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मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद अमेरिकी सियासत में खलबली मची हुई है.राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अब सिर्फ 2 साल का वक्त है. उनकी उम्र 80 साल हो चुकी है और उनको अगला कार्यकाल अब नहीं मिलेगा. ईरान से जंग और महंगाई, बेरोजगारी और तेल की बढ़ी हुई कीमतों के कारण अमेरिकी जनता बहुत गुस्से में है और इसका ट्रेलर रिपब्लिकन पार्टी ने चुनावों में देख लिया है.
एक तरफ जेडी वेंस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच दरार की खबरें आ रही हैं, तो दूसरी ओर ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कुछ लोगों की ओर से दावा किया जा रहा है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या उन्हें ट्रंप प्रशासन छोड़ देना चाहिए. इनके अनुसार, रुबियो और उनके सलाहकार उनके भविष्य के विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वे टॉप अमेरिकी राजनयिक और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अपने पदों से इस्तीफा देंगे या नहीं, और उनके जाने को लेकर अभी कोई समय-सीमा तय नहीं है.
हालांकि, रुबियो ने ट्रंप प्रशासन छोड़ने की योजना की खबरों को खारिज कर दिया है. साथ ही, उन्होंने अपने सियासी भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब देने से भी इनकार कर दिया. 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ट्रंप कार्यकाल के अंत तक उनके साथ काम करना हमेशा से मेरी योजना रही है.
पद छोड़ने की खबरों पर रुबियो ने कहा,'सच कहूं तो, मुझे नहीं पता कि ये बातें कहां से आती हैं. मुझे अपना काम बहुत पसंद है. और जब लोग कहते हैं कि वह अपनी नौकरी छोड़ने वाले हैं, तो मुझे हंसी आ जाती है. मैं पूछता हूं-'कौन सी नौकरी? रुबियो ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं, उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या वह 2028 में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं.
व्हाइट हाउस में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा,'मैं सच में अब 2028 के बारे में कोई बात नहीं करने वाला. मैं बस ऐसा नहीं करूंगा.' रुबियो ने कहा कि अगर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ते हैं, तो वे उनका समर्थन करेंगे.
मई में उन्होंने NBC न्यूज से कहा था, 'जेडी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. अगर वह राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ते हैं, तो मुझे लगता है कि वे एक बेहतरीन उम्मीदवार होंगे. मैंने सार्वजनिक रूप से कहा है, और मैं फिर से कहता हूं कि मैं सबसे पहले उनका समर्थन करने के लिए आगे आऊंगा.'
दूसरी ओर, रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मिडटर्म झटकों के बाद सर्जियो गोर का नाम व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ और विदेश मंत्री जैसे पदों के लिए चर्चा में है.'द वाशिंगटन सन' की एक रिपोर्ट में आंतरिक चर्चाओं से जुड़े 10 लोगों का हवाला दिया गया है. प्रशासन के भीतर इस बात पर चर्चा हो रही है कि ट्रंप के करीबी गोर ट्रंप के कार्यकाल के दूसरे हिस्से में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं. विदेश विभाग के अधिकारियों के बीच भी यह अटकलें तेज हैं कि गोर प्रमोशन पाना चाहते हैं.
प्रशासन के भीतर अच्छी पकड़ और ट्रंप तक सीधी पहुंच रखने वाले गोर, हाई लेवल की डिप्लोमैटिक एक्टिविटीज में लगातार हिस्सा ले रहे हैं. इस तरह, भारत में राजदूत की अपनी भूमिका से कहीं ज्यादा प्रभाव उन्होंने हासिल कर लिया है. उन्हें अमेरिका और कई एशियाई देशों के बीच एक अहम कड़ी के रूप में भी देखा जाता है, साथ ही वे विदेश मंत्री मार्को रुबियो के काफी करीबी और भरोसेमंद भी हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, कई वरिष्ठ पदों के लिए गोर का नाम सामने आया है. इनमें विदेश मंत्री के रूप में रुबियो की जगह लेना या व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में सूसी वाइल्स की जगह लेना शामिल है. कुछ अधिकारियों ने इस संभावना पर भी चर्चा की है कि वह क्रिस लैंडौ की जगह डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट का पद संभाल सकते हैं. हालांकि, इसकी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
हालांकि, गोर ने इन अटकलों को खारिज कर दिया और मार्को रुबियो की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता. उन्होंने कहा, मार्को रुबियो इतिहास के सबसे योग्य, सफल और बेहतरीन विदेश मंत्री साबित हुए हैं. उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता. वे मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त हैं, और भारत में अमेरिकी राजदूत के तौर पर उनके साथ हर दिन काम करना मेरे लिए खुशी की बात है. यह मेरे जीवन का एक बहुत बड़ा सम्मान है. मुझे किसी और भूमिका में कोई दिलचस्पी नहीं है.' भले ही तमाम बड़े नेता बदलाव की अटकलों को खारिज कर रहे हों लेकिन अमेरिकी सियासत में कोई तो खलबली मची हुई है.
बुधवार को सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट के जरिए, चुनाव के बाद के अपने विश्लेषण में वेंस ने एक तीखी टिप्पणी की थी, जिससे वे ट्रंप से अलग नजर आए थे. उपराष्ट्रपति ने रिपब्लिकन पार्टी के बेहद खराब चुनावी नतीजों के लिए ईरान के साथ चल रहे युद्ध को जिम्मेदार ठहराया.उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के लोग इजरायल को लेकर प्रशासन की नीति और अर्थव्यवस्था पर उनके संदेश के खिलाफ हो गए थे. राष्ट्रपति ने इजरायल का पुरजोर समर्थन किया है और महंगाई से जुड़ी चिंताओं को महज एक 'धोखा' बताकर खारिज कर दिया है.