दक्षिण अफ्रीका में खूनी रात! कुछ घंटों में दो Mass Shooting, 27 लोगों की मौत, AK-47 से बरसीं गोलियां
दक्षिण अफ्रीका में एक के बाद एक दो गोलीबारी की घटनाओं से दहशत फैल गई है. दोनों घटनाओं में 27 लोगों की जान चली गई है. बताया जा रहा है कि हमलावर के पास AK47 और पिस्तौल भी थीं.
दक्षिण अफ्रीका से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आ रही है, यहां दो अलग-अलग जगहों पर हुई सामूहिक गोलीबारी में 27 लोगों की मौत हो गई है. पहली घटना शनिवार रात जोहान्सबर्ग के पास वेडेला टाउनशिप में हुई. स्थानीय पुलिस के मुताबिक यहां देर रात एक बार में 8 हमलावर आए, जिनके पास AK-47 और पिस्तौल भी थीं. अंदर घुसते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई. जोहान्सबर्ग वाली घटना के कुछ ही घंटों बाद रविवार तड़के केप टाउन के नजदीक एक अन्य टाउनशिप में दूसरी सामूहिक गोलीबारी हुई. इस घटना में 10 लोगों की जान चली गई.
दक्षिण अफ्रीका वर्षों से हिंसक अपराधों की उच्च दर से जूझ रहा है, लेकिन इस हफ्ते हुई सामूहिक गोलीबारी की घटनाओं ने उस देश को भी चौंका दिया है, जो दुनिया में हत्या की सबसे ऊंची दरों में से एक का सामना करता रहा है. हत्याओं की उच्च दर अफ्रीका की सबसे उन्नत अर्थव्यवस्था के लिए एक पुरानी समस्या रही है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, सामूहिक गोलीबारी की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं और हाल की हत्याएं अक्सर कई बंदूकधारियों द्वारा की गई हैं. इन हत्याओं का असर मुख्य तौर पर दक्षिण अफ्रीका के सबसे गरीब समुदायों पर पड़ता है और पुलिस ने इनमें से कुछ घटनाओं का संबंध आपराधिक गिरोहों से जोड़ा है.
दक्षिण अफ्रीका में सामूहिक गोलीबारी की घटनाएं
पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच तीन महीनों में दक्षिण अफ्रीका में 5427 हत्याएं हुईं, जो औसतन हर दिन लगभग 60 हत्याओं के बराबर है. हाल की अन्य सामूहिक गोलीबारी की घटनाओं में जून में जोहान्सबर्ग के एक गरीब इलाके में हुई घटना शामिल है जिसमें 12 लोग मारे गए थे और दिसंबर में दो सप्ताह के अंदर हुई दो घटनाएं शामिल हैं, जिनमें कुल 21 लोगों की मौत हुई थी.
सड़कों पर तैनात करनी पड़ी थी सेना
दक्षिण अफ्रीका में हिंसक अपराध के चलते राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को मार्च में देश के सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में अपराध से निपटने के लिए एक साल तक चलने वाले अभियान के तहत सड़कों पर सैनिकों को तैनात करना पड़ा था. इस तैनाती में जोहान्सबर्ग और केप टाउन के आस-पास के ज्यादा क्राइम वाले इलाके शामिल थे. तैनाती की घोषणा करते हुए रामाफोसा ने कहा कि संगठित गिरोहों के जरिए किया जाने वाला जुर्म दक्षिण अफ्रीका के लोकतंत्र और आर्थिक विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा है. कुछ आलोचकों ने सड़कों पर सैनिकों की तैनाती को इस बात की स्वीकारोक्ति के तौर पर देखा कि पुलिस नाकाम हो रही है.