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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि वह जल्द ही ईरान के सबसे सीक्रेट अंडरग्राउंड ठिकाने पिकैक्स माउंटेन पर हमला कर सकते हैं. ओवल दफ्तर में ट्रंप ने कहा, 'हमें पता है कि पिकैक्स के अंदर क्या जा रहा है. हमें पता है कि ईरान में क्या हो रहा है. अगर कुछ गलत नजर आएगा तो हम अटैक कर देंगे.'
यह बयान ऐसे वक्त पर आया है, जब अमेरिकी सेना ने ईरान के मिलिट्री ठिकानों पर और हमले किए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन ऑपरेशन्स में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें एयर-डिफेंस सिस्टम, रडार सिस्टम, सी एसेट्स, माइन बिछाने की क्षमताएं और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल थीं.
लेकिन पिकैक्स माउंटेन बिल्कुल अलग तरह की चुनौती है. ईरान की तबाह हो चुकी नतांज यूरेनियम-एनरिचमेंट फैसिलिटी के पास एक पहाड़ के नीचे गहराई में बने इस कॉम्प्लेक्स में दो बेहद सेफ टनल सिस्टम होने का अनुमान है और बाहरी लोगों की नजर से यह काफी हद तक छिपा हुआ है.
इसे फारसी में 'कुह-ए-कोलांग गज ला' के नाम से जाना जाता है. पिकैक्स माउंटेन ईरान के इस्फहान प्रांत में नतांज यूरेनियम-एनरिचमेंट प्लांट से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित है. ईरान ने इस अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स के बारे में बहुत कम जानकारी दी है और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के इंस्पेक्टरों को भी इसके अंदर जाने की इजाजत आज तक नहीं मिली. इसलिए, जो कुछ भी सार्वजनिक रूप से पता है, वह सैटेलाइट तस्वीरों और इंटेलिजेंस के अनुमानों का नतीजा है.
2020 से इस जगह पर बड़े पैमाने पर अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन वर्क चल रहा है. उस साल नतांज में एक एडवांस्ड सेंट्रीफ्यूज असेंबली वर्कशॉप के धमाके में तबाह होने के बाद यह काम तेज हो गया, जिसके बाद तेहरान ने एक बड़ी, ज्यादा एडवांस्ड और बेहतर सुरक्षा वाली अंडरग्राउंड रिप्लेसमेंट फैसिलिटी बनाने की योजना का ऐलान किया गया.
वॉशिंगटन के इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी का अनुमान है कि इस कॉम्प्लेक्स के कुछ हिस्से पहाड़ के नीचे 80 से 100 मीटर (लगभग 260 से 330 फीट) की गहराई में हो सकते हैं. अगर यह सही है, तो पिकैक्स ईरान की कई ज्ञात न्यूक्लियर साइट्स से ज्यादा गहरा होगा और एयरस्ट्राइक में इसे नुकसान पहुंचाना काफी मुश्किल होगा.
फिलहाल यह साफ नहीं है. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने जून में रिपोर्ट दी थी कि इजरायली इंटेलिजेंस का अनुमान है कि जून 2025 में अमेरिका-इजरायल के 12 दिनों के बमबारी अभियान के बाद ईरान ने हजारों यूरेनियम-एनरिचमेंट सेंट्रीफ्यूज, पुर्जे या अन्य संवेदनशील डिवाइस पिकैक्स माउंटेन में ट्रांसफर किए होंगे.
उस रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि ईरान ने सेंट्रीफ्यूज को पिकैक्स माउंटेन में शिफ्ट किया हो सकता है. लेकिन साथ ही यह भी कहा कि हमारे पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है.
कुछ एनालिस्ट का यह भी मानना है कि अगर ईरान अपनी क्षमताओं को फिर से रेडी करता है या उनका विस्तार करता है, तो इस अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स का इस्तेमाल एडवांस्ड सेंट्रीफ्यूज के प्रोडक्शन या असेंबली में मदद के लिए किया जा सकता है. वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी के सीनियर फेलो फर्जिन नदीमी ने DW को बताया कि पिकैक्स माउंटेन का रणनीतिक महत्व बंकर-बस्टर बमों से मुकाबला करने की इसकी क्षमता और नतांज न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स के पास होने में है.
उन्होंने कहा, 'ईरान की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए, यह उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य में यूरेनियम एनरिचमेंट और हथियारों से जुड़ी गतिविधियां आखिर एक ही, बहुत सुरक्षित जगह पर फोकस्ड हो सकती हैं. लिहाजा पिकैक्स माउंटेन इस भूमिका के लिए सबसे सही जगह है.'
ईरान ने हमेशा कहा है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम शांति के लिए है और उसने परमाणु हथियार बनाने की कोशिश से इनकार किया है.
