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'बिस्मिल्लाह, अंधेरा है...' एक Snapchat मैसेज, पुलिस पर शक और फ्रांस से बेल्जियम-इटली तक कैसे वायरल हुआ ये नारा?

फ्रांस के अंदर चल रहे प्रदर्शन से एक बेहद दिलचस्प नारा सामने आया है. धीरे-धीरे यह नारा अब फ्रांस से बाहर निकलकर बेल्जियम और इटली तक पहुंच गया है. चलिए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है.

Written By Tahir Kamran
Published: Oct 21, 2026, 07:09 PM IST | Updated: Oct 21, 2026, 07:16 PM IST
Image Credit: प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल होने वाले पोस्टर
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फ्रांस समेत यूरोप के अन्य देशों में हो रहे प्रदर्शनों से कई नए नारे भी मिले हैं. इन्हीं में से एक नारा 'Bismillah, c’est les ténèbres' है. जो ना सिर्फ फ्रांस बल्कि कई और देशों में भी चर्चा का विषय बन गया है. जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी इस नारे को दोहराया. जिसके बाद धीरे-धीरे यह फ्रांस से बाहर बेल्जियम और इटली के प्रदर्शनों तक पहुंच गया. दिलचस्प बात यह है कि इस नारे का इस्तेमाल पुलिस के खिलाफ मजाकिया तौर पर किया जा रहा है. चलिए जानते हैं कि इस नारे का मतलब क्या और क्यों यह चर्चा का विषय बना हुआ है.

सबसे पहले जानते हैं कि इस नारे की शुरुआत कैसे हुई. दरअसल फ्रांस में चल रहे प्रदर्शनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट का अहम रोल है. छात्रों ने स्नैपचैट पर ग्रुप बनाए हुए हैं और उसी पर अपनी रणनीति बनाते हैं. फ्रांसीसी अखबार 'Le Progrès' ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इसी बीच ‘Mamadou’ नाम के एक यूजर ने ग्रुप में शामिल होने के लिए मैसेज भेजा और वो मैसेज था, 'Salut ! Bismillah c’est les ténèbres. C’est quand le blocus wallah mon frangin. On va tous casser. Met moi dans le groupe blocus Aichek'. जिसका हिंदी अर्थ है, 'हाय! बिस्मिल्लाह, यह अंधकार है. नाकेबंदी कब होगी, भाई? हम सब कुछ तोड़ देंगे. मुझे नाकेबंदी वाले ग्रुप में जोड़ दो, शुक्रिया!'

छात्रों को मैसेज भेजने वाले पर संदेह हुआ

छात्रों को इस मैसेज की भाषा बेहद अजीब लगी और उन्हें शक हुआ कि यह कोई छात्र नहीं है. यह कोई और है जो उनके ग्रुप में शामिल होना चाहता और उनकी रणनीति पर नजर रखना चाहता है और वो छात्र बनकर बात करने की कोशिश कर रहा है. संभव है कि कोई पुलिसकर्मी ऐसा कर रहा हो, लेकिन वो अपनी मैसेज की अजीब भाषा के चलते संदेह में आ गया.  क्योंकि मैसेज में अरबी और फ्रेंच भाषा के शब्दों को अजीब तरीके से मिलाया गया था.

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मजाकिया अंदाज में नारे का जगह-जगह हुआ इस्तेमाल

फ्रांसीसी अखबार 'Le Progrès' के मुताबिक धीरे-धीरे इस मैसेज का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर फैल गया. छात्रों ने इस अटपटे वाक्यांश को अपनाया और मजेदार वीडियो भी इसको लेकर बनाने लगे. उन्होंने इसे अपने प्रदर्शन के पोस्टरों पर भी लिखना शुरू कर दिया और यह सब एक मजाकिया अंदाज में किया जा रहा था. फ्रांस की न्यू एंटी-कैपिटलिस्ट पार्टी ने भी इस वाक्यांश का इस्तेमाल युवाओं के अधिकारों से जुड़े एक पोस्टर में किया. जगह-जगह इस्तेमाल होने के चलते यह नारा छोटा होकर 'C’est les ténèbres' रह गया.

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फ्रांस में प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं

फ्रांस के अंदर चल रहे प्रदर्शन की शुरुआत सितंबर के मध्य में क्रेतेइल (Créteil) शहर से हुई और बहुत जल्द ही इन प्रदर्शनों ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया. छात्रों ने स्कूल के लंबे समय, खचाखच भरी कक्षाओं, जर्जर होती स्कूल इमारतों और शिक्षकों की गैरमौजूदगी के खिलाफ विरोध जताया है. कई लोगों का तर्क है कि इन समस्याओं का सबसे बुरा असर मजदूर वर्ग के इलाकों और अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ रहा है. सिर्फ 2 अक्टूबर को ही, प्रदर्शनों और नाकेबंदी के की वजह से लगभग 400 स्कूल बंद रहे. बाद में 17 अक्टूबर को छात्रों का यह विरोध-प्रदर्शन जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शनों में शामिल हो गया, जो दंगे और लूटपाट में बदल गया. इस दौरान हजारों की तादाद में प्रदर्शनकारियों और दंगाइयों को हिरासत में लिया गया. 

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About the Author

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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