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आज के समय में कार सिर्फ एक लग्जरी नहीं, बल्कि लोगों की जरूरत बन चुकी है. ऐसे में नई कार खरीदना जितना मुश्किल है, उससे भी ज्यादा मुश्किल है, उसकी सही समय पर देखभाल यानी मेंटेनेंस करना. कई बार लोग कार की छोटी-मोटी सर्विसिंग तो करा लेते हैं, लेकिन सबसे अहम हिस्से इंजन ऑयल पर सही ध्यान नहीं देते.
इंजन ऑयल को किसी भी गाड़ी का ब्लड यानी खून माना जाता है. अगर शरीर में सही खून का फ्लो न हो तो सेहत खराब होने में समय नहीं लगती, ठीक यही नियम आपकी कार के इंजन पर भी लागू होता है. अक्सर लोग जानकारी के अभाव में या पैसे बचाने के चक्कर में अपनी गाड़ी में गलत ग्रेड या गलत विस्कोसिटी यानी गाढ़ापन वाला इंजन ऑयल डलवा देते हैं. आपकी यह एक छोटी सी लापरवाही गाड़ी के कीमती इंजन को पूरी तरह से बर्बाद कर सकती है और आपको महंगे खर्चे में डाल सकती है.
ऐसे में सवाल आता है कि कार में सही इंजन ऑयल है या नहीं, इसको कैसे जानें? आइए आज के इस आर्टिकल में वे 5 संकेत जानते हैं, जो आपकी कार में गलत इंजन ऑयल का इशारा करते हैं.
हर गाड़ी के इंजन की बनावट अलग-अलग होती है. कार कंपनियां यूजर मैनुअल में साफ तौर पर दर्ज करती है कि आपकी कार के लिए कौन सा इंजन ऑयल सबसे बेस्ट है. अगर आप मैनुअल में दी गई सलाह के बिना गलत ग्रेड का ऑयल इस्तेमाल करते हैं, तो यह कार के इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है.
अगर आपकी कार का माइलेज अचानक कम हो गया है और आपको बार-बार पेट्रोल-डीजल भरवाना पड़ रहा है, तो इसका एक कारण गलत इंजन ऑयल हो सकता है. जरूरत से ज्यादा गाढ़ा ऑयल इंजन के पार्ट्स के फ्लो में बाधा डालता है. इससे इंजन को काम करने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है और पेट्रोल-डीजल की खपत काफी बढ़ जाती है.
एक्सीलेटर प्रेस करते समय अगर कार के साइलेंसर से नीला या काला धुआं निकल रहा है, तो यह ऑयल के कंबशन चैंबर में पहुंचने का इशारा है. गलत विस्कोसिटी का ऑयल इंजन के अंदरूनी हिस्सों से लीक होकर जलने लगता है, जिससे धुआं निकलता है और एमिशन टेस्ट में भी समस्या आ सकती है.
सामान्य परिस्थितियों में तय सर्विस पीरियड के बीच में इंजन ऑयल कम नहीं होना चाहिए. हालांकि, गलत ग्रेड के ऑयल के इस्तेमाल से इंजन में टेंपरेचर कम-ज्यादा होने लगता है. ज्यादा गर्मी के कारण ऑयल तेजी से भाप बनकर उड़ने लगता है, जिससे आपको बार-बार ऑयल टॉप-अप करना पड़ता है.
बहुत ज्यादा पतला या बहुत ज्यादा गाढ़ा ऑयल इंजन के टेंपरेटर को कंट्रोल नहीं कर पाता है. इससे इंजन के पार्ट्स पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है और गाड़ी ओवरहीट होने लगती है. अगर डैशबोर्ड पर टेम्प्रेचर वार्निंग लाइट जले, तो तुरंत गाड़ी रोककर चेक करानी चाहिए.