वेनेजुएला का सियासी संकट: मादुरो गए, मचाडो लौटीं; सत्ता की बिसात पर अब क्या होगा?
वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल पीस प्राइज विनर मारिया मचाडो महीनों के निर्वासन के बाद आखिरकार अपने देश लौट आईं. वतन वापसी होते ही सबसे पहले चर्च पहुंची मचाडो ने मीडिया से मुलाकात में अपने अगले कदम का ऐलान नहीं किया है. हालांकि दिसंबर, 2025 के बाद ये पहला मौका था जब मचाडो वेनेजुएला में सार्वजनिक रूप से समर्थकों के बीच नजर आईं.
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो 10 महीने से ज्यादा समय तक निर्वासन में रहने के बाद अपने देश लौट आई हैं. उनकी वापसी ऐसे समय हुई है, जब देश के सियासी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इसी साल जनवरी में चलाए गए अमेरिकी डेल्टा फोर्स के एक ऑपरेशन में तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और सत्ता से बेदखली से पैदा सियासी संकट के बीच एक बार फिर से चुनावी चर्चा ने जोर पकड़ा है. मादुरो अमेरिकी जेल में बंद हैं, उनकी मुखर आलोचक और धुरविरोधी मचाडो की वतन वापसी के बाद मुल्क के सियासी संकट से जुड़े सवाल लोगों की जुबान पर चढ़ गए हैं. आपको बताते चलें कि मचाडो ने नॉर्वे में नोबेल शांति पुरस्कार लेने के लिए रात के घुप अंधेरे में स्पीडबोट से अपना देश छोड़ा था.
अभी अमेरिका की 'कठपुतली' सरकार
निकोलस की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप प्रशासन ने मादुरो की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का समर्थन करते हुए वेनेजुएला की हर संभव मदद करने का ऐलान किया था. ट्रंप के दबाव में रोड्रिगेज ने वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी.
जिसके बाद उन्होंने अमेरिका के साथ तेल समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिका को तमाम सहूलियत और फायदे मिले.
सियासी बिसात में अब आगे क्या?
रविवार को मचाडो की वेनेजुएला के लारा राज्य के एक चर्च में नजर आईं. जहां उनके समर्थक उन्हें गले लगाते और हाथ थामते नजर आए. मचाडो वहां एक प्रेयर मीट में शामिल होने पहुंची थीं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जब वो एक SUV में बैठकर वहां से निकलीं, तो उनके समर्थकों ने राष्ट्रगान गाया और 'आजादी' के नारे लगाए. वो अपनी मीडिया टीम के साथ राजधानी काराकास के लिए रवाना हो गईं. बीच रास्ते में जगह-जगह बड़ी तादाद में समर्थक उनका स्वागत करने के लिए नजर आए. मचाडो की वतन वापसी के बाद उनके अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.
यह अभी साफ नहीं है कि वेनेजुएला लौटने के बाद मचाडो आगे क्या करेंगी. हालांकि, वह पहले कह चुकी हैं कि अगर देश में चुनाव होते हैं तो वह फिर से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ेंगी. उनकी देश वापसी के लिए ट्रंप प्रशासन की मंजूरी अहम मानी जा रही थी. अब ऐसा लगता है कि उन्हें यह मंजूरी मिल गई है.
आठवें मौके में कामयाबी
इससे पहले भी उन्होंने कई बार वेनेजुएला लौटने की कोशिश की थी, लेकिन हर बार उन्हें नाकामी हाथ लगी थी. लेकिन इस बार फाइनली उनकी वतन वापसी हो ही गई. सितंबर में मचाडो के एक सलाहकार ने बताया था कि वेनेजुएला लौटने की सात कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं. हर बार उन्हें रोक दिया गया.
हालांकि ऐसी खबरें भी आई थीं कि उनकी वतन वापसी में देरी कराने में अमेरिका की हाथ था. हालांकि, अमेरिका ने इन खबरों से इनकार किया था.
मचाडो के सहयोगी और पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार एडमंडो गोंजालेज ने भी उनकी वापसी की पुष्टि करते हुए कहा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारी नेता, मेरी प्रिय मारिया कोरिना मचाडो, वेनेजुएला की धरती पर लौट आई हैं.'
गोंजालेज ने ये भी कहा, 'वेनेजुएला के लोगों के लिए ये एक निर्णायक दिन है. वो अपनी पूरी ताकत के साथ लौटी हैं, ताकि लोगों का नेतृत्व करके देश को दिशा दे सकें. मैं जल्द ही मचाडो के पास पहुंचकर देश को आजादी की ओर ले जाने की उनकी कोशिशों का हिस्सा बनूंगा.'
मचाडो के प्रवक्ता डेविड स्मोलान्स्की ने कहा, 'हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, अमेरिकी सरकार, कांग्रेस और सहयोगी देशों की सरकारों को हमें समर्थन देने के लिए धन्यवाद देते हैं.
मादुरो गए मचाडो लौटीं
2024 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष ने धांधली का आरोप लगाया था. लोकतंत्र की समर्थक मचाडो ने 2023 में विपक्ष की ओर से आयोजित राष्ट्रपति पद की प्राइमरी में जीत हासिल की थी. यह चुनाव मादुरो सरकार के आधिकारिक चुनाव प्राधिकरण के बाहर कराया गया था. इसमें उन्हें 90 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे.
'प्राइमरी' जीतने के बावजूद मादुरो सरकार ने मचाडो को राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोक दिया था. उन पर धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे. हालांकि मचाडो ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ये आरोप राजनीतिक कारणों से जबरन थोपे गए हैं.
2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मचाडो के सहयोगी एडमंडो गोंजालेज ने उनकी जगह मादुरो के खिलाफ चुनाव लड़ा था. सरकार के करीबी माने जाने वाले चुनाव प्राधिकरण ने विस्तृत वोटों का ब्योरा सार्वजनिक किए बिना मादुरो को विजेता घोषित कर दिया था. वेनेजुएला के राष्ट्रपति के रूप में वो उनका तीसरा कार्यकाल था.
विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद मादुरो सत्ता में बैठकर ट्रंप को लगातार ललकारते रहे, जिसकी परिणिति उनकी गिरफ्तारी और सत्ता से बेदखली के रूप में हुई. मादुरो न्यूयॉर्क की जेल में हैं, उन पर अमेरिका में ड्रग्स और हथियारों की तस्करी समेत अपने खुद के देश में विपक्ष की आवाज दबाने के आरोप हैं. हालांकि उन्होंने भी अब तक आरोपों को स्वीकार नहीं किया है.