बंकर-बस्टर बमों को जमीन के नीचे फटने से पहले चट्टान और मिट्टी को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है. लेकिन पिकैक्स के साथ एक और समस्या है- इसकी सुरंगों की सही गहराई और बनावट, और साथ ही उनके अंदर मौजूद किसी भी संवेदनशील डिवाइस की जगह के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं है.
DW की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स को तबाह करने की कोशिश करने के बजाय, हमले का मकसद सुरंग के एंट्री गेट्स को गिराना, आने-जाने के रास्तों को नुकसान पहुंचाना या बुनियादी ढांचे को बेकार करना हो सकता है. इससे सुविधा को चलाना मुश्किल या असंभव हो सकता है, भले ही इसके सबसे गहरे हिस्से सुरक्षित रहें।
तब भी, नुकसान का आकलन करना मुश्किल होगा. नतांज या फोर्डो के बारे में फिर भी मुख्य सुविधाओं की पहचान सालों में की गई है. लेकिन पिकएक्स की आंतरिक बनावट अज्ञात है. इसलिए जमीन के ऊपर दिखाई देने वाला नुकसान जरूरी नहीं कि यह बताए कि पहाड़ के अंदर क्या हुआ है.

भले ही अमेरिकी हमला पिकैक्स माउंटेन की सबसे गहरी जगहों को तबाह करने में नाकामयाब रहे, फिर भी यह कॉम्प्लेक्स के आसपास काफी नुकसान पहुंचा सकता है. गहराई तक जाने वाले बमों से बार-बार हमले करने से चट्टानों की परतें टूट सकती हैं, ढलानें अस्थिर हो सकती हैं और पहाड़ को तबाह करने के बजाय जमीन के नीचे ढहने वाले क्षेत्र बन सकते हैं.
भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि बार-बार होने वाले झटकों से छोटे भूकंप के बराबर जमीन हिल सकती है, जिससे सुरंग के एंट्री गेट्स के आसपास चट्टानें गिर सकती हैं और भूस्खलन हो सकता है. अंडरग्राउंड रूम्स के ऊपर के हिस्से भी ढह सकते हैं.
बड़ा सवाल है कि अंदर क्या है. ऐसा कोई सार्वजनिक सबूत नहीं है कि पिकैक्स में कोई चालू परमाणु रिएक्टर है, इसलिए हमले से जरूरी नहीं कि चेरनोबिल या फुकुशिमा जैसी आपदाओं से जुड़ा रेडियोएक्टिव रिसाव हो. लेकिन अगर वहां यूरेनियम के कंपाउंड डिपॉजिट हैं, तो धमाके से दूषित धूल और मिट्टी फैल सकती है, जिससे सांस लेने या निगलने पर हेल्थ से जुड़े जोखिम पैदा हो सकते हैं. टकराव से धूल के बड़े बादल भी बन सकते हैं, जिनमें सिलिका, बारीक पिसा हुआ कंक्रीट और अन्य पदार्थ शामिल हों.
ज़मीन के नीचे मौजूद चट्टानों को नुकसान पहुंचने से जमीन के पानी के बहाव में बदलाव आ सकता है और अगर वहां कोई खतरनाक चीज मौजूद हो, तो दूषित तत्व एक्विफर (जमीन के अंदर मौजूद पानी का भंडार) तक पहुंच सकते हैं. साथ ही, जमीन धंसने या भूस्खलन से आस-पास की नदियों और स्थानीय पानी की क्वॉलिटी पर भी असर पड़ सकता है. इस तरह के असर का पैमाना इस बात पर निर्भर करेगा कि हमला कितना बड़ा है और पहाड़ के नीचे असल में क्या चीजें रखी हुई हैं.
जरूरी नहीं. एक सफल हमले से हो सकता है कि यह जगह इस्तेमाल के लायक न रहे. हालांकि, ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका मिलिट्री अभियान पहले ही सफल हो चुका है. उन्होंने शुक्रवार को कहा, 'हमें 5 महीने हो चुके हैं और आप जानते हैं कि हमने इन पांच महीनों में क्या किया? उनके पास परमाणु हथियार नहीं होगा; हमने यही किया है.' उन्होंने आगे कहा, 'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा क्योंकि अगर ऐसा होता, तो शायद आप यहां ज्यादा देर तक खड़े नहीं रह पाते.' फिलहाल, 'पिकैक्स माउंटेन' ईरान के एटमी प्रोग्राम से जुड़ी उन जगहों में से एक है जिनके बारे में बहुत कम जानकारी है और जिनकी सिक्योरिटी बेहद सख्त है. अगर ट्रंप अपनी धमकी पर अमल करते हैं, तो इसके नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि पहाड़ के नीचे क्या है और अमेरिका हमले के लिए कौन से हथियार चुनता है.