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मजदूरी से लखपति दीदी बनने का सफर, जानिए मुंगेर की बबीता देवी की प्रेरणादायक कहानी

बिहार के मुंगेर जिला की बबीता देवी दूध का कारोबार करके 'लखपति दीदी' बन गईं हैं. उन पर परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ रही थीं, लेकिन आमदनी सीमित थी. उन्होंने बताया कि कभी परिवार को मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता था. मगर, कड़ी मेहनत से आज लाखों रुपए की कमाई हो रही है.

मजदूरी से लखपति दीदी बनने का सफर, जानिए मुंगेर की बबीता देवी की प्रेरणादायक कहानी
Image Credit: मुंगेर की बबीता देवी ने लिखी सफलता की कहानी, बनीं 'लखपति दीदी' (AI-Photo)

बिहार के मुंगेर जिले के सदर प्रखंड की नौवागढ़ी दक्षिणी पंचायत स्थित बजरंगबली नगर की रहने वाली बबीता देवी आज आत्मनिर्भरता और मजबूत इच्छाशक्ति की मिसाल बन चुकी हैं. कभी परिवार की सीमित आमदनी और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच भविष्य को लेकर चिंतित रहने वाली बबीता ने जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि दूध व्यवसाय को सफलता की नई ऊंचाई तक पहुंचाया.

बबीता देवी विष्णु जीविका स्वयं सहायता समूह, प्रेम जीविका महिला ग्राम संगठन और विश्वास जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ से जुड़ी हैं. बबीता की चार बेटियां हैं. परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ रही थीं, लेकिन आमदनी सीमित थी. कभी परिवार को मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता था. दिनभर मेहनत के बावजूद मिलने वाली मजदूरी से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दूसरी जरूरतें पूरी करना चुनौतीपूर्ण था. इसी दौरान बबीता देवी जीविका के स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं.

समूह की बैठकों में उन्होंने महिलाओं को छोटे-छोटे कारोबार के जरिए आत्मनिर्भर बनते देखा. नियमित बचत, समूह की बैठकों में होने वाली चर्चा और ऋण की सुविधा ने उनके भीतर भी कुछ नया करने का विश्वास पैदा किया. दूसरी महिलाओं की सफलता की कहानियों ने उन्हें स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. बबीता ने अपने पति संजीव ठाकुर से स्वरोजगार शुरू करने को लेकर चर्चा की. आसपास के गांवों में दूध की अच्छी उपलब्धता और मुंगेर शहर में इसकी मांग को देखते हुए दोनों ने दूध का कारोबार शुरू करने का फैसला किया.

बबीता ने अपने स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपए का कर्ज लिया. इसके बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों से दूध खरीदकर मुंगेर शहर में उसकी आपूर्ति शुरू की. शुरुआत में वे किसानों और पशुपालकों से करीब 37 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध खरीदते थे और इसे शहर के बड़े दुकानदारों, प्रसिद्ध मिठाई दुकानों और सुधा तक पहुंचाते थे. बाजार में उन्हें लगभग 50 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध बेचने का अवसर मिला. इस तरह प्रति लीटर करीब 13 रुपए का अंतर मिलने लगा.

छोटे स्तर से शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया. समय पर आपूर्ति, गुणवत्ता और ग्राहकों के साथ भरोसे का रिश्ता कायम करने से कारोबार का दायरा बढ़ता गया. आज बबीता देवी और उनके पति प्रतिदिन करीब 250 लीटर दूध की खरीद और बिक्री करते हैं. इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 3,000 से 3,500 रुपए तक का लाभ हो रहा है. इस कारोबार से उनकी वार्षिक आय 10 लाख रुपए से अधिक हो गई है.

इस आर्थिक बदलाव का सबसे बड़ा असर उनके परिवार के जीवन पर पड़ा है. चार बेटियों की मां बबीता अब बच्चों की पढ़ाई, पोषण और स्वास्थ्य पर पहले से बेहतर तरीके से खर्च कर पा रही हैं. परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ ही वह भविष्य के लिए बचत और कारोबार के विस्तार की योजना भी बना रही हैं. आर्थिक आत्मनिर्भरता ने बबीता के आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को भी बढ़ाया है.

आज गांव की दूसरी महिलाएं भी उन्हें देखकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो रही हैं. बबीता देवी अब जीविका के सहयोग से 'लखपति दीदी' की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं.

उनकी कहानी बताती है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती. सही दिशा, मजबूत इरादा, परिवार का सहयोग और समय पर मिला संस्थागत सहयोग किसी भी सामान्य परिवार की तस्वीर बदल सकता है. बबीता ने इसी विश्वास के साथ संघर्ष को अवसर में बदला और आज वह अपने परिवार के साथ-साथ गांव की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं.

इनपुट: आईएएनएस

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Shailendra

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शैलेंद्र जी न्यूज के रीजनल चैनल, जी बिहार झारखंड की डिजिटल टीम में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम करते हैं. वह बिहार और झारखंड की सियासत और क्राइम समेत कई समसामयिक मुद्दों पर न्यूज लिखते हैं. वह कभी-कभी राष्ट्रीय मुद्दों पर भी लिखते हैं. उनको मीडिया के तीनों प्रारूप प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल में काम करने का अनुभव. जनसंदेश टाइम्स, स्वतंत्र चेतना, टीवी 100, साधना न्यूज, एफएम न्यूज आदि न्यूज चैनलों से होते हुए न्यूज नेशन, इंडिया अहेड, ईटीवी भारत और न्यूज स्ट्रीट मीडिया (NYOOOZ) में अहम जिम्मेदारी निभाई. मीडिया जगत में सफर पिछले 12 सालों से बिना रुके जारी है.
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