SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

70 साल बाद सामूहिक कब्रें खोद रही अमेरिकी सेना: 24 घंटे में 2400 लाशें दफनाने का अभ्यास, आखिर क्या चल रहा ट्रंप के मन में?

यूएस 70 साल बाद कुछ ऐसा काम कर रहा है, जिससे दुनिया के कान खड़े हो गए हैं. उसकी सेना कम समय में सामूहिक कब्रें खोदने की बड़े पैमाने पर प्रैक्टिस कर रही है. आखिर इसका मतलब क्या है. ट्रंप क्या बड़ा करने जा रहे हैं.

Written By Devinder Kumar
Published: Nov 03, 2026, 11:23 PM IST | Updated: Nov 03, 2026, 11:56 PM IST
Image Credit: यूएस आर्मी 70 साल बाद बड़े पैमाने पर सामूहिक कब्रें खोदने की प्रैक्टिस कर रही (एआई इमेज)
Join

अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन के बाद ईरान पर और बड़े हमले की आशंका जाहिर की जा रही है. इस बीच अमेरिका की सेना ने कुछ ऐसी तैयारियां भी शुरू की हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि अमेरिका किसी बड़ी जंग के लिए तैयार हो रहा है. अमेरिकी सेना युद्ध के मैदान में मारे जाने वाले जवानों के लिए सामूहिक अस्थायी कब्रें तैयार करने की ट्रेनिंग कर रही है. इसके​ लिए बुलडोजर, खुदाई करने वाली मशीनों और इंजीनियरिंग यूनिट की मदद ली जा रही है.

अमेरिका सेना सामूहिक कब्रें क्यों खोद रही?

अमेरिका की सेना ऐसी तैयारी लगभग 70 वर्ष बाद कर रही है. इससे पहले उत्तर कोरियाई युद्ध में अमेरिका को इस तरह सामूहिक अस्थायी कब्रें तैयार करने की जरूरत पड़ी थी. आज आपको समझना चाहिए कि अमेरिका की इस तैयारी की वजह क्या है और अमेरिकी सैनिकों को किस तरह ये ट्रेनिंग दी जा रही है.

अमेरिकी सेना किसी युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में सैनिकों के मारे जाने की स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है. अमेरिका सेना की ट्रेनिंग ऐसी स्थिति में सैनिकों के शवों को सुरक्षित रखने, उनकी पहचान सुनिश्चित करने और बाद में उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की तैयारी से जुड़ी है. अमेरिकी सेना की थर्ड कोर और इंजीनियर टीमों ने मिलकर इसका अभ्यास किया. इस दौरान भारी बुलडोजर मशीनों से लंबे लंबे कब्रनुमा गड्ढे खोदे गए.

दो दशक बाद पादरियों को भी दी गई ट्रेनिंग

प्रैक्टिस के बाद अमेरिकी सेना ने अनुमान जताया है कि उनकी एक इंजीनियर कंपनी बिना रुके काम करे तो 24 घंटे में 2400 शवों के लिए अस्थायी कब्रें खोदकर उन्हें दफना सकती है. प्रैक्टिस के दौरान 20 वर्ष में पहली बार सेना के पादरियों को भी ट्रेनिंग दी गई. पादरियों को बताया गया कि युद्ध के मैदान में बिना किसी देरी के धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ जमीन को कैसे पवित्र किया जाए.

इराक और अफगानिस्तान जैसे पिछले सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिका को इतनी बड़ी संख्या में कब्रों की व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ी थी. इन युद्धों में अमेरिकी सैनिकों के मरने की संख्या इतनी कम थी कि शवों को तुरंत विमानों से अमेरिका भेज दिया जाता था. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं.

अमेरिका को किस बात का सता रहा डर?

अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक रूस, चीन या ईरान जैसी ताकतों से पूर्ण युद्ध छिड़ने पर पहले ही दिन हजारों सैनिक मारे जा सकते हैं. युद्ध के दौरान एयरस्पेस बंद होने और विमानों की कमी के कारण हजारों शवों को तुरंत अमेरिका वापस लाना संभव नहीं होगा. ऐसे में युद्ध के मैदान में ही शवों की पहचान दर्ज कर उन्हें अस्थायी रूप से दफनाया जाएगा, ताकि शवों के सड़ने और उनसे संक्रमण फैलने का खतरा न रहे. जंग खत्म होने के बाद इन शवों को सुरक्षित निकालकर उनके परिवारों को सम्मान के साथ सौंपा जाएगा.

अमेरिका का यह कदम दिखाता है कि पेंटागन आने वाले समय में किसी छोटे-मोटे आतंकवादी संगठन से नहीं, बल्कि बड़ी ताकतों से जंग की आशंका को ध्यान में रखकर तैयारियां कर रहा है. निकट भविष्य में ईरान के साथ ही ऐसी जंग की आशंका नजर आ रही है.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES