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काम शुरू होने से ठीक पहले ट्रंप के 'विजय द्वार' पर कानूनी ग्रहण! पूर्व सैनिकों ने क्यों खटखटाया अदालत का दरवाजा?

वॉशिंगटन में 250 फीट ऊंचा 'विजय द्वार' बनाना डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट है. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक सरकार 5 नवंबर से ही इसका काम शुरू कराने की तैयारी में है.

Written ByBhoopendra Rai
Published: Oct 25, 2026, 07:58 PM IST|Updated: Oct 25, 2026, 08:05 PM IST
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काम शुरू होने से ठीक पहले ट्रंप के 'विजय द्वार' पर कानूनी ग्रहण! पूर्व सैनिकों ने क्यों खटखटाया अदालत का दरवाजा?
Image Credit: AI

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Bhoopendra Rai

Bhoopendra Rai

पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ड्रीम प्रोजेक्ट 'ट्रायम्फ आर्च' (विजय द्वार) के निर्माण में देरी हो सकती है. कुछ पूर्व सैनिकों और एक आर्किटेक्चरल इतिहासकार ने इस ट्रायम्फ आर्च के काम को रोकने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. चार लोगों के इस ग्रुप ने फेडरल जज से निर्माण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. उनका आरोप है कि प्रशासन अमेरिकी संसद (कांग्रेस) से मंजूरी के बिना ही इसका काम शुरू करने जा रहा है.

दरअसल, 5 नवंबर को नेशनल कैपिटल प्लानिंग कमीशन (NCPC) इस प्रोजेक्ट के फाइनल प्लान पर डिसीजन लेने वाला है. अगर हरी झंडी मिल गई और बाकी सरकारी कागजी कार्रवाई पूरी हो गई, तो उसी दिन काम शुरू हो सकता है. इसी डर से याचिकाकर्ताओं ने गुरुवार को यूएस डिस्ट्रिक्ट जज तान्या चुटकन की कोर्ट पहुंचे और निर्माण पर अस्थाई रोक लगाने की मांग की. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब तक कानूनी विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक निर्माण रुका रहे.

कहां बन रहा 250 फीट ऊंचाई वाला यह स्मारक?

यह स्मारक लिंकन मेमोरियल से पोटोमैक नदी पार अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री के ठीक पास वाले गोलचक्कर पर बनेगा. इसकी प्रस्तावित ऊंचाई 250 फीट (करीब 76 मीटर) रखी गई है. इसे अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने की खुशी में तैयार किया जा रहा है.

कैसे सामने आई 5 नवंबर की तारीख?

अमेरिकी न्याय विभाग ने 21 अक्टूबर को अदालत में एक नोटिस दाखिल किया था. यह नोटिस जज चुटकन के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें उन्होंने सरकार को काम शुरू करने से कम से कम 14 दिन पहले सूचित करने का निर्देश दिया था. अमेरिकी न्याय विभाग ने काम शुरू करने की तारीख 5 नवंबर बताई थी.

निर्माण से पहले पूरी करनी होंगी ये औपचारिकताएं

प्रशासन के मुताबिक काम शुरू करने से पहले कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी, जैसे एनसीपीसी की मंजूरी के अलावा, गृह विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ इंटीरियर) को फाइनल कंस्ट्रक्शन ऑर्डर जारी करना होगा और नेशनल पार्क सर्विस को जरूरी नोटिफिकेशन निकालना होगा. अधिकारियों का मानना है कि ये सारी औपचारिकताएं 5 नवंबर तक निपट सकती हैं.

याचिकाकर्ताओं को किस बात की चिंता?

5 नवंबर को काम शुरू होने की जानकारी लगते ही याचिकाकर्ता कोर्ट पहुंचे. उनकी सबसे बड़ी चिंता है कि अदालत जब तक स्मारक की वैधता पर फैसला सुनाएगी, तब तक जमीनी स्तर पर निर्माण शुरू हो चुका होगा. इसलिए याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि प्रशासन अदालती प्रक्रिया खत्म होने का इंतजार करने के बजाय तेजी से निर्माण की तैयारियों में जुटा है.

अमेरिकी प्रशासन ने 1925 के कानून का हवाला दिया

इस मामले में अमेरिकी प्रशासन 1925 में राष्ट्रपति केल्विन कूलिज द्वारा हस्ताक्षरित उस कानून का हवाला दे रहा है, जिसके तहत मेमोरियल ब्रिज के निर्माण की मंजूरी दी गई थी. एबीसी न्यूज के अनुसार, प्रशासन का तर्क है कि वह कानून इस प्रस्तावित मेमोरियल आर्क को भी कवर करता है, क्योंकि पुल के मूल डिजाइन में उसके छोर पर खंभे (कॉलम) शामिल थे. सरकार की इस दलील को याचिकाकर्ता पूरी तरह से खारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि 1925 का कानून मौजूदा भव्य स्मारक के लिए ढाल नहीं बन सकता और इसके लिए बाकायदा अमेरिकी कांग्रेस से विशेष मंजूरी लेना अनिवार्य है.

याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने साइट टेस्टिंग कर ली, डिजाइन तैयार करवा लिए और प्लानिंग कमीशन के पास पहुंच गए, लेकिन संसद की मंजूरी लेने की जहमत नहीं उठाई. हालांकि, ट्रंप द्वारा नियुक्त सदस्यों वाले यूएस कमीशन ऑफ फाइन आर्ट्स से इसे शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसे आयोगों के फैसलों से संसद की मंजूरी का सवाल खत्म नहीं हो जाता.

डिजाइन, स्नाइपर और लोकेशन पर सवाल

कानूनी पचड़े के अलावा, यह स्मारक अपने अजीबोगरीब साइज और राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से गिनाए गए इसके फायदों को लेकर भी चर्चा में बना हुआ है. राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि इसका यूज ड्रोन और स्नाइपर जैसे सिक्योरिटी ऑपरेशंस के लिए किया जा सकता है.

हालांकि, गृह विभाग (इंटीरियर डिपार्टमेंट) ने प्लानिंग कमीशन (एनसीपीसी) को जो डॉक्यूमेंट दिए हैं, उनमें ट्रंप के बताए मिलिट्री कॉम्प्लेक्स का कोई सीधा जिक्र तो नहीं है, लेकिन विभाग का कहना है कि इसका डिजाइन ऐसा रखा गया है कि जरूरत पड़ने पर यह सब सेटअप किया जा सके.

वहीं, इस ढांचे से आसपास के ऐतिहासिक और कुदरती माहौल पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पिछले महीने सितंबर में प्रशासन ने खुद यह बात मानी थी कि इस प्रोजेक्ट की वजह से पोटोमैक नदी के आसपास के नजारे और माहौल पर बुरा असर पड़ेगा. हालांकि, प्रशासन की दलील यह भी थी कि इस असर से पूरी तरह बचा भी नहीं जा सकता, क्योंकि स्मारक के लिए चुनी गई यह जगह अपने आप में बेहद अहम है.

इस कानूनी लड़ाई में वर्जीनिया का अर्लिंग्टन काउंटी बोर्ड भी शामिल

इस प्रोजेक्ट के खिलाफ अकेले पूर्व सैनिकों ने मोर्चा नहीं खोला है. इस कानूनी जंग की शुरुआत अक्टूबर में हुई थी, जब वर्जीनिया के अर्लिंग्टन काउंटी बोर्ड ने भी इसके विरोध में कोर्ट में एक अलग मुकदमा दायर किया था. बोर्ड ने प्रोजेक्ट में दिखाई जा रही इतनी जल्दबाजी पर सवाल खड़े किए थे और आरोप लगाया कि इसे पूरी जांच-परख और तय रिव्यू प्रोसेस के बिना ही जबरन आगे बढ़ाया जा रहा है. हालांकि, ट्रंप सरकार ने बोर्ड के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था.

फिलहाल, जज चुटकन ने दोनों पक्षों से कहा है कि वे शुक्रवार दोपहर तक आगे की अदालती कार्रवाई का पूरा शेड्यूल तय करके कोर्ट को सौंप दें. यह आर्क वॉशिंगटन में ट्रंप के उन कई बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिनकी वे पैरवी कर रहे हैं. इनमें एक पब्लिक गोल्फ कोर्स का कायापलट करने और जॉन एफ कैनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हैं.

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