kumar

रुपक कुमार मिश्रा zee bihar Jharkhand की डिजिटल टीम में बतौर Sub-editor के तौर पर कार्यरत है. वे राजनीति, क्राइम, यूटिलिटी और रुटीन खबरों पर काम करते हैं. इसके अलावा, टेक्नोसिस मीडिया में इन्हें एक साल काम करने का अनुभव है. शिक्षा की बात करें तो राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी से इन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है.
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