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322 दिन तक जंग के मुहाने पर तैनात रहने के बाद अमेरिका के 'USS अब्राहम लिंकन' की घर वापसी हुई है. ईरान मिशन पर 10 महीने से ज्यादा का वक्त बिताकर जब यह जहाज सैन डिएगो पहुंचा, तो खुद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने क्रू के सामने नतमस्तक होकर उनका स्वागत किया. जहाज जब किनारे लगा, तो नजारा बेहद भावुक कर देने वाला था. हजारों जवान महीनों बाद अपने रोते-बिलखते परिवारों से गले मिले. कई जांबाजों ने तो पहली बार अपने नवजात बच्चों का चेहरा देखा.
यह एयरक्राफ्ट कैरियर समुद्र में 322 दिनों तक तैनात रहा. इस दौरान लगातार 265 दिन बिना रुके समंदर में बिताए गए. 20 साल के नाविक एबेल रामिरेज ने अपने पहले मिशन से लौटने पर राहत की सांस ली. उन्होंने कहा, 'यह अद्भुत अहसास है. एक वक्त ऐसा भी आया था जब मुझे लगा कि शायद मैं कभी यहां से वापस नहीं लौट पाऊंगा.'
USS Abraham Lincoln aircraft carrier came home after 321 days with its island covered in kill marks from the Iran War. Analysts counted at least 103 drone silhouettes and 34 ship silhouettes painted on the superstructure. The strike group flew 3,693 combat sorties, fired 450 Tomahawks, and spent a record 264 consecutive days at sea without a port call during Operation Epic Fury and the Iranian port blockade.
— Clash Report (@clashreport) October 9, 2026
'USS अब्राहम लिंकन' की वापसी महीनों से अपनों का इंतजार कर रहे परिवारों के लिए खुशियां लेकर आई, क्योंकि दर्जनों ऐसे जवान थे, जिन्होंने अपने बच्चों का चेहरा पहली बार देखा. जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन डेनियल कीलर ने बताया कि एयर विंग को मिलाकर ऐसे नए पिताओं की कुल संख्या 122 थी.
अपनी 6 महीने की बेटी साराही की उंगली थामे पति की राह देख रहीं कैथी मोंटेरोसा ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दिनों में जब भी वे समंदर में तैनात जहाज के मुश्किल हालातों की खबरें सुनती थीं, तो घबराहट से दिल बैठ जाता था. वहीं 14 साल की कैसिडी गार्दुके ने नम आंखों से कहा कि उसकी नौसैनिक मां इस मिशन पर थीं, इसी वजह से न तो उसकी सातवीं क्लास के दिनों में उसके साथ रह पाईं और न ही उसका बर्थडे साथ मना सकीं.
करीब 10 महीने तक मिशन पर तैनाती के वक्त सैनिकों के परिवारों ने क्रू मेंबर्स की मानसिक सेहत, राशन की किल्लत और घर पर बात न हो पाने को लेकर गहरी चिंता जताई थी. पहले तो अमेरिकी नौसेना ने इसे हल्के में लिया था, लेकिन बाद में माना कि परेशानियां तो थीं.
अगस्त में कार्यवाहक नौसेना सचिव हुंग काओ ने सफाई दी थी कि लगातार चल रहे कॉम्बैट ऑपरेशंस के चलते जहाज तक सामान पहुंचाना मुश्किल हो रहा था, जिससे खाने-पीने के ऑप्शंस जरूर घटे, पर राशन की पूरी कमी नहीं हुई. वहीं कैप्टन कीलर का कहना था कि इतने लंबे सफर में ऐसी दिक्कतें आम बात हैं, यह जहाज समंदर में तैरते किसी शहर जैसा है, जहां रोजमर्रा की मुश्किलें आ ही जाती हैं.
एपी (AP) की रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि नौसेना ने खुद अमेरिकी सांसदों को बताया था कि इस तैनाती के दौरान 8 नाविकों ने खुदकुशी की कोशिश की है. इससे साफ जाहिर होता है कि महीनों तक समंदर में फंसे रहने के चलते जवान किस कदर भारी मानसिक तनाव से जूझ रहे थे.
बुधवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री पेट हेगसेथ ने अब्राहम लिंकन का दौरा किया और क्रू को अमेरिकी सेना के सर्वोच्च सम्मानों में से एक 'प्रेसिडेंशियल यूनिट साइटेशन' से सम्मानित किया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट करके लिंकन की घर वापसी को ऐतिहासिक बताया. हेगसेथ ने बताया कि इस ग्रुप ने लगभग 3,700 लड़ाकू मिशन पूरे किए, 450 टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं, 77 अटैक ड्रोन मार गिराए, 64 ईरानी युद्धपोत डुबोए और 21 एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को नष्ट किया.
हेगसेथ ने उन सभी दावों को सिरे से खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि इस मिशन के दौरान जवानों का हौसला टूटा था. मुश्किल हालातों से निपटने और मिशन को कामयाब बनाने के लिए उन्होंने क्रू के जज्बे की जमकर तारीफ की.
पिछले साल नवंबर में सैन डिएगो से निकला यह जंगी जहाज जनवरी में मिडिल ईस्ट पहुंचा था, जिसके बाद इसी साल अगस्त में एशिया बेस वाले 'USS जॉर्ज वॉशिंगटन' ने इसकी कमान संभाली थी. यह अरब सागर और ओमान की खाड़ी, लाल सागर और अदन की खाड़ी, फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात रहा. यह हाल के इतिहास के सबसे लंबे मिशनों में से एक रहा है. इससे पहले 'USS गेराल्ड आर. फोर्ड' समंदर में लगातार 326 दिन बिताकर लौटा था